UP: पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ तो 15% बढ़ा माल-भाड़ा, बस्ती में आटा-दाल से फल तक सब महंगा
व्यापारियों का कहना है कि ईंधन के दाम बढ़ने से परिवहन लागत और मालभाड़ा बढ़ गया है। इसका असर बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है और आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। बताया कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण उनका मुनाफा घट रहा है।
विस्तार
पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतों का असर अब बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम में इजाफा हो रहा है, जिससे आम जनता के साथ-साथ व्यापारी वर्ग भी प्रभावित है। ट्रांसपोटरों ने 15 प्रतिशत मालभाड़ा बढ़ा दिया है, इससे कई वस्तुओं पर महंगाई की मार पड़ी है।
व्यापारियों का कहना है कि ईंधन के दाम बढ़ने से परिवहन लागत और मालभाड़ा बढ़ गया है। इसका असर बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है और आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
बताया कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण उनका मुनाफा घट रहा है। बढ़ती लागत के बीच व्यापार संचालन करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि महंगाई पर नियंत्रण पाया जा सके और व्यापारियों को राहत मिल सके।
व्यापारी राकेश ने बताया कि पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दामों ने आम आदमी के साथ-साथ व्यापारियों की भी कमर तोड़ दी है। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर किराना कारोबार पर पड़ रहा है। गौरव गुप्ता कहते हैं कि पेट्रोलियम के बढ़ते दामों का असर छोटे व्यापारियों के कारोबार पर साफ दिखाई दे रहा है।
शिवम ने बताया कि बढ़ते दामों का सबसे ज्यादा असर फल कारोबार पर पड़ रहा है, क्योंकि फल पूरी तरह ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर निर्भर होते हैं। डीजल महंगा होने से मंडियों से माल लाने का खर्च बढ़ गया है, जिससे फलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो रही है।
पहले ही किसान महंगाई और मौसम की मार झेल रहे हैं, ऐसे में ईंधन के बढ़े दाम उनकी परेशानियां और बढ़ा रहे हैं। केला, लीची व सेब व आनार पर भी असर पड़ा है। खाड़ी देशों से आने वाले ड्राई फ्रूट्स पर काफी असर दिख रहा है।