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Basti News: कुत्ता काटे तो चार और लोग लाइए... तब लगेगी वैक्सीन
Sat, 20 Apr 2024 03:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 20 Apr 2024 03:47 AM IST
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गली मे घूमते कुत्ते।
पीएचसी-सीएचसी पर एंटी रैबीज वैक्सीन मौजूद, लेकिन खामियों के चलते हो रही दिक्कत
स्वास्थ्य केंद्रों पर वॉयल तभी खुलता है जब लगवाने वालों की संख्या पांच हो
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यदि आप ग्रामीण अथवा कस्बे में रहते हैं और गली में घूमने वाले कुत्तों ने काट लिया है तो फिर वैक्सीन लगवाने के लिए जिला अस्पताल ही आना होगा। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी रैबीज वैक्सीन मौजूद है, लेकिन व्यवस्थागत खामियों के चलते लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। वजह यह है कि इन स्वास्थ्य केंद्रों पर वॉयल तभी खुलता है, जब वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या पांच हो। यह कहना है मुंडेरवा के डेल्हापार निवासी बबलू का।
उनका कहना है कि उन्हें बृहस्पतिवार को कुत्ते ने काट लिया, जब पीएचसी पर गए तो कर्मियों ने कहा कि आज वैक्सीन का डेट नहीं है। शनिवार को आइएगा, अब 48 घंटे के भीतर वैक्सीन लगवानी जरूरी थी। लिहाजा जिला अस्पताल पहुंच कर वैक्सीन लगवानी पड़ी। यह केवल उनके साथ नहीं हुआ है, बल्कि गांव के कई लोगों के साथ हो चुका है।
उनका कहना है कि किसी को कुत्ता काट ले तो वैक्सीन लगवाना आसान नहीं है। क्योंकि पीड़ित से कहा जाता है कि वैक्सीन लगवानी है तो चार ऐसे लोगों को लेकर आओ। इसी गणित के चलते ग्रामीण इलाके के लोगों को ज्यादा खर्च कर जिला अस्पताल आना पड़ रहा है।
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हालांकि, स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन लगवाने के लिए सोमवार, बुधवार और शनिवार का दिन निर्धारित है, लेकिन यह समझने वाली बात है कि 48 घंटे के भीतर ही पहली डोज अनिवार्य है। ऐसे में इंतजार पीड़ित को भारी पड़ सकती है। कत्ता काटने से पीड़ित बबलू ने कहा कि ऐसा भी नहीं है कि अगर मरीज जिला अस्पताल आ जाए तो उसे तुरंत इंजेक्शन लग जाएगी। इसकी भी एक लंबी प्रक्रिया है। सुबह आठ बजे से नंबर लगने की शुरुआत होती है। फिर डॉक्टर देखने के बाद तय करते हैं कि वैक्सीन की डोज कितनी होनी चाहिए। ऐसे में अगर 62 किमी दूर परशुरामपुर में किसी को कुत्ते ने काट लिया तो वह इस प्रक्रिया में उलझ कर रह जाएगा। उसे मजबूरन प्राइवेट वैक्सीन खरीदनी पड़ेगी, जिसकी कीमत 800 से 1000 रुपये के बीच है।
मुंडेरवा के रहने वाले शोभित कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार को कुत्ते ने काट लिया था। सीएचसी पर गया तो वहां से जिला अस्पताल भेज दिया। बताते हैं कि जिला अस्पताल आकर वैक्सीन लगवाने में समय और रुपये दोनों लगता है।
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गर्मी के मौसम में ज्यादा आक्रामक होते हैं कुत्ते
पशु चिकित्सक डॉ. विजय कुमार कहते हैं कि गर्मी के मौसम में कुत्ते ज्यादा आक्रामक होते हैं। इस वजह से वह सड़कों पर आने-जाने वालों को दौड़ाते हुए काट लेते हैं। इसके पीछे पशु चिकित्सक भोजन की कमी और तापमान में उतार-चढ़ाव मानते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, कुत्तों में चिड़-चिड़ापन और बेचैनी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। कुत्ते जीभ से तापमान का नियंत्रण करते हैं। छाया और ताजे पानी की कमी से कभी-कभी उनके अंदर कई तरह के व्यवहार परिवर्तन देखने को मिलते हैं। इसमें भौंकना, आक्रामकता आदि शामिल हैं। वह आते-जाते किसी को भी दौड़ाने लगते हैं और मौका पाते ही काट लेते हैं।
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शहर में भी कुत्तों का आतंक...बच्चे-बुजुर्ग सभी परेशान
कुत्तों का आतंक सिर्फ ग्रामीण इलाकों में ही है, बल्कि शहर में भी लोग इनसे परेशान हैं। शहर का शायद ही कोई ऐसा मोहल्ला बचा होगा जहां पर आक्रामक छुट्टा कुत्ते न हों। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग और बच्चों को हो रही है। यही वजह है जिला अस्पताल में आम दिनों में औसतन 70 से 80 लोगों को वैक्सीन लगाई जाती थी, जो अब बढ़कर औसतन 250 के करीब पहुंच गई है।
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ऐसे करें बचाव
- कुत्तों से बच्चों को दूर रखें, दौड़ाने पर रुक जाएं।
- कुत्तों के काटने के बाद 10 से 12 बार काटने वाले स्थान को साबुन से धोएं। डॉक्टर से संपर्क कर उपचार कराएं।
- घर के आसपास रहने वाले कुत्तों के पानी और भोजन की व्यवस्था करें।
- गर्मी के समय कुत्तों को परेशान न करें, न ही उन्हें मारें, इससे वह और आक्रामक हो जाते हैं।
- पालक अपने कुत्तों को रैबीज वाले टीके अवश्य लगवा लें।
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कोट
जिले के सभी सीएचसी व पीएचसी पर रैबीज वैक्सीन भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। वैक्सीन खराब न हो, इसी नाते कर्मी एक साथ पांच लोगों को वैक्सीन लगाने की बात कहते हैं। किसी को वैक्सीन नहीं लगी, इसकी कोई शिकायत अब तक नहीं मिली है। यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच करा ली जाएगी। निर्देश है कि किसी को लौटाया न जाए।
डॉ. आरएस दुबे, सीएमओ
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स्वास्थ्य केंद्रों पर वॉयल तभी खुलता है जब लगवाने वालों की संख्या पांच हो
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यदि आप ग्रामीण अथवा कस्बे में रहते हैं और गली में घूमने वाले कुत्तों ने काट लिया है तो फिर वैक्सीन लगवाने के लिए जिला अस्पताल ही आना होगा। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी रैबीज वैक्सीन मौजूद है, लेकिन व्यवस्थागत खामियों के चलते लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। वजह यह है कि इन स्वास्थ्य केंद्रों पर वॉयल तभी खुलता है, जब वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या पांच हो। यह कहना है मुंडेरवा के डेल्हापार निवासी बबलू का।
उनका कहना है कि उन्हें बृहस्पतिवार को कुत्ते ने काट लिया, जब पीएचसी पर गए तो कर्मियों ने कहा कि आज वैक्सीन का डेट नहीं है। शनिवार को आइएगा, अब 48 घंटे के भीतर वैक्सीन लगवानी जरूरी थी। लिहाजा जिला अस्पताल पहुंच कर वैक्सीन लगवानी पड़ी। यह केवल उनके साथ नहीं हुआ है, बल्कि गांव के कई लोगों के साथ हो चुका है।
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उनका कहना है कि किसी को कुत्ता काट ले तो वैक्सीन लगवाना आसान नहीं है। क्योंकि पीड़ित से कहा जाता है कि वैक्सीन लगवानी है तो चार ऐसे लोगों को लेकर आओ। इसी गणित के चलते ग्रामीण इलाके के लोगों को ज्यादा खर्च कर जिला अस्पताल आना पड़ रहा है।
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हालांकि, स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन लगवाने के लिए सोमवार, बुधवार और शनिवार का दिन निर्धारित है, लेकिन यह समझने वाली बात है कि 48 घंटे के भीतर ही पहली डोज अनिवार्य है। ऐसे में इंतजार पीड़ित को भारी पड़ सकती है। कत्ता काटने से पीड़ित बबलू ने कहा कि ऐसा भी नहीं है कि अगर मरीज जिला अस्पताल आ जाए तो उसे तुरंत इंजेक्शन लग जाएगी। इसकी भी एक लंबी प्रक्रिया है। सुबह आठ बजे से नंबर लगने की शुरुआत होती है। फिर डॉक्टर देखने के बाद तय करते हैं कि वैक्सीन की डोज कितनी होनी चाहिए। ऐसे में अगर 62 किमी दूर परशुरामपुर में किसी को कुत्ते ने काट लिया तो वह इस प्रक्रिया में उलझ कर रह जाएगा। उसे मजबूरन प्राइवेट वैक्सीन खरीदनी पड़ेगी, जिसकी कीमत 800 से 1000 रुपये के बीच है।
मुंडेरवा के रहने वाले शोभित कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार को कुत्ते ने काट लिया था। सीएचसी पर गया तो वहां से जिला अस्पताल भेज दिया। बताते हैं कि जिला अस्पताल आकर वैक्सीन लगवाने में समय और रुपये दोनों लगता है।
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गर्मी के मौसम में ज्यादा आक्रामक होते हैं कुत्ते
पशु चिकित्सक डॉ. विजय कुमार कहते हैं कि गर्मी के मौसम में कुत्ते ज्यादा आक्रामक होते हैं। इस वजह से वह सड़कों पर आने-जाने वालों को दौड़ाते हुए काट लेते हैं। इसके पीछे पशु चिकित्सक भोजन की कमी और तापमान में उतार-चढ़ाव मानते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, कुत्तों में चिड़-चिड़ापन और बेचैनी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। कुत्ते जीभ से तापमान का नियंत्रण करते हैं। छाया और ताजे पानी की कमी से कभी-कभी उनके अंदर कई तरह के व्यवहार परिवर्तन देखने को मिलते हैं। इसमें भौंकना, आक्रामकता आदि शामिल हैं। वह आते-जाते किसी को भी दौड़ाने लगते हैं और मौका पाते ही काट लेते हैं।
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शहर में भी कुत्तों का आतंक...बच्चे-बुजुर्ग सभी परेशान
कुत्तों का आतंक सिर्फ ग्रामीण इलाकों में ही है, बल्कि शहर में भी लोग इनसे परेशान हैं। शहर का शायद ही कोई ऐसा मोहल्ला बचा होगा जहां पर आक्रामक छुट्टा कुत्ते न हों। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग और बच्चों को हो रही है। यही वजह है जिला अस्पताल में आम दिनों में औसतन 70 से 80 लोगों को वैक्सीन लगाई जाती थी, जो अब बढ़कर औसतन 250 के करीब पहुंच गई है।
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ऐसे करें बचाव
- कुत्तों से बच्चों को दूर रखें, दौड़ाने पर रुक जाएं।
- कुत्तों के काटने के बाद 10 से 12 बार काटने वाले स्थान को साबुन से धोएं। डॉक्टर से संपर्क कर उपचार कराएं।
- घर के आसपास रहने वाले कुत्तों के पानी और भोजन की व्यवस्था करें।
- गर्मी के समय कुत्तों को परेशान न करें, न ही उन्हें मारें, इससे वह और आक्रामक हो जाते हैं।
- पालक अपने कुत्तों को रैबीज वाले टीके अवश्य लगवा लें।
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कोट
जिले के सभी सीएचसी व पीएचसी पर रैबीज वैक्सीन भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। वैक्सीन खराब न हो, इसी नाते कर्मी एक साथ पांच लोगों को वैक्सीन लगाने की बात कहते हैं। किसी को वैक्सीन नहीं लगी, इसकी कोई शिकायत अब तक नहीं मिली है। यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच करा ली जाएगी। निर्देश है कि किसी को लौटाया न जाए।
डॉ. आरएस दुबे, सीएमओ