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होमगार्ड ड्यूटी घोटाला: मस्टर रोल की जांच अंतिम दौर में
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होमगार्ड ड्यूटी घोटाला : 34 महीने के मास्टर रोल की जांच अंतिम दौर में
बस्ती। होमगार्ड ड्यूटी में घोटाले की जांच में 34 महीने की ड्यूटियों का सत्यापन कराया जा रहा है। शक है कि छह दिसंबर 2016 से अक्टूबर 2019 तक के बीच जिले में तैनात किए गए होमगार्ड की ड्यूटियों में गोलमाल किया गया है। शिकायत मिली थी कि जिले में कई ऐसे होमगार्ड जवान ड्यूटी करते दिखाए गए हैं जो वास्तव में कहीं दूसरे व्यवसाय/पेशे में व्यस्त रहते हैं। माना जा रहा है कि निष्पक्ष जांच की गई तो दो दर्जन से ज्यादा फर्जी मामले प्रकाश में आ जाएंगे।
नवंबर में गाजियाबाद में बड़े पैमाने पर हुए ड्यूटी घोटाले के बाद शासन ने सभी जिलों में जांच का आदेश दिया था जिसके क्रम में दिसंबर 2019 में एएसपी पंकज और एक अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को यहां की ड्यूटी की जांच सौंपी गई। दोनों अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ कर बयान लिए जा चुके हैं। जल्द इसकी रिपोर्ट उचित स्तर पर सौंप दी जाएगी।
एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि मास्टर रोल में हस्ताक्षर एवं पर्यवेक्षण अधिकारी की काउंटर साइन की जांच की जा रही है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। ड्यूटी के लिए बनाई जाने वाली मास्टर रोल कॉपी की मूल प्रति जिला कमांडेंट के यहां जमा होती है। कमांडेंट ड्यूटी आवंटन करते हैं मगर उनके पास इस बात का कोई डाटा नहीं होता कि संबंधित जवान ड्यूटी पर गया अथवा नहीं। इसी में खेल हो जाता है।
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16 कंपनी में 1460 गार्ड
जिले में कुल 16 होमगार्ड कंपनियां तैनात हैं, जिनमें एक महिला कंपनी है। औसतन 90-95 जवानों वाली कंपनियों के करीब 1460 जवानों की ड्यूटी पुलिस प्रशासन के अलावा जरूरत व डिमांड के मुताबिक विभिन्न विभागों में लगाई जाती है। जैसे 120 गार्ड जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय, 70 मंडलायुक्त कार्यालय के अलावा 35-40 गार्ड कोतवाली, इतने ही पुरानी बस्ती, 25 कारागार, 10 अग्निशमन विभाग में ड्यूटी करते हैं। जिला व महिला अस्पताल, स्टेडियम, यातायात, विद्युत विभाग, बाल कारागार आदि में भी गार्ड तैनात किए गए हैं।
भरोसे में लेकर लगाई जाती है फर्जी ड्यूटी
थाने के अथवा कार्यालय प्रभारी, ब्लॉक इंचार्ज आदि को भरोसे में लेकर फर्जी ड्यूटी साइन होती रहती है। इस व्यवस्था की कमजोर कड़ी ढूंढकर विभागीय जालसाज ड्यूटी घोटाला करते गए। दूसरा कोई रिकार्ड ही नहीं होता और न ही कहीं उपस्थिति दर्ज होती। ड्यूटी करने वाले होमगार्डों की थानों की जीडी में ड्यूटी के पहले दिन एंट्री दर्ज होती थी, उसके बाद कब तक ड्यूटी की और कहां-कहां ड्यूटी किए, इसका कोई रिकार्ड नहीं होता। मास्टर रोल पर ड्यूटी लेने वाले जिम्मेदार अधिकारी का नाम व हस्ताक्षर भी नहीं होता। जिससे आसानी से यह पता लगाना मुश्किल है कि किस जगह कितने गार्ड ड्यूटी कर रहे हैं।
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बस्ती। होमगार्ड ड्यूटी में घोटाले की जांच में 34 महीने की ड्यूटियों का सत्यापन कराया जा रहा है। शक है कि छह दिसंबर 2016 से अक्टूबर 2019 तक के बीच जिले में तैनात किए गए होमगार्ड की ड्यूटियों में गोलमाल किया गया है। शिकायत मिली थी कि जिले में कई ऐसे होमगार्ड जवान ड्यूटी करते दिखाए गए हैं जो वास्तव में कहीं दूसरे व्यवसाय/पेशे में व्यस्त रहते हैं। माना जा रहा है कि निष्पक्ष जांच की गई तो दो दर्जन से ज्यादा फर्जी मामले प्रकाश में आ जाएंगे।
नवंबर में गाजियाबाद में बड़े पैमाने पर हुए ड्यूटी घोटाले के बाद शासन ने सभी जिलों में जांच का आदेश दिया था जिसके क्रम में दिसंबर 2019 में एएसपी पंकज और एक अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को यहां की ड्यूटी की जांच सौंपी गई। दोनों अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ कर बयान लिए जा चुके हैं। जल्द इसकी रिपोर्ट उचित स्तर पर सौंप दी जाएगी।
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एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि मास्टर रोल में हस्ताक्षर एवं पर्यवेक्षण अधिकारी की काउंटर साइन की जांच की जा रही है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। ड्यूटी के लिए बनाई जाने वाली मास्टर रोल कॉपी की मूल प्रति जिला कमांडेंट के यहां जमा होती है। कमांडेंट ड्यूटी आवंटन करते हैं मगर उनके पास इस बात का कोई डाटा नहीं होता कि संबंधित जवान ड्यूटी पर गया अथवा नहीं। इसी में खेल हो जाता है।
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16 कंपनी में 1460 गार्ड
जिले में कुल 16 होमगार्ड कंपनियां तैनात हैं, जिनमें एक महिला कंपनी है। औसतन 90-95 जवानों वाली कंपनियों के करीब 1460 जवानों की ड्यूटी पुलिस प्रशासन के अलावा जरूरत व डिमांड के मुताबिक विभिन्न विभागों में लगाई जाती है। जैसे 120 गार्ड जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय, 70 मंडलायुक्त कार्यालय के अलावा 35-40 गार्ड कोतवाली, इतने ही पुरानी बस्ती, 25 कारागार, 10 अग्निशमन विभाग में ड्यूटी करते हैं। जिला व महिला अस्पताल, स्टेडियम, यातायात, विद्युत विभाग, बाल कारागार आदि में भी गार्ड तैनात किए गए हैं।
भरोसे में लेकर लगाई जाती है फर्जी ड्यूटी
थाने के अथवा कार्यालय प्रभारी, ब्लॉक इंचार्ज आदि को भरोसे में लेकर फर्जी ड्यूटी साइन होती रहती है। इस व्यवस्था की कमजोर कड़ी ढूंढकर विभागीय जालसाज ड्यूटी घोटाला करते गए। दूसरा कोई रिकार्ड ही नहीं होता और न ही कहीं उपस्थिति दर्ज होती। ड्यूटी करने वाले होमगार्डों की थानों की जीडी में ड्यूटी के पहले दिन एंट्री दर्ज होती थी, उसके बाद कब तक ड्यूटी की और कहां-कहां ड्यूटी किए, इसका कोई रिकार्ड नहीं होता। मास्टर रोल पर ड्यूटी लेने वाले जिम्मेदार अधिकारी का नाम व हस्ताक्षर भी नहीं होता। जिससे आसानी से यह पता लगाना मुश्किल है कि किस जगह कितने गार्ड ड्यूटी कर रहे हैं।