{"_id":"64613004141c5ef92c02a044","slug":"government-canteen-of-bus-stand-is-closed-for-two-decades-basti-news-c-7-1-167802-2023-05-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: दो दशक से बंद है बस अड्डे की सरकारी कैंटीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: दो दशक से बंद है बस अड्डे की सरकारी कैंटीन
Mon, 15 May 2023 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 15 May 2023 12:31 AM IST
विज्ञापन
बस्ती। बस्ती बस अड्डा परिसर में दो दशक पहले संचालित कैंटीन (भोजन प्रतिष्ठान) अभी तक नहीं संचालित हो सकी है। इससे यात्रियों के साथ ही रोडवेज कर्मियों को भी हलकान होना पड़ता है। रोडवेज प्रशासन इस बड़ी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है, इससे यहां पहुंचने वाले यात्रियों व अन्य लोगों को भूख मिटाने के लिए महंगे होटलों में अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
बस अड्डे पर दशकों से संचालित भोजन-नाश्ता व चाय-पानी की कैंटीन पर उस समय ग्रहण लग गया, जब वर्ष 2000-2001 में इन कैंटीनों को चलाने के लिए परिवहन निगम मुख्यालय ने अचानक भाड़े की कीमत कई गुना बढ़ा दिया। नतीजा हुआ कि दोनों कैंटीनों में ताले लग गए। इसके लिए हर साल नीलामी का इंतजाम रोडवेज प्रशासन ने किया लेकिन मंहगे किराए के कारण नतीजा शून्य रहा। 2016 में किसी तरह से चायपानी की कैंटीन की बोली तो लग गई और वह संचालित भी हो गई लेकिन भोजन व नाश्ते की कैंटीन वैसे ही बंद पड़ी रही। इससे यात्रियों के साथ ही कर्मचारियों को भी आसपास के होटलों में जाकर मंहगे दामों पर भोजन व नाश्ता करने की मजबूरी हो गई है।
-- -
मुख्यालय को लिखा जाएगा पत्र
डिपो के एआरएम आयुष भटनागर ने बताया कि कैंटीन संचालित करने के लिए भवन के किराए का निर्धारण निगम मुख्यालय से होता है। किराया कम करने व कैंटीन संचालित करने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। जैसा निर्देश होगा, उसी अनुसार आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
बस अड्डे पर दशकों से संचालित भोजन-नाश्ता व चाय-पानी की कैंटीन पर उस समय ग्रहण लग गया, जब वर्ष 2000-2001 में इन कैंटीनों को चलाने के लिए परिवहन निगम मुख्यालय ने अचानक भाड़े की कीमत कई गुना बढ़ा दिया। नतीजा हुआ कि दोनों कैंटीनों में ताले लग गए। इसके लिए हर साल नीलामी का इंतजाम रोडवेज प्रशासन ने किया लेकिन मंहगे किराए के कारण नतीजा शून्य रहा। 2016 में किसी तरह से चायपानी की कैंटीन की बोली तो लग गई और वह संचालित भी हो गई लेकिन भोजन व नाश्ते की कैंटीन वैसे ही बंद पड़ी रही। इससे यात्रियों के साथ ही कर्मचारियों को भी आसपास के होटलों में जाकर मंहगे दामों पर भोजन व नाश्ता करने की मजबूरी हो गई है।
विज्ञापन
मुख्यालय को लिखा जाएगा पत्र
डिपो के एआरएम आयुष भटनागर ने बताया कि कैंटीन संचालित करने के लिए भवन के किराए का निर्धारण निगम मुख्यालय से होता है। किराया कम करने व कैंटीन संचालित करने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। जैसा निर्देश होगा, उसी अनुसार आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विज्ञापन