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Basti News: चले जाइए बीडीए... पता करिए, कहीं आपकी जमीन ग्रीन जोन में तो नही

Sat, 12 Aug 2023 01:07 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 12 Aug 2023 01:07 AM IST
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Go BDA... find out whether your land is in the green zone
51.12 से बढ़कर 150.76 वर्ग किलोमीटर हुआ बीडीए का दायरा, ग्रीन जोन भी बढ़ा, काश्तकारों को नहीं पता बीडीए के मानचित्र में उनकी भूमि निर्माण योग्य है या नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) एक तरफ नए स्वरूप के सुव्यवस्थित शहर बसाने में कारगर मानी जा रही है तो दूसरी ओर काश्तकारों के सामने एक अलग मुसीबत भी खड़ी कर रही है। कहां किसकी जमीन किस प्रकृति में चिह्नित हो गई है कुछ मालूम नहीं है। यदि बीडीए के दायरे में आपकी जमीन है तो यह जरूर पता करें कि कहीं वह ग्रीन जोन में तो चिह्नित नहीं है। यदि ऐसा होगा तो यह जान लीजिए कि आप भविष्य में अपने जमीन पर बीडीए एक्ट के तहत निर्माण नहीं कर सकते हैं।
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हां यह सच है। केंद्र सरकार के जीआईएस प्लेटफाॅर्म पर सेटेलाइट इमेजनरी के आधार पर विस्तारित शहर का मानचित्र तैयार हुआ है। इसी आधार पर बीडीए का दायरा 51.12 से बढ़कर 150.76 वर्ग किलोमीटर हो गया है। नगर पालिका समेत कुल 217 गांवों में बीडीए एक्ट प्रभावी है। महायोजना 2031 के लिए इस बढ़े हुए क्षेत्रफल का मास्टर प्लान भी तैयार कर लिया गया है। कुछ दिनों की और देरी है, नए मास्टर प्लान को शासन से स्वीकृति मिल जाएगी। इसके बाद नए मास्टर प्लान के मानचित्र के अनुसार ही संबंधित क्षेत्र में निर्माण हो सकेगा। इसमें लैंडयूज (भू-उपयोग) की जमीनें चिह्नित की गई है। जमीनों के उपयोग का अलग-अलग निर्धारण है। कहीं आवासीय क्षेत्र बसेगा, तो कहीं पार्क, पिकनिक स्पॉट के लिए स्थान रिक्त छोड़े गए हैं। काॅमर्शियल निर्माण के लिए भी भूमि का निर्धारण हुआ है। सेटेलाइट से तैयार हुए इस मानचित्र में कई काश्तकारों की जमीनें निर्माण से मुक्त रखी गई है। जिसे ग्रीन जोन कहा गया है। इसमें 1096.54 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। यहां किसी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता है। अलबत्ता काश्तकार अपनी जमीन का उपयोग कृषि आदि कार्यों में कर सकते हैं। अहम बात यह कि ग्रीन जोन में चिह्नित जमीनों के बारे में काश्तकारों को भी नहीं मालूम है। इसका पता उन्हें तब चलेगा जब वह भविष्य निर्माण कराने के लिए बीडीए के पास नक्शा स्वीकृ़ति कराने पहुंचेंगे। यहां संबंधित भूमि का गाटा संख्या के आधार पर बीडीए मानचित्र से मिलान होगा। यदि जमीन ग्रीन जोन में पाई गई तो मकान, दुकान या शोरूम का नक्शा नहीं पास होगा।
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तहसील या पंजीयन कार्यालय में भी ब्योरा नहीं
बीडीए जिन जमीनों को ग्रीन जोन में चिह्नित किए हुए है उसका विवरण तहसील या पंजीयन विभाग के पास भी नहीं है। जिससे इन जमीनों की खरीद-फरोख्त भी हो रही है। तहसील में खारिज दाखिल भी आसानी से हो रहा है। मगर जब निर्माण की बारी आ रही है तो बीडीए एक्ट के तहत ग्रीन जोन का बड़ा पेच फंस जा रहा है। काश्तकार हो या उनसे जमीन का खरीदने वाले ग्राहक दोनों को निर्माण के समय यह निराशाजनक परिणाम देखने को मिल रहा है।
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क्या हैं ग्रीन जोन
राजस्व अभिलेख में दर्ज तालाब, जलाशय, बंजर भूमि, बाग-बगीचे, खलिहान आदि सार्वजनकि उपयोग की जमीनों को बीडीए में ग्रीन जोन घोषित किया जाता है। इसके अतिरिक्त एएमआरयूटी (अमरुत) योजना के तहत सेटेलाइट से होने वाले सर्वे के दौरान आवासीय क्षेत्र में पार्क आदि के उद्देश्य से खुले स्थान के रूप में चिह्नित जमीन भी ग्रीन जोन में आती है। यह किसी भी काश्तकार की हो सकती है। इसमें निर्माण प्रतिबंधित रहेगा। बीडीए के मानचित्र में ग्रीन जोन, भू-उपयोग की जमीनों का बाकायदे अंकन है।
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मुआवजा का भी प्रावधान नहीं
काश्तकार की जमीन ग्रीन जोन में चिह्नित होने के बाद बीडीए के पास मुआवजे का भी प्रावधान नहीं है। ऐसी जमीन पर मालिकाना हक काश्तकार का ही रहेगा, लेकिन उसमें निर्माण नहीं किया जाएगा। फिलहाल इन जमीनों को बेचने और खरीदने पर पाबंदी नहीं है। इससे काश्तकारों को नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। आसपास विकसित क्षेत्र होने के बाद भी वह अपनी खुद की जमीन में निर्माण कर कोई लाभ नहीं उठा सकते हैं।
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ग्रीन बेल्ट की जमीनाें पर भी निर्माण प्रतिबंधित
बीडीए के मानचित्र में ग्रीन बेल्ट चिह्नित है। इसमें भी किसी तरह का निर्माण प्रतिबंधित है। बीडीए के दायरे में हाईवे के दोनों तरफ 87.5 मीटर दूरी तक की जमीनें ग्रीन बेल्ट में चिह्नित है। इसी तरह बीडीए रेंज में कुआनो नदी के दोनों किनारों की 80 मीटर तक की जमीनें ग्रीन बेल्ट में चिह्नित है। यहां निर्माण नहीं किया जा सकता है। सिर्फ मालिकाना हक काश्तकारों के पास होगा।
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हाईवे के किनारे मेरी जमीन स्थित है। कामर्शियल निर्माण के लिए काम शुरू करवाया। कुछ दिन के बाद बीडीए ने निर्माण रोक दिया। हम नक्शा पास कराने के लिए पहुंचे। ऑवेदन तैयार कराया बाद में पता चला कि उनकी जमीन ग्रीन लैंड में है। नक्शा नहीं पास होगा। बाउंड्रीवाल कराकर काम रोकना पड़ा।
दिनेश चौरसिया, रुधौली
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हम अपने पैतृक जनीन में मकान बनाने की तैयारी किए। दो भाई मिलकर कुछ रुपये जुटाए। होम लोन के लिए नक्शे का आवेदन करने का प्रयास शुरू किए। दो दिन बाद नक्शा तैयार करने के लिए अधिकृत आर्किटैक्ट ने बताया कि उनकी जमीन ग्रीन जोन में है। नक्शा नहीं पास होगा।
राम निरंजन, भूअर


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बीडीए की नियमावली अलग ढंग की है। उन्हें नियोजित शहर बसाना है। इसलिए आवासीय क्षेत्र, गैर आवासीय क्षेत्र और सड़क आदि का निर्धारण जरूरी है। मगर इसमें कहीं-कहीं काश्तकारों का बड़ा नुकसान है। उनकी जमीन ग्रीन जोन में है और उन्हें मालूम ही नहीं है। एक तरह से उनकी जमीन उनके लिए उपयोगी नहीं है। उससे भी बड़ा नुकसान उसका है जो न जानकारी में ग्रीन जोन की जमीन खरीद ले रहा है। इसके लिए यह जरूरी किया जाए कि ग्रीन बेल्ट या ग्रीन जोन की जमीनों का विवरण राजस्व अभिलेख में दर्ज हो और पंजीयन विभाग में भी होना चाहिए। इससे मुआयने के समय ही जमीन की नवैयत पता चल जाएगी।

दिवाकर त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता
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ग्रीन जोन और ग्रीन बेल्ट का निर्धारण भारत सरकार की सर्वे एजेंसी करती है। हमें जो मानचित्र उपलब्ध कराया जाता है उसी कार्य आगे बढ़ाया जाता है। फिलहाल निर्माण के लिए प्रतिबंधित जमीनों के मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है।
संदीप कुमार, एक्सईएन, बस्ती
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