{"_id":"624b22b3ec5cad277a3eb5d5","slug":"jeaes-control-to-sanchari-niyantran-abhiyan-basti-news-gkp432187975","type":"story","status":"publish","title_hn":"संचारी रोग नियंत्रण अभियान के चलते काबू में आया जेई\/एईएस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संचारी रोग नियंत्रण अभियान के चलते काबू में आया जेई/एईएस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संचारी रोग नियंत्रण अभियान से जेई/एईएस काबू
बस्ती। संचारी रोग अभियान चल रहा है। इसके बाद दस्तक को लेकर भी स्वास्थ्य महकमा सक्रिय होगा। इन दोनों अभियानों के चलते जिले में मस्तिष्क ज्वर व एक्यूट इंसेफ्लाटिस सिंड्रोम यानी एईएस काबू में है।
वर्ष- 2018 से पहले जेई के मरीज व मौत से जिला संवेदनशील श्रेणी में था। 2018 व 2019 में जेई से एक भी मौत नहीं हुई, मगर 2020 में पांच केस में से एक की मौत हो गई थी। आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो 2021 में जेई/एईएस पूरी तरह काबू में रहा। जेई के केवल दो केस आए। जबकि एईएस के 57 केस थे, मगर एक भी मौत नहीं हुई। 2022 में अब तक एईएस के चार केस आए थे, जिनका इलाज कर घर भेज दिया गया है। पूर्वांचल के लिए अभिशाप मस्तिष्क ज्वर ने न जाने कितनी मां की कोख उजाड़ दी और कितने घर बर्बाद हो गए। इससे निपटने के लिए सरकार ने तमाम प्रयत्न किए, मगर 2015 में संचारी रोग नियंत्रण अभियान के माध्यम से इस पर काबू पाने की पहल शुरू हुई। इसके बाद उत्तरोत्तर जेई-एईएस के बीमारों की संख्या कम हुई और मौत का आंकड़ा घटता गया। यानी संचारी रोग नियंत्रण अभियान के चलते इस पर अंकुश लगाया जा सका।
--
संचारी रोग नियंत्रण अभियान
इस अभियान में स्वास्थ्य के अलावा 12 अन्य विभाग भी लगाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का काम बुखार अथवा लक्षण वाले मरीजों को भर्ती कराकर उनका इलाज कराने की जिम्मेदारी है, जबकि अन्य विभागों के जिम्मे सफाई, छिड़काव, स्वच्छता जागरूकता आदि की जिम्मेदारी है। इसमें विकास व नगर निकाय के विभागों को शामिल किया गया है।
विज्ञापन
--
यह बोले एसीएमओ
एसीएमओ डॉ. फखरेयार हुसैन ने कहा कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान व दस्तक ने जेई व एईएस का बेहद कारगर ढंग से काबू में किया है। कहते हैं कि अब सरकार व उसके विभाग अपना काम कर रहे हैं, मगर आम जन का सहयोग नहीं मिल पा रहा है। सफाई, पानी एकत्रित न होने देने की सलाह, बुखार होने पर निकटतम अस्पताल में पीड़ित को पहुंचना घर के आसपास झाड़-झंखाड़ की सफाई आदि के प्रति जागरूक किया जाता है, मगर इस जागरूकता का कोई विशेष असर समाज में नहीं है। ऐसे में तंत्र के साथ जन सहयोग से ही इस रोग को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।
शिक्षक सूरज प्रजापति ने कहा कि जेई-एईएस पर नियंत्रण तो हुआ है, मगर यह समाप्त नहीं हो सका है। ऐसे में जरूरी है कि लोग सहयोग कर इस गंभीर बीमारी को समाप्त करने में अपनी भूमिका निभाएं। कहा कि गांवों में घर के आसपास गंदा पानी एकत्रित करते हैं जिससे बीमारी फैलने की आशंका होती है। ऐसे में इससे निजात पाने के लिए सरकार के कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा, जन जागरूकता से ही जेई-एईएस से निजात मिलेगी।
बोले, सीएमओ
सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान जेई- एईएस पर काबू पाने में बहुत हद तक सफल रहा है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार की व्यवस्था के साथ कदम से कदम मिलाकर सहयोग दें, जिससे जेई-एईएस को जड़ से समाप्त किया जा सके।
ये हैं आंकड़े
वर्ष, जेई, मौत, एईएस, मौत
2018, 27, शून्य, 113, 12
2019, 09, शून्य, 77, 07
2020, 05, 01, 65, 02
2021, 02, शून्य, 57, 00
2022, 00, 00, 04, 00
विज्ञापन
बस्ती। संचारी रोग अभियान चल रहा है। इसके बाद दस्तक को लेकर भी स्वास्थ्य महकमा सक्रिय होगा। इन दोनों अभियानों के चलते जिले में मस्तिष्क ज्वर व एक्यूट इंसेफ्लाटिस सिंड्रोम यानी एईएस काबू में है।
वर्ष- 2018 से पहले जेई के मरीज व मौत से जिला संवेदनशील श्रेणी में था। 2018 व 2019 में जेई से एक भी मौत नहीं हुई, मगर 2020 में पांच केस में से एक की मौत हो गई थी। आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो 2021 में जेई/एईएस पूरी तरह काबू में रहा। जेई के केवल दो केस आए। जबकि एईएस के 57 केस थे, मगर एक भी मौत नहीं हुई। 2022 में अब तक एईएस के चार केस आए थे, जिनका इलाज कर घर भेज दिया गया है। पूर्वांचल के लिए अभिशाप मस्तिष्क ज्वर ने न जाने कितनी मां की कोख उजाड़ दी और कितने घर बर्बाद हो गए। इससे निपटने के लिए सरकार ने तमाम प्रयत्न किए, मगर 2015 में संचारी रोग नियंत्रण अभियान के माध्यम से इस पर काबू पाने की पहल शुरू हुई। इसके बाद उत्तरोत्तर जेई-एईएस के बीमारों की संख्या कम हुई और मौत का आंकड़ा घटता गया। यानी संचारी रोग नियंत्रण अभियान के चलते इस पर अंकुश लगाया जा सका।
विज्ञापन
--
संचारी रोग नियंत्रण अभियान
इस अभियान में स्वास्थ्य के अलावा 12 अन्य विभाग भी लगाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का काम बुखार अथवा लक्षण वाले मरीजों को भर्ती कराकर उनका इलाज कराने की जिम्मेदारी है, जबकि अन्य विभागों के जिम्मे सफाई, छिड़काव, स्वच्छता जागरूकता आदि की जिम्मेदारी है। इसमें विकास व नगर निकाय के विभागों को शामिल किया गया है।
विज्ञापन
--
यह बोले एसीएमओ
एसीएमओ डॉ. फखरेयार हुसैन ने कहा कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान व दस्तक ने जेई व एईएस का बेहद कारगर ढंग से काबू में किया है। कहते हैं कि अब सरकार व उसके विभाग अपना काम कर रहे हैं, मगर आम जन का सहयोग नहीं मिल पा रहा है। सफाई, पानी एकत्रित न होने देने की सलाह, बुखार होने पर निकटतम अस्पताल में पीड़ित को पहुंचना घर के आसपास झाड़-झंखाड़ की सफाई आदि के प्रति जागरूक किया जाता है, मगर इस जागरूकता का कोई विशेष असर समाज में नहीं है। ऐसे में तंत्र के साथ जन सहयोग से ही इस रोग को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।
शिक्षक सूरज प्रजापति ने कहा कि जेई-एईएस पर नियंत्रण तो हुआ है, मगर यह समाप्त नहीं हो सका है। ऐसे में जरूरी है कि लोग सहयोग कर इस गंभीर बीमारी को समाप्त करने में अपनी भूमिका निभाएं। कहा कि गांवों में घर के आसपास गंदा पानी एकत्रित करते हैं जिससे बीमारी फैलने की आशंका होती है। ऐसे में इससे निजात पाने के लिए सरकार के कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा, जन जागरूकता से ही जेई-एईएस से निजात मिलेगी।
बोले, सीएमओ
सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान जेई- एईएस पर काबू पाने में बहुत हद तक सफल रहा है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार की व्यवस्था के साथ कदम से कदम मिलाकर सहयोग दें, जिससे जेई-एईएस को जड़ से समाप्त किया जा सके।
ये हैं आंकड़े
वर्ष, जेई, मौत, एईएस, मौत
2018, 27, शून्य, 113, 12
2019, 09, शून्य, 77, 07
2020, 05, 01, 65, 02
2021, 02, शून्य, 57, 00
2022, 00, 00, 04, 00