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Basti News: गाड़ियां खड़ी होते ही हाईवे थमा, पुलिस से झड़प, चालकों पर लाठीचार्ज
Tue, 02 Jan 2024 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 02 Jan 2024 12:31 AM IST
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बस्ती। केंद्रीय सड़क सुरक्षा कानून के खिलाफ नए साल के पहले दिन सोमवार को देशव्यापी आंदोलन शुरू हुआ। इसका असर सुबह सात बजे के बाद से प्रमुख हाईवे पर दिखने लगा। 11 बजते- बजते गोरखपुर- अयोध्या और लुंबिनी- दुद्धी हाईवे थम गया। ट्रक, बस समेत अन्य वाहनों की लंबी लाइन लग गई। चालक सड़क पर उतर आए। नए कानून के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करने लगे। ठिठुरन भरी ठंड में जाम खुलवाने के लिए पुलिस को पसीने छूट गए। इस दौरान पुलिस व चालकों के बीच कई जगह झड़प हुई। वहीं पुलिस ने कुछ स्थानों पर चालकों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया।
ट्रांसपोर्ट एजेंसी, निजी ट्रैवल एजेंसी से जुड़े चालक, सरकारी बस चालक, टैक्सी, ऑटो चालक सभी लामबंद होकर नए कानून के विरोध में सुबह ही सड़कों पर उतर गए। बीच हाईवे पर वाहनों को खड़ी कर अन्य वाहनों को भी रोकना शुरू कर दिया। देखते ही देखते फोरलेन पर विक्रमजोत से लेकर कांटे तक गाड़ियों की लंबी लाइन लग गई। बस्ती में मड़वानगर टोल प्लाजा से खझौला पुलिस चौकी तक दोनों लेन में छोटे बड़े वाहनों की लंबी कतार लगी रही। वहीं लुंबिनी- दुद्धी मार्ग पर भी वाहनों के पहिये ठहर गए थे। रुधौली, मनौरी के पास लंबा जाम लगा रहा। दोनों हाईवे पर यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सरकारी एवं निजी बस सेवा ठप होने के कारण लोग बैग, झोला व अन्य सामान लेकर पैदल चलते नजर आए। गंतव्य पर पहुंचने के लिए कुछ चोरी छिपे ऑटो, कार वाहनों का सहारा लिए। मुंह मांगा किराया देने को तैयार होने के बाद सवारी ढोने वाले वाहन नहीं मिल रहे थे।
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पॉलिटेक्निक चौराहे पर लाठी चार्ज
पुरानी बस्ती के पाॅलिटेक्निक चौराहे पर चालक आंदोलन कर रहे थे। कुछ चालकों की टोलियां बाइक पर सवार होकर बाहर से आने वाले ट्रक की चाबी छीन रहे थे। इस बीच छोटे वाहन, एंबुलेंस को रोक दिया जा रहा था। पुरानी बस्ती पुलिस काफी देर तक चालकों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन मामला बिगड़न लगा। तो पुलिस ने लाठियां भाजी। इसके बाद प्रदर्शनकारी तितर- बितर हुए। इसी तरह कप्तानगंज, हर्रैया और रुधौली कस्बे में आंदोलनकारी चालकों से पुलिस की तीखी झड़प होती देखी गई।
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शहर में भी होता रहा हंगामा
शहर में ऑटो एवं टैक्सी चालकों ने जगह- जगह हंगामा कांटा। रोडवेज, रेलवे स्टेशन, बड़ेवन, कचहरी, कंपनीबाग चौराहे पर ऑटो, टैक्सी खड़ी कर दी गई थी। यहां चालकों ने अन्य वाहनों के संचलन का विरोध किया। पुलिस को जगह-जगह इनके विरोध का सामना करना पड़ा। चालक सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे।
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मुसीबत में मुसाफिर
बड़ेवन और रोडवेज पर वाहनों के इंतजार में मुसाफिर वाहनों की तलाश में घूमते रहे। इंद्रावती ने बताया कि एयरपोर्ट से चलने वाली एक कार से लखनऊ से बस्ती पहुंची। यहां से भानपुर जाना है मगर सवारी नहीं मिल रही है। घर पर फोन किए है कोई आएगा तभी पहुंच पाएंगे। दिल्ली से आए मनोज कुमार, आनंद, पिंटू ने बताया कि मानिकचंद जाना है कि लेकिन ऑटो, बस कुछ भी नहीं मिल रहा है। इसी तरह रोडवेज पर भी यात्रियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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फंसी रही आठ एंबुलेंस
हाईवे एवं विभिन्न मार्गों पर मरीजों को लेकर जा रही 8 एंबुलेंस फंस गई। आंदोलनकारियों ने एंबुलेंस को निकालने में कोई मदद नहीं की। बाद में यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस उच्चाधिकारियों को लोकेशन के साथ दी। इसके बाद पुलिस हरकत में आई। तब जाकर एंबुलेंस को जाम से निकाला जा सका।
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डिपो परिसर में खड़ी रह गई बस
रोडवेज के चालक भी आंदोलन के समर्थन में उतर आए। इससे सभी गाड़ियां बेड़े में ही खड़ी रह गई। यात्रियों का आना जाना लगा रहा। लेकिन कोई सेवा बहाल न होने की जानकारी देकर उन्हें लौटा दिया गया। बांसी, डुमरियागंज, रुधौली, गोरखपुर जगहों पर जाने के लिए लोगों को भटकना पड़ा। रोडवेज की आमदनी पूरे दिन ठप रही। डिपो के एआरएम आयुष भटनागर के अनुसार आंदोलन के चलते लगभग तीन लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
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बोले चालक- कानून वापस लें सरकार
सड़क पर उतरे चालकों ने कहा कि सरकार ने हिट एंड रन कानून लाकर चालकों के हित पर कुठाराघात किया है। हम लोगों का कम वेतन होता है। मजदूरी करके पेट भरते हैं और परिवार चलाते हैं। सरकार ऐसा कानून थोप दिया कि दुर्घटना होने के बाद हमारा परिवार बर्बाद हो जाएगा। नए कानून में दुर्घटना होने पर चालक को दस साल की सजा और जुर्माना भुगतना होगा। यह एक तरफा कानून हमें कतई स्वीकार नहीं है।
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ट्रांसपोर्ट एजेंसी, निजी ट्रैवल एजेंसी से जुड़े चालक, सरकारी बस चालक, टैक्सी, ऑटो चालक सभी लामबंद होकर नए कानून के विरोध में सुबह ही सड़कों पर उतर गए। बीच हाईवे पर वाहनों को खड़ी कर अन्य वाहनों को भी रोकना शुरू कर दिया। देखते ही देखते फोरलेन पर विक्रमजोत से लेकर कांटे तक गाड़ियों की लंबी लाइन लग गई। बस्ती में मड़वानगर टोल प्लाजा से खझौला पुलिस चौकी तक दोनों लेन में छोटे बड़े वाहनों की लंबी कतार लगी रही। वहीं लुंबिनी- दुद्धी मार्ग पर भी वाहनों के पहिये ठहर गए थे। रुधौली, मनौरी के पास लंबा जाम लगा रहा। दोनों हाईवे पर यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सरकारी एवं निजी बस सेवा ठप होने के कारण लोग बैग, झोला व अन्य सामान लेकर पैदल चलते नजर आए। गंतव्य पर पहुंचने के लिए कुछ चोरी छिपे ऑटो, कार वाहनों का सहारा लिए। मुंह मांगा किराया देने को तैयार होने के बाद सवारी ढोने वाले वाहन नहीं मिल रहे थे।
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पॉलिटेक्निक चौराहे पर लाठी चार्ज
पुरानी बस्ती के पाॅलिटेक्निक चौराहे पर चालक आंदोलन कर रहे थे। कुछ चालकों की टोलियां बाइक पर सवार होकर बाहर से आने वाले ट्रक की चाबी छीन रहे थे। इस बीच छोटे वाहन, एंबुलेंस को रोक दिया जा रहा था। पुरानी बस्ती पुलिस काफी देर तक चालकों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन मामला बिगड़न लगा। तो पुलिस ने लाठियां भाजी। इसके बाद प्रदर्शनकारी तितर- बितर हुए। इसी तरह कप्तानगंज, हर्रैया और रुधौली कस्बे में आंदोलनकारी चालकों से पुलिस की तीखी झड़प होती देखी गई।
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शहर में भी होता रहा हंगामा
शहर में ऑटो एवं टैक्सी चालकों ने जगह- जगह हंगामा कांटा। रोडवेज, रेलवे स्टेशन, बड़ेवन, कचहरी, कंपनीबाग चौराहे पर ऑटो, टैक्सी खड़ी कर दी गई थी। यहां चालकों ने अन्य वाहनों के संचलन का विरोध किया। पुलिस को जगह-जगह इनके विरोध का सामना करना पड़ा। चालक सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे।
मुसीबत में मुसाफिर
बड़ेवन और रोडवेज पर वाहनों के इंतजार में मुसाफिर वाहनों की तलाश में घूमते रहे। इंद्रावती ने बताया कि एयरपोर्ट से चलने वाली एक कार से लखनऊ से बस्ती पहुंची। यहां से भानपुर जाना है मगर सवारी नहीं मिल रही है। घर पर फोन किए है कोई आएगा तभी पहुंच पाएंगे। दिल्ली से आए मनोज कुमार, आनंद, पिंटू ने बताया कि मानिकचंद जाना है कि लेकिन ऑटो, बस कुछ भी नहीं मिल रहा है। इसी तरह रोडवेज पर भी यात्रियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
फंसी रही आठ एंबुलेंस
हाईवे एवं विभिन्न मार्गों पर मरीजों को लेकर जा रही 8 एंबुलेंस फंस गई। आंदोलनकारियों ने एंबुलेंस को निकालने में कोई मदद नहीं की। बाद में यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस उच्चाधिकारियों को लोकेशन के साथ दी। इसके बाद पुलिस हरकत में आई। तब जाकर एंबुलेंस को जाम से निकाला जा सका।
डिपो परिसर में खड़ी रह गई बस
रोडवेज के चालक भी आंदोलन के समर्थन में उतर आए। इससे सभी गाड़ियां बेड़े में ही खड़ी रह गई। यात्रियों का आना जाना लगा रहा। लेकिन कोई सेवा बहाल न होने की जानकारी देकर उन्हें लौटा दिया गया। बांसी, डुमरियागंज, रुधौली, गोरखपुर जगहों पर जाने के लिए लोगों को भटकना पड़ा। रोडवेज की आमदनी पूरे दिन ठप रही। डिपो के एआरएम आयुष भटनागर के अनुसार आंदोलन के चलते लगभग तीन लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
बोले चालक- कानून वापस लें सरकार
सड़क पर उतरे चालकों ने कहा कि सरकार ने हिट एंड रन कानून लाकर चालकों के हित पर कुठाराघात किया है। हम लोगों का कम वेतन होता है। मजदूरी करके पेट भरते हैं और परिवार चलाते हैं। सरकार ऐसा कानून थोप दिया कि दुर्घटना होने के बाद हमारा परिवार बर्बाद हो जाएगा। नए कानून में दुर्घटना होने पर चालक को दस साल की सजा और जुर्माना भुगतना होगा। यह एक तरफा कानून हमें कतई स्वीकार नहीं है।