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ऑनलाइन शॉपिंग करना पड़ा महंगा: मंगाया था लैपटॉप, डिब्बा खोला तो निकले पत्थर के टुकड़े

Wed, 18 Oct 2023 12:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Wed, 18 Oct 2023 12:43 PM IST
सार

ठग सबसे पहले किसी नामी शॉपिंग कंपनी की डमी वेबसाइट तैयार करते हैं। फिर ब्रैंडेड सामान को 50 प्रतिश्त तक के छूट में बेचने का विज्ञापन सोशल मीडिया पर डालते हैं। वहां से लोग सस्ते के चक्कर में वेबसाइट पर जाते हैं, क्योंकि वेबसाइट नामी कंपनी का है, इसलिए लोग इतना शक नहीं करते।

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Had ordered a laptop, opened the box
ऑनलाइन शॉपिंग

विस्तार

बस्ती जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक नामी ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म पर बोनांजा ऑफर के चक्कर में फंसकर व्यवसायी खुद 78 हजार रुपये गंवा बैठा। उसने बेटे के लिए लैपटॉप मंगाया था।

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सोमवार को डिलीवरी हुई तो डिब्बा खोलने पर उसमें पत्थर के टुकड़े निकले। सोमवार को ही अमर उजाला के अंक में त्योहारी ऑफर की आड़ में धोखाधड़ी को लेकर जागरूक करने की खबर प्रकाशित की गई। उसी दिन शाम को एक मामला सामने आ गया।
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नगर थाना क्षेत्र के महरीपुर निवासी मनोज कुमार सिंह की ट्रैक्टर एजेंसी है। उनका कहना है कि बेटे के लैपटॉप के लिए एक प्रतिष्ठित प्लेटफार्म पर ऑर्डर किया था जिसमें एक लाख तीन हजार रुपये का लैपटॉप 76 हजार रुपये में देने का वादा किया गया था।
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सोमवार को उसकी डिलीवरी आई। अपनी एजेंसी में लगे सीसीटीवी कैमरों के पास पार्सल का पैकेट खोला गया तो सभी हैरान रह गए। अंदर थर्माकोल के अंदर लैपटॉप की जगह सफेद पत्थर के टुकड़े मिले। मनोज सिंह ने बताया कि उनके पास पूरा साक्ष्य है। वह धोखाधड़ी करने वाली कंपनी पर केस करेंगे।

15 अक्तूबर के अंक में अमर उजाला ने इस तरह की ठगी से सावधान करने की खबर छापी थी,ताकि लोग त्योहार के दौरान ठगी के शिकार न हों। असल में नवरात्र शुरू होने के साथ ही ऑनलाइन प्लेटफार्म पर लुभावने ऑफर की भरमार शुरू हो जाती है। साइबर ठग खरीदारी पर भारी छूट का झांसा देकर लोगों को फंसाते हैं। भारी डिस्काउंट देखकर लोग लिंक खोलते हैं और ठगी के शिकार हो जाते हैं। पिछले सीजन में ऐसे तमाम लोग ठगी के शिकार हो चुके हैं।

साइबर थाने के इंस्पेक्टर विकास यादव ने बताया कि मौजूदा समय में साइबर ठग बेहद सक्रिय हैं। त्योहार के मौके पर इनकी गतिविधियां और बढ़ जाती हैं। यह विभिन्न कंपनियों व शोरूम से ग्राहकों का डाटा लेकर लोगों को कॉल व मेसेज के जरिये ऑफर के बहाने ठग सकते हैं। लोगों को चाहिए कि वह इस तरह के ऑफर के बहकावे में न आएं।

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फोन पर कोई जानकारी साझा न करें, लिंक क्लिक करने से भी बचें। जिस वेबसाइट्स पर सबसे अधिक विश्वास हो और धोखाधड़ी का शिकार होने की संभावना कम हो, आनलाइन खरीददारी मामले में जिन कंपनियों का बड़ा नाम हो। उसी साइट्स से आनलाइन खरीददारी करें। लुभावने आफर और अज्ञात साइट्स से खरीददारी न करें।

हमें डोमेन नेम (एक नामकरण है, जो इंटरनेट पर किसी भी वेबसाइट या ब्लॉग की पहचान करता है) पर विशेष ध्यान देना चाहिए। डोमेन नेम पेज के अंत में होता है। डाट काम के बजाय यह डाट इन, डाट नेट या डाट ओआरजी हो सकता है। ऐसी साइट्स पर अच्छे ऑफर मिल सकते हैं, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आपको सही सामान मिलेगा।

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केस एक
गांधीनगर निवासी राहुल टंडन ने सोशल मीडिया के जरिये ऑनलाइन ब्लूट्रूथ बुक कराया था। उन्होंने 1600 रुपये का भुगतान कर दिया था। उनका पैकेट आया। उसमें दूसरा ब्लूट्रूथ निकला, जो महज 350 रुपये का था। इसे वापस कराने के लिए उन्होंने शिकायत की तो कस्टमर केयर से बताया गया कि इसे वापस कर लिया जाएगा। बाद में कोई नहीं पहुंचा, जिससे उनकी रकम डूब गई। उनकी शिकायत पर साइबर सेल ने जांच की।

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केस दो
मंगल बाजार की रहने वाली साधना ने 5500 रुपये की आर्टिफिशियल ज्वेलरी मंगाई। उन्होंने फेसबुक पर एक विज्ञापन देखा था। कंपनी की ओर से जब कुरियर आया तो उन्होंने सामान चेक किया। शालीमार मार्केट में गईं तो पता लगा कि वह सामान 300 रुपये का है। उन्होंने उसे वापस करने का प्रयास किया तो कंपनी ने कोई मदद नहीं की। उनकी शिकायत पर जब जांच हुई तो पता लगा कि फर्जी वेबसाइट के जरिये सामान बेचा जा रहा था।

इस तरह करते हैं ठगी

जानकार बताते हैं कि ठग सबसे पहले किसी नामी शॉपिंग कंपनी की डमी वेबसाइट तैयार करते हैं। फिर ब्रैंडेड सामान को 50 प्रतिश्त तक के छूट में बेचने का विज्ञापन सोशल मीडिया पर डालते हैं। वहां से लोग सस्ते के चक्कर में वेबसाइट पर जाते हैं, क्योंकि वेबसाइट नामी कंपनी का है, इसलिए लोग इतना शक नहीं करते। इसके बाद पेमेंट के दौरान ऐरर करके, गलत सामान भेजकर और रिफंड के नाम पर ठगी करते हैं।

इसके अलावा फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक शॉपिंग पेज बनाते हैं। इसके बाद उस पेज पर अलग-अलग सामान का विज्ञापन देते हैं, जिसे बहुत कम दाम में बेचने का दावा किया जाता है। उस पोस्ट पर दिए नंबर पर या लिंक पर क्लिक करते है तो आप जालसाजों के जाल में फंसने लगते हैं।

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इन बातों का रखें ध्यान

  • किसी भी शॉपिंग वेबसाइट पर सबसे पहले एड्रेस बार में जाकर उसकी स्पेलिंग जरूर देखें।
  • एड्रेस बार के अलावा वेबसाइट पर मौजूद अन्य कंटेंट की स्पेलिंग भी जरूर देखें।
  • हमेशा पेमेंट मोड़ कैश ऑन डिलीवरी रखें।
  • कभी भी नामी शॉपिंग कंपनी से अलग किसी अनजान वेबसाइट पर जाकर शॉपिंग न करें।
  • कंपनी कहां की है, किस पते पर रजिस्टर्ड है, यह जरूर चेक करें।
  • कंपनी सही में रजिस्टर्ड है या नहीं, उसका जीएसटी और कंपनी रजिस्ट्रेशन नंबर क्या है, यह भी चेक करें।
  • सोशल मीडिया पर बने इस तरह के किसी भी पेज पर जाकर खरीदारी के लिए लिंक पर क्लिक न करें।
  • जिस प्रॉडक्ट को डिस्काउंट में देने का दावा किया जा रहा है, उसके बारे में भी पता करें।
  • पेज पर जो विज्ञापन पोस्ट किए गए हैं, उन पर किए गए कमेंट को जरूर पढ़ें।

 
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