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मुखबिर तंत्र ध्वस्त, मुंह मोड़ लिए खबरी
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मुखबिर तंत्र ध्वस्त, मुंह मोड़ लिए खबरी
भरोसा टूटने से दूर होते गए सूचना देने वाले
सर्विलांस पर निर्भर पुलिस के निजी सूत्र समाप्त
बस्ती। भरोसे के संकट से जूझ रही पुलिस सूचनाओं के अकाल से पस्त है। खबरी, मुखबिर, सूत्र या सोर्स जैसे नामों से जाना जाने वाला पुलिस का सूचना तंत्र बेहद कमजोर हो चुका है। जान जोखिम में डालकर पुलिस की मदद करने वाले खबरी मुंह मोड़ते जा रहे हैं। इधर कुछ वर्षों से पुलिस का मुखबिरों से संपर्क टूट गया है या फिर मुखबिरों ने पुलिस से नाता तोड़ लिया। मुखबिरों की मानें तो पुलिस ने स्वयं उनका भरोसा खो दिया। अब पुलिस एलआईयू, चौकीदार, सोशल मीडिया के भरोसे है। इनकी निष्क्रियता के कारण शहर में बार-बार असहज हालात पैदा होते आए हैं, बल्कि कस्बों और गांव में कई बार तिल का ताड़ बनते देखा गया।
भाजपा से जुड़े छात्रनेता कबीर तिवारी की हत्या के बाद शहर में जब जबरदस्त तनाव व्याप्त था, उस समय भारी पुलिस बल के साथ डीएम, एसपी, सांसद आदि कोतवाली के भीतर मौजूद थे। बाहर छात्रों और समर्थकों का धैर्य टूटता गया और शहर में तोड़फोड़ शुरू हो गई। चौकी फूंक दी गई और तमाम रोडवेज बसों को तोड़फोड़ हुई। थाने की जीप को भी उपद्रवियों ने नहीं बख्शा। मगर पुलिस का सूचना तंत्र फेल रहा। परशुरामपुर थाने के बस्थानवा में वर्ष-2009 से असलहा फैक्ट्री चला रहे लोहार की पुलिस को भनक नहीं लगी। सैकड़ों युवकों के हाथ में तमंचा थमाने वाले शातिर पर पुलिस जून-2020 में हाथ डाल पाई। सूत्र बताते हैं कि पुलिस वाले भी उसके ग्राहक थे।
बीते दस वर्षों में दर्जन भर से ज्यादा मुखबिरों पर गाज गिर चुकी है। एक को एनकाउंटर में मार गिराया गया, जबकि चार-पांच साजिश के चलते जेल भेज दिए गए। इस वजह से अब कोई पुलिस पर भरोसा करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। इसकी कई बार अधिकारियों ने जांच कराई, लेकिन महकमे की किरकिरी से बचाने के लिए बात दबा दी गई।
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‘मजबूत है सूचना का तंत्र’
एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि पुलिस का सूचना तंत्र अब भी काफी मजबूत है। अपने विश्वसनीय सूत्र आपराधिक गतिविधियों में लिप्त न हो जाएं, इसकी जोखिम अब ज्यादा है। इसलिए पुलिस को फूंक-फूंक कर कदम रखना पड़ता है।
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भरोसा टूटने से दूर होते गए सूचना देने वाले
सर्विलांस पर निर्भर पुलिस के निजी सूत्र समाप्त
बस्ती। भरोसे के संकट से जूझ रही पुलिस सूचनाओं के अकाल से पस्त है। खबरी, मुखबिर, सूत्र या सोर्स जैसे नामों से जाना जाने वाला पुलिस का सूचना तंत्र बेहद कमजोर हो चुका है। जान जोखिम में डालकर पुलिस की मदद करने वाले खबरी मुंह मोड़ते जा रहे हैं। इधर कुछ वर्षों से पुलिस का मुखबिरों से संपर्क टूट गया है या फिर मुखबिरों ने पुलिस से नाता तोड़ लिया। मुखबिरों की मानें तो पुलिस ने स्वयं उनका भरोसा खो दिया। अब पुलिस एलआईयू, चौकीदार, सोशल मीडिया के भरोसे है। इनकी निष्क्रियता के कारण शहर में बार-बार असहज हालात पैदा होते आए हैं, बल्कि कस्बों और गांव में कई बार तिल का ताड़ बनते देखा गया।
भाजपा से जुड़े छात्रनेता कबीर तिवारी की हत्या के बाद शहर में जब जबरदस्त तनाव व्याप्त था, उस समय भारी पुलिस बल के साथ डीएम, एसपी, सांसद आदि कोतवाली के भीतर मौजूद थे। बाहर छात्रों और समर्थकों का धैर्य टूटता गया और शहर में तोड़फोड़ शुरू हो गई। चौकी फूंक दी गई और तमाम रोडवेज बसों को तोड़फोड़ हुई। थाने की जीप को भी उपद्रवियों ने नहीं बख्शा। मगर पुलिस का सूचना तंत्र फेल रहा। परशुरामपुर थाने के बस्थानवा में वर्ष-2009 से असलहा फैक्ट्री चला रहे लोहार की पुलिस को भनक नहीं लगी। सैकड़ों युवकों के हाथ में तमंचा थमाने वाले शातिर पर पुलिस जून-2020 में हाथ डाल पाई। सूत्र बताते हैं कि पुलिस वाले भी उसके ग्राहक थे।
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बीते दस वर्षों में दर्जन भर से ज्यादा मुखबिरों पर गाज गिर चुकी है। एक को एनकाउंटर में मार गिराया गया, जबकि चार-पांच साजिश के चलते जेल भेज दिए गए। इस वजह से अब कोई पुलिस पर भरोसा करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। इसकी कई बार अधिकारियों ने जांच कराई, लेकिन महकमे की किरकिरी से बचाने के लिए बात दबा दी गई।
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‘मजबूत है सूचना का तंत्र’
एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि पुलिस का सूचना तंत्र अब भी काफी मजबूत है। अपने विश्वसनीय सूत्र आपराधिक गतिविधियों में लिप्त न हो जाएं, इसकी जोखिम अब ज्यादा है। इसलिए पुलिस को फूंक-फूंक कर कदम रखना पड़ता है।