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Basti News: दिल के मरीजों के साथ धोखा, प्रसूताओं की जान से भी खिलवाड़ कर रहे मरीज माफिया
Wed, 19 Mar 2025 12:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 19 Mar 2025 12:02 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में दिल के मरीजों के इलाज की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। यदि कोई कहे कि हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति होने पर अमुक निजी अस्पताल में उपचार की व्यवस्था है तो यह दिल के रोगियों के साथ धोखा है।
मरीज माफिया इस तरह के झूठे प्रचार करवा रहे हैं। कुछ अस्पतालों के बाहर ह्दय रोग के इलाज से संबंधित बोर्ड भी लगा दिए गए हैं। यही नहीं, मरीज माफिया रक्तस्राव, खून की कमी, हाई ब्लडप्रेशर की वजह से गंभीर होने वाली प्रसूताओं के जान के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं।
बिना उच्च स्तरीय व्यवस्था के उनका ऑपरेशन तक कर दिया जा रहा है। इससे जच्चा-बच्चा के मौत की तमाम घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी विभाग ही सृजित नहीं है। जिला अस्पताल में 20 साल से कार्डियोलाॅजिस्ट का पद रिक्त है। ऐसे में गंभीर स्थिति में ह्दय रोगियों कोे गोरखपुर या लखनऊ ही ले जाना पड़ता है। कुछ मरीज माफिया इस नब्ज को टटोल कर नया पैंतरा चल रहे हैं। पूंजी के बल पर शीशा जड़ित बहुमंजिला इमारत में अस्पताल खोलकर ह्दय रोगियों के इलाज का दावा किया जा रहा है।
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जबकि जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज से भी बदतर स्थिति यहां है। निजी अस्पताल की तरफ से ह्दय रोगियों के लिए सिर्फ पैरामेडिकल स्टॉफ और वेंटिलेटर की ही सुविधा मुहैया हो पा रही है।
इस विषय के विशेषज्ञ चिकित्सक यहां भी नहीं है। हार्ट अटैक के मरीजों का इलाज पैरामेडिकल स्टॉफ या सामान्य डिग्री वाले चिकित्सक करते हैं। अवधेश कुमार ने बताया कि उनके साथ काम करने वाले एक कर्मचारी को पिछले दिनाें हार्ट अटैक आया। पहले शहर में संचालित ह्दय रोगियों के एक मशहूर अस्पताल में ले गए। पैरामेडिकल स्टॉफ स्टेचर पर मरीज को इमरजेंसी में ले गया। कुछ स्टॉफ पर्चा बनवाने और रुपये जमा कराने में जुट गए। आधे घंटे बीत गए विशेषज्ञ चिकित्सक कोई नहीं पहुंचा।
पैरामेडिकल स्टॉफ ही सुई-दवाई करने लगे। चिकित्सक के बारे में पूछने पर वहां मौजूद स्टॉफ सही जवाब नहीं दे पा रहे थे। कुछ देर बाद मरीज की स्थिति और खराब हुई तो रेफर कर दिया गया। करीब एक घंटे तक इस नाटकीय खेल में 8650 रुपये बिल वसूल लिया गया।
मरीज को लेकर शहर से बाहर स्थित एक निजी अस्पताल में ले गए तो वहां भी इसी तरह का खेल देखने को मिला। तसल्ली के लिए एक पैरामेडिकल स्टॉफ वीडियो कॉलिंग कर किसी से दवा पूछता नजर आया। पूछने पर डॉक्टर के बारे में नहीं बताया गया। तीन हजार का कोई इंजेक्शन देकर लखनऊ ले जाने के लिए कह दिया गया।
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बस्ती। जिले में दिल के मरीजों के इलाज की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। यदि कोई कहे कि हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति होने पर अमुक निजी अस्पताल में उपचार की व्यवस्था है तो यह दिल के रोगियों के साथ धोखा है।
मरीज माफिया इस तरह के झूठे प्रचार करवा रहे हैं। कुछ अस्पतालों के बाहर ह्दय रोग के इलाज से संबंधित बोर्ड भी लगा दिए गए हैं। यही नहीं, मरीज माफिया रक्तस्राव, खून की कमी, हाई ब्लडप्रेशर की वजह से गंभीर होने वाली प्रसूताओं के जान के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं।
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बिना उच्च स्तरीय व्यवस्था के उनका ऑपरेशन तक कर दिया जा रहा है। इससे जच्चा-बच्चा के मौत की तमाम घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी विभाग ही सृजित नहीं है। जिला अस्पताल में 20 साल से कार्डियोलाॅजिस्ट का पद रिक्त है। ऐसे में गंभीर स्थिति में ह्दय रोगियों कोे गोरखपुर या लखनऊ ही ले जाना पड़ता है। कुछ मरीज माफिया इस नब्ज को टटोल कर नया पैंतरा चल रहे हैं। पूंजी के बल पर शीशा जड़ित बहुमंजिला इमारत में अस्पताल खोलकर ह्दय रोगियों के इलाज का दावा किया जा रहा है।
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जबकि जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज से भी बदतर स्थिति यहां है। निजी अस्पताल की तरफ से ह्दय रोगियों के लिए सिर्फ पैरामेडिकल स्टॉफ और वेंटिलेटर की ही सुविधा मुहैया हो पा रही है।
इस विषय के विशेषज्ञ चिकित्सक यहां भी नहीं है। हार्ट अटैक के मरीजों का इलाज पैरामेडिकल स्टॉफ या सामान्य डिग्री वाले चिकित्सक करते हैं। अवधेश कुमार ने बताया कि उनके साथ काम करने वाले एक कर्मचारी को पिछले दिनाें हार्ट अटैक आया। पहले शहर में संचालित ह्दय रोगियों के एक मशहूर अस्पताल में ले गए। पैरामेडिकल स्टॉफ स्टेचर पर मरीज को इमरजेंसी में ले गया। कुछ स्टॉफ पर्चा बनवाने और रुपये जमा कराने में जुट गए। आधे घंटे बीत गए विशेषज्ञ चिकित्सक कोई नहीं पहुंचा।
पैरामेडिकल स्टॉफ ही सुई-दवाई करने लगे। चिकित्सक के बारे में पूछने पर वहां मौजूद स्टॉफ सही जवाब नहीं दे पा रहे थे। कुछ देर बाद मरीज की स्थिति और खराब हुई तो रेफर कर दिया गया। करीब एक घंटे तक इस नाटकीय खेल में 8650 रुपये बिल वसूल लिया गया।
मरीज को लेकर शहर से बाहर स्थित एक निजी अस्पताल में ले गए तो वहां भी इसी तरह का खेल देखने को मिला। तसल्ली के लिए एक पैरामेडिकल स्टॉफ वीडियो कॉलिंग कर किसी से दवा पूछता नजर आया। पूछने पर डॉक्टर के बारे में नहीं बताया गया। तीन हजार का कोई इंजेक्शन देकर लखनऊ ले जाने के लिए कह दिया गया।
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