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Basti News: नजूल की 38 जमीनों पर पट्टा... प्रशासन के पास कब्जेदारों का विवरण नहीं
Wed, 13 Mar 2024 01:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 13 Mar 2024 01:37 AM IST
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बीडीए कहां लगाए बोर्ड, कटरा से जिला कारागार तक नजूल की भूमि पर लोगों का कब्जा
39 गाटों की नजूल भूमि का क्षेत्रफल एक लाख वर्ग मीटर से अधिक, अधिकतर पर कब्जा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहरी क्षेत्र में नजूल की जमीन के बड़े भू-भाग पर लोगों का कब्जा है। प्रशासन के पास अब तक कब्जेदारों का ब्योरा ही संकलित नहीं हो पाया है। सिर्फ पांच मोहल्लों में 39 गाटे नजूल की भूमि के रूप में चिह्नित हैं। इनका क्षेत्रफल एक लाख वर्ग मीटर से अधिक है। इन पर सरकारी भवन, कार्यालय के अलावा निजी क्षेत्र की काॅलोनियां और कांप्लेक्स भी विकसित हो गए हैं।
नजूल की जमीन की उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद हलचल बढ़ गई है। महायोजना- 2031 में इन जमीनों की उपयोगिता से जुड़े प्रोजेक्ट भी प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में कागजी ब्योरा संकलित करने से काम चलने वाला नहीं है। मौके पर नजूल की जमीन पर कब्जे की गतिविधियां दिखानी होंगी। इसके लेकर बीडीए ऊहापोह में है।
अब तक कागजी ब्योरा जुटाकर काम चलाया जा रहा था। मगर राज्य सरकार की ओर से कब्जा खाली करनेककी पेशकश हुई तो बीडीए से लेकर राजस्व विभाग तक इससे किनारा कस लिया है। शहरी क्षेत्र में 38 बेशकीमती नजूल की जमीन का पट्टा किया गया है। इसमें सरकारी संस्थाएं और निजी क्षेत्र के लोग कब्जेदार है। यह सभी भूमि अनावासीय प्रकृति में आवंटित है। मगर अधिकतर पर आवास बना लिए गए हैं। मुख्य मार्गों के किनारे स्थित नजूल की जमीन पर कामर्शियल निर्माण किए गए हैं। कुछ जगहों पर काॅलोनियां भी विकसित हो गई हैं।
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राजस्व अभिलेख में सिविल जेल गांव के नाम दर्ज सिविल लाइन क्षेत्र की अधिकतर जमीन नजूल की है। यहां 100 एकड़ से अधिक जमीन नजूल की है। इन पर सरकारी उपक्रम स्थापित होने के अलावा निजी लोगों का भी कब्जा हो गया है।
सिविल लाइंस क्षेत्र में ही चांदीमारी के पास नजूल की लगभग दो बीघा जमीन पर एक राजनैतिक व्यक्ति का कब्जा हो गया है। यहां चहारदीवारी निर्माण के साथ लेबर रूम बनवाए गए थे। दो साल पहले प्रशासन ने इसे संज्ञान में लेकर कार्रवाई की। इस जमीन को कब्जा मुक्त कराकर प्रशासन ने सरकार का स्वामित्व स्थापित किया। इसके बाद इस तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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पांच मोहल्लों में सर्वाधिक नजूल की जमीन
शहर के विशुनपुरवा, तुरकहिया, मरवटिया राजा, सिविल लाइंस एवं बभनगांवा समेत पांच मोहल्लों में सर्वाधिक नजूल की जमीन है। इन मोहल्लों में कुल 39 गाटे नजूल के हैं। इसमें से 83276 वर्ग मीटर जमीन सरकारी उपयोग में आ रही है। 17 हजार वर्ग मीटर से अधिक जमीन के कब्जे का समुचित ब्योरा संकलित नहीं है। सरकारी अभिलेख में इस पर केवल कब्जा बताया जा रहा है।
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1986 के पहले नगर पालिका का था प्रबंधन का अधिकार
1986 के पहले शहरी क्षेत्र की नजूल की जमीन के प्रबंधन का अधिकारी नगर पालिका परिषद के पास रहा। इसके बाद शासन ने यह अधिकार कलक्ट्रेट के अधीन कर दिया। इसी के बाद इन जमीनों के आवंटन, पट्टे एवं कब्जा आदि के खेल बढ़ गए। नजूल की जमीन पर कब्जा करने के लिए कागज में भी हेरफेर किया गया है। तहसील से सांठगांव बनाकर पहले अभिलेखो से छेड़छाड़ कर लोगों ने नाम दर्ज करा लिए। इसके बाद स्थायी रूप से कब्जा जमा लिए। कुछ जमीन को खतौनी में नाम दर्ज होने के आधार पर कई-कई लोगों को बैनाम भी किया गया है।
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इन उपयोग में लानी है नजूल की जमीन
शासन के नए निर्देश के मुताबिक शहरी क्षेत्र में नजूल की जमीन का उपयोग जनसुविधा के दृष्टिगत किया जाना है। इस तरह की जमीन में शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए टैक्सी स्टैंड की स्थापना करनी है। इसके अलावा बहुमंजिला पार्किंग, पार्क, स्ट्रीट वेंडर जोन आदि विकसित करने हैं।
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कोट
नजूल की जमीनोका चिह्नांकन पूर्व से ही कराया गया है। कब्जेदारों का विवरण भी एकत्र कराया जाएगा। जिन जमीनों पर कब्जा है, उस पर विधिक रूप से कार्रवाई की जाएगी।
-शत्रुहन पाठक, एसडीएम सदर
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39 गाटों की नजूल भूमि का क्षेत्रफल एक लाख वर्ग मीटर से अधिक, अधिकतर पर कब्जा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहरी क्षेत्र में नजूल की जमीन के बड़े भू-भाग पर लोगों का कब्जा है। प्रशासन के पास अब तक कब्जेदारों का ब्योरा ही संकलित नहीं हो पाया है। सिर्फ पांच मोहल्लों में 39 गाटे नजूल की भूमि के रूप में चिह्नित हैं। इनका क्षेत्रफल एक लाख वर्ग मीटर से अधिक है। इन पर सरकारी भवन, कार्यालय के अलावा निजी क्षेत्र की काॅलोनियां और कांप्लेक्स भी विकसित हो गए हैं।
नजूल की जमीन की उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद हलचल बढ़ गई है। महायोजना- 2031 में इन जमीनों की उपयोगिता से जुड़े प्रोजेक्ट भी प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में कागजी ब्योरा संकलित करने से काम चलने वाला नहीं है। मौके पर नजूल की जमीन पर कब्जे की गतिविधियां दिखानी होंगी। इसके लेकर बीडीए ऊहापोह में है।
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अब तक कागजी ब्योरा जुटाकर काम चलाया जा रहा था। मगर राज्य सरकार की ओर से कब्जा खाली करनेककी पेशकश हुई तो बीडीए से लेकर राजस्व विभाग तक इससे किनारा कस लिया है। शहरी क्षेत्र में 38 बेशकीमती नजूल की जमीन का पट्टा किया गया है। इसमें सरकारी संस्थाएं और निजी क्षेत्र के लोग कब्जेदार है। यह सभी भूमि अनावासीय प्रकृति में आवंटित है। मगर अधिकतर पर आवास बना लिए गए हैं। मुख्य मार्गों के किनारे स्थित नजूल की जमीन पर कामर्शियल निर्माण किए गए हैं। कुछ जगहों पर काॅलोनियां भी विकसित हो गई हैं।
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राजस्व अभिलेख में सिविल जेल गांव के नाम दर्ज सिविल लाइन क्षेत्र की अधिकतर जमीन नजूल की है। यहां 100 एकड़ से अधिक जमीन नजूल की है। इन पर सरकारी उपक्रम स्थापित होने के अलावा निजी लोगों का भी कब्जा हो गया है।
सिविल लाइंस क्षेत्र में ही चांदीमारी के पास नजूल की लगभग दो बीघा जमीन पर एक राजनैतिक व्यक्ति का कब्जा हो गया है। यहां चहारदीवारी निर्माण के साथ लेबर रूम बनवाए गए थे। दो साल पहले प्रशासन ने इसे संज्ञान में लेकर कार्रवाई की। इस जमीन को कब्जा मुक्त कराकर प्रशासन ने सरकार का स्वामित्व स्थापित किया। इसके बाद इस तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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पांच मोहल्लों में सर्वाधिक नजूल की जमीन
शहर के विशुनपुरवा, तुरकहिया, मरवटिया राजा, सिविल लाइंस एवं बभनगांवा समेत पांच मोहल्लों में सर्वाधिक नजूल की जमीन है। इन मोहल्लों में कुल 39 गाटे नजूल के हैं। इसमें से 83276 वर्ग मीटर जमीन सरकारी उपयोग में आ रही है। 17 हजार वर्ग मीटर से अधिक जमीन के कब्जे का समुचित ब्योरा संकलित नहीं है। सरकारी अभिलेख में इस पर केवल कब्जा बताया जा रहा है।
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1986 के पहले नगर पालिका का था प्रबंधन का अधिकार
1986 के पहले शहरी क्षेत्र की नजूल की जमीन के प्रबंधन का अधिकारी नगर पालिका परिषद के पास रहा। इसके बाद शासन ने यह अधिकार कलक्ट्रेट के अधीन कर दिया। इसी के बाद इन जमीनों के आवंटन, पट्टे एवं कब्जा आदि के खेल बढ़ गए। नजूल की जमीन पर कब्जा करने के लिए कागज में भी हेरफेर किया गया है। तहसील से सांठगांव बनाकर पहले अभिलेखो से छेड़छाड़ कर लोगों ने नाम दर्ज करा लिए। इसके बाद स्थायी रूप से कब्जा जमा लिए। कुछ जमीन को खतौनी में नाम दर्ज होने के आधार पर कई-कई लोगों को बैनाम भी किया गया है।
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इन उपयोग में लानी है नजूल की जमीन
शासन के नए निर्देश के मुताबिक शहरी क्षेत्र में नजूल की जमीन का उपयोग जनसुविधा के दृष्टिगत किया जाना है। इस तरह की जमीन में शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए टैक्सी स्टैंड की स्थापना करनी है। इसके अलावा बहुमंजिला पार्किंग, पार्क, स्ट्रीट वेंडर जोन आदि विकसित करने हैं।
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कोट
नजूल की जमीनोका चिह्नांकन पूर्व से ही कराया गया है। कब्जेदारों का विवरण भी एकत्र कराया जाएगा। जिन जमीनों पर कब्जा है, उस पर विधिक रूप से कार्रवाई की जाएगी।
-शत्रुहन पाठक, एसडीएम सदर