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Basti News: जिले में 80 किमी हाईवे, दो ट्राॅमा सेंटर, फिर भी रेफर ही विकल्प
Wed, 02 Aug 2023 11:26 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 02 Aug 2023 11:26 PM IST
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हाईवे पर दुर्घटना होने पर एनएचआई एंबुलेंस के सहारे घायलों को पहुंचाती है अस्पताल।
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बस्ती। जिले के कांटे से लेकर अयोध्या सीमा तक 80 किमी हाईवे की यात्रा की यातायात सुरक्षा भगवान के भरोसे है। यह केवल बताया नहीं जा रहा, बल्कि वास्तविकता भी यही है। क्योंकि यहां सीएचसी तो केवल प्राथमिक उपचार तक सिमटी है, मगर जिला मुख्यालय पर स्थापित दो ट्राॅमा सेंटर भी केवल नाम के ही हैं।
यहां मरीज को भर्ती कराकर रेफर कर दिया जाता है। ऐसा नहीं कि स्वास्थ्य विभाग जबरन रेफर करता है। मरीज की जान बचाने के लिए उसके पास आवश्यक संसाधनों की कमी है। ऐसे में ट्राॅमा सेेंटर केवल कागजों में है। धरातल पर इसमें कोई व्यवस्था नहीं है।
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यह हैं मानक
एनएचआई यातायात सुरक्षा में सरकार की ओर से तय इंडियन रोड कांग्रेस का मानक मानती है। इसके अनुसार अपनी तैयारी भी होती है। सड़क सुरक्षा में शामिल संसाधनों की उपलब्धता के अलावा दुर्घटना काे लेकर भी एनएचआई संवेदनशील है। मानक के अनुसार तो हाईवे पर दो से तीन किमी के भीतर ट्राॅमा सेंटर की स्थापना होनी चाहिए, मगर अभी यह संभव नहीं हो पाया है। ऐसे में जिला मुख्यालयों के ट्राॅमा सेंटर को ही मुख्य मानकर एनएचआई पर होने वाली दुर्घटनाओं में तत्काल प्रभाव से राहत देने के लिए दो एंबुलेंस व दो भ्रमण वाहन लगाए गए हैं। जो 24 घंटे हाईवे पर यहां से वहां घूमते हैं। दुर्घटना की दशा में तत्काल टीम सक्रिय होेकर दुर्घटना स्थल पर राहत पहुंचाती है।
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-ज्ञानेंद्र कुमार, आरई, एनएचआई
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जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में है ट्राॅमा सेंटर
जिला मुख्यालय पर दो ट्राॅमा सेंटर संचालित होते हैं, मगर दोनों की स्थिति ठीक नहीं है। यहां आवश्यक सुविधाएं तो हैं नहीं, चिकित्सक व पैरा मेडिकल भी जरूरत के मुताबिक नहीं हैं। ऐसे में ट्राॅमा सेंटर महज कागजी है।
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यह होनी चाहिए ट्राॅमा सेंटर में सुविधा
ट्राॅमा सेंटर में सबसे पहली जरूरत चिकित्सक की होती है। यहां कम से कम दो जनरल सर्जन के अलावा दो आर्थोपैडिक, निश्चेतक, वेंटीलेटर, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन के अलावा कम से कम 8 पैरा मेडिकल्स की जरूरत है
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यह है स्थिति
जिला चिकित्सालय के ट्राॅमा सेंटर की सुविधाओं पर एसआईसी डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि यहां ट्राॅमा सेंटर में मानक के अनुसार कोई सुविधा नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सकों की जरूरत है, जो नहीं है। इसके अलावा निश्चेतक कम से कम दो होने चाहिए, वह भी यहां नहीं है। यहां 24 घंटे का सेटअप जरूरी होता है। इसमें सभी सुविधाएं एक स्थान पर होनी चाहिए जो यहां है ही नहीं।
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बोले प्राचार्य
ट्राॅमा सेंटर नए भवन में शुरू कराया गया है, मगर अभी पूरी तरह यह शुरू नहीं हो पाया है। क्योंकि आवश्यक संसाधनों की जरूरत है, जो अब तक उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। इसके अलावा पैरा मेडिकल स्टाफ व चिकित्सकों की भी इसके लिए जरूरत होती है, जो अभी हैं नहीं। ऐसे में ट्राॅमा सेंटर संचालित तो कर दिया गया है, मगर अभी पूर्ण रूप से कार्य नहीं कर रहा है।
-डॉ. मनोज कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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यहां मरीज को भर्ती कराकर रेफर कर दिया जाता है। ऐसा नहीं कि स्वास्थ्य विभाग जबरन रेफर करता है। मरीज की जान बचाने के लिए उसके पास आवश्यक संसाधनों की कमी है। ऐसे में ट्राॅमा सेेंटर केवल कागजों में है। धरातल पर इसमें कोई व्यवस्था नहीं है।
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यह हैं मानक
एनएचआई यातायात सुरक्षा में सरकार की ओर से तय इंडियन रोड कांग्रेस का मानक मानती है। इसके अनुसार अपनी तैयारी भी होती है। सड़क सुरक्षा में शामिल संसाधनों की उपलब्धता के अलावा दुर्घटना काे लेकर भी एनएचआई संवेदनशील है। मानक के अनुसार तो हाईवे पर दो से तीन किमी के भीतर ट्राॅमा सेंटर की स्थापना होनी चाहिए, मगर अभी यह संभव नहीं हो पाया है। ऐसे में जिला मुख्यालयों के ट्राॅमा सेंटर को ही मुख्य मानकर एनएचआई पर होने वाली दुर्घटनाओं में तत्काल प्रभाव से राहत देने के लिए दो एंबुलेंस व दो भ्रमण वाहन लगाए गए हैं। जो 24 घंटे हाईवे पर यहां से वहां घूमते हैं। दुर्घटना की दशा में तत्काल टीम सक्रिय होेकर दुर्घटना स्थल पर राहत पहुंचाती है।
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-ज्ञानेंद्र कुमार, आरई, एनएचआई
जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में है ट्राॅमा सेंटर
जिला मुख्यालय पर दो ट्राॅमा सेंटर संचालित होते हैं, मगर दोनों की स्थिति ठीक नहीं है। यहां आवश्यक सुविधाएं तो हैं नहीं, चिकित्सक व पैरा मेडिकल भी जरूरत के मुताबिक नहीं हैं। ऐसे में ट्राॅमा सेंटर महज कागजी है।
यह होनी चाहिए ट्राॅमा सेंटर में सुविधा
ट्राॅमा सेंटर में सबसे पहली जरूरत चिकित्सक की होती है। यहां कम से कम दो जनरल सर्जन के अलावा दो आर्थोपैडिक, निश्चेतक, वेंटीलेटर, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन के अलावा कम से कम 8 पैरा मेडिकल्स की जरूरत है
यह है स्थिति
जिला चिकित्सालय के ट्राॅमा सेंटर की सुविधाओं पर एसआईसी डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि यहां ट्राॅमा सेंटर में मानक के अनुसार कोई सुविधा नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सकों की जरूरत है, जो नहीं है। इसके अलावा निश्चेतक कम से कम दो होने चाहिए, वह भी यहां नहीं है। यहां 24 घंटे का सेटअप जरूरी होता है। इसमें सभी सुविधाएं एक स्थान पर होनी चाहिए जो यहां है ही नहीं।
बोले प्राचार्य
ट्राॅमा सेंटर नए भवन में शुरू कराया गया है, मगर अभी पूरी तरह यह शुरू नहीं हो पाया है। क्योंकि आवश्यक संसाधनों की जरूरत है, जो अब तक उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। इसके अलावा पैरा मेडिकल स्टाफ व चिकित्सकों की भी इसके लिए जरूरत होती है, जो अभी हैं नहीं। ऐसे में ट्राॅमा सेंटर संचालित तो कर दिया गया है, मगर अभी पूर्ण रूप से कार्य नहीं कर रहा है।
-डॉ. मनोज कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज