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Basti News: बात-बात पर खो रहे धीरज.... मौत को लगा रहे गले
Wed, 01 Jan 2025 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 01 Jan 2025 12:22 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। वर्ष 2024 में खुदकुशी के मामलों की फेहरिस्त लंबी रही। 12 महीने में खुदकुशी के 65 मामले परेशान करने वाले हैं। इसमें किशोर-किशोरियाें से लेकर उम्रदराज लोगों ने भी खुद अपनी इहलीला समाप्त करने में भलाई समझी।
सामाजिक व्यवस्था को चुनौती देने वाली इन घटनाओं से सिर्फ युवाओं में ही नहीं, बल्कि हर आयुवर्ग के लोगों में चल रही उथल-पुथल का पता चलता है। सबसे ज्यादा प्रेम प्रसंग के मामले सामने आए। जबकि कर्ज से परेशान, बीमारी से आजिज, पारिवारिक दबाव जैसी वजह भी सामने आईं।
कई ऐसे भी प्रकरण सामने आए, जिसमें पुलिस या परिवार के लोगों को पता ही नहीं चल पाया कि आत्महत्या की वजह क्या थी? समाजशास्त्रियों का कहना है कि आत्महत्या करने की प्रवृत्ति होती है। इसमें तनाव या अभाव कोई मायने नहीं रखता। कई लोग विषम से विषम परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोते,वहीं कई मामूली बात पर ही आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।
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सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी नारायण बताते हैं कि इसके लिए सामाजिक व पारिवारिक व्यवस्था काफी हद तक जिम्मेदार है। परिवार, समाज, स्कूल-कॉलेज में ऐसा माहौल होना चाहिए यदि किसी के भीतर अंतरद्वंद्व चल रहा हो तो वह दूसरों से उसे व्यक्त करने में न हिचके। अपनी परेशानी व्यक्त कर देने पर कई लोगों का मन बदल जाता है। च
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बस्ती। वर्ष 2024 में खुदकुशी के मामलों की फेहरिस्त लंबी रही। 12 महीने में खुदकुशी के 65 मामले परेशान करने वाले हैं। इसमें किशोर-किशोरियाें से लेकर उम्रदराज लोगों ने भी खुद अपनी इहलीला समाप्त करने में भलाई समझी।
सामाजिक व्यवस्था को चुनौती देने वाली इन घटनाओं से सिर्फ युवाओं में ही नहीं, बल्कि हर आयुवर्ग के लोगों में चल रही उथल-पुथल का पता चलता है। सबसे ज्यादा प्रेम प्रसंग के मामले सामने आए। जबकि कर्ज से परेशान, बीमारी से आजिज, पारिवारिक दबाव जैसी वजह भी सामने आईं।
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कई ऐसे भी प्रकरण सामने आए, जिसमें पुलिस या परिवार के लोगों को पता ही नहीं चल पाया कि आत्महत्या की वजह क्या थी? समाजशास्त्रियों का कहना है कि आत्महत्या करने की प्रवृत्ति होती है। इसमें तनाव या अभाव कोई मायने नहीं रखता। कई लोग विषम से विषम परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोते,वहीं कई मामूली बात पर ही आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।
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सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी नारायण बताते हैं कि इसके लिए सामाजिक व पारिवारिक व्यवस्था काफी हद तक जिम्मेदार है। परिवार, समाज, स्कूल-कॉलेज में ऐसा माहौल होना चाहिए यदि किसी के भीतर अंतरद्वंद्व चल रहा हो तो वह दूसरों से उसे व्यक्त करने में न हिचके। अपनी परेशानी व्यक्त कर देने पर कई लोगों का मन बदल जाता है। च