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पहचान बचाने के लिए आगे आए एलुमनी: शिवहर्ष किसान PG कॉलेज के कायाकल्प की कवायद, पूर्व छात्रों ने की DM से भेंट
Sat, 18 Apr 2026 11:08 AM IST
Rohit Singh
अमर उजाला ब्यूरो, बस्ती
अमर उजाला ब्यूरो, बस्ती
Published by: Rohit Singh
Updated Sat, 18 Apr 2026 11:08 AM IST
सार
प्रतिनिधिमंडल ने डीएम से भेंट की और कहा कि एसकेपीजी कॉलेज केवल एक भवन नहीं, बल्कि बस्ती मंडल का वह शैक्षणिक केंद्र है जिसने हजारों वैज्ञानिक, राजनीतिज्ञ और अधिकारी देश को दिए हैं। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा वर्तमान में कॉलेज में विज्ञान और कला संकाय की उच्च स्तरीय शिक्षा के लिए जरूरी संसाधनों का भारी अभाव है।
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एसकेपीजी कॉलेज
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
शिक्षा जगत के स्तंभ माने जाने वाले शिवहर्ष किसान पीजी कॉलेज के पुराने दिन लौटाने की कवायद तेज हो गई है। कॉलेज की बदहाल होती व्यवस्थाओं और संसाधनों की कमी को लेकर पूर्व छात्रों का एक शक्तिशाली प्रतिनिधिमंडल (एलुमनी एसोसिएशन) सक्रिय हो गया है।
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कॉलेज की प्राधिकृत नियंत्रक व जिलाधिकारी बस्ती, कृतिका ज्योत्सना से मुलाकात कर पूर्व छात्रों ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो जनपद का यह गौरवशाली संस्थान अपनी पहचान खो देगा।
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इस महत्वपूर्ण बैठक का नेतृत्व दिलीप पांडेय (सदस्य कार्यकारिणी, पूर्व महामंत्री, जिला उपाध्यक्ष बीजेपी) ने किया। उनके साथ छात्र राजनीति और सामाजिक क्षेत्र के कई प्रमुख चेहरे शामिल रहे।
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भूपेंद्र सिंह राणा सदस्य कार्यकारिणी पूर्व अध्यक्ष छात्र संघ एवं प्रदेश मंत्री एबीवीपी, डाक्टर रत्नेश श्रीवास्तव सदस्य कार्यकारिणी, रवि शंकर शुक्ला, संयुक्त मंत्री पूर्व महामंत्री छात्र संघ, आलोक पांडेय सदस्य कार्यकारिणी, पूर्व अध्यक्ष छात्र संघ, नगर अध्यक्ष बीजेपी प्रतिनिधि मंडल में शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के समक्ष कॉलेज की वर्तमान स्थिति का एक 'इनपुट' पेश किया, जिसमें शैक्षणिक गिरावट और बुनियादी ढांचे की जर्जर स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के समक्ष कॉलेज की वर्तमान स्थिति का एक 'इनपुट' पेश किया, जिसमें शैक्षणिक गिरावट और बुनियादी ढांचे की जर्जर स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि एसकेपीजी कॉलेज केवल एक भवन नहीं, बल्कि बस्ती मंडल का वह शैक्षणिक केंद्र है जिसने हजारों वैज्ञानिक, राजनीतिज्ञ और अधिकारी देश को दिए हैं। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा वर्तमान में कॉलेज में विज्ञान और कला संकाय की उच्च स्तरीय शिक्षा के लिए जरूरी संसाधनों का भारी अभाव है।
प्रयोगशालाओं से लेकर लाइब्रेरी तक को आधुनिक बनाने की आवश्यकता है। कई व्यवस्थाएं पूरी तरह पटरी से उतर चुकी हैं, जिससे वर्तमान छात्रों का भविष्य अधर में है।
प्रयोगशालाओं से लेकर लाइब्रेरी तक को आधुनिक बनाने की आवश्यकता है। कई व्यवस्थाएं पूरी तरह पटरी से उतर चुकी हैं, जिससे वर्तमान छात्रों का भविष्य अधर में है।
पूर्व छात्रों ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि यह प्रयास केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं है। इस गंभीर विषय को लेकर पूर्व छात्रों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात कर चुका है। उन्हें भी कॉलेज की ऐतिहासिक महत्ता और वर्तमान समस्याओं से अवगत कराया गया था, जिसके बाद अब स्थानीय प्रशासन से त्वरित कार्यवाही की अपेक्षा की जा रही है।
पूर्व छात्रों ने एक सुर में कहा कि कॉलेज से उनका आज भी गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। एसोसिएशन ने जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्ताव रखा कि वे न केवल कमियां बताने आए हैं, बल्कि कॉलेज को हर संभव सहयोग देने के लिए भी तत्पर हैं। पूर्व छात्र अपने स्तर पर भी कॉलेज के विकास में योगदान देने की योजना बना रहे हैं।
पूर्व छात्रों ने एक सुर में कहा कि कॉलेज से उनका आज भी गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। एसोसिएशन ने जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्ताव रखा कि वे न केवल कमियां बताने आए हैं, बल्कि कॉलेज को हर संभव सहयोग देने के लिए भी तत्पर हैं। पूर्व छात्र अपने स्तर पर भी कॉलेज के विकास में योगदान देने की योजना बना रहे हैं।
जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्सना ने माना कि कॉलेज की व्यवस्थाओं में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। प्राधिकृत नियंत्रक होने के नाते उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि कॉलेज की समस्याओं का बिंदुवार निरीक्षण कराया जाएगा। पठन-पाठन और विकास कार्यों में आ रही बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा। शासन स्तर पर लंबित फाइलों को गति प्रदान की जाएगी।
पूर्व छात्रों की इस सक्रियता ने बस्ती के शिक्षा प्रेमियों में एक नई उम्मीद जगाई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस शिक्षा के मंदिर को उसका पुराना वैभव लौटाने के लिए कितनी जल्दी कदम उठाता है।
पूर्व छात्रों की इस सक्रियता ने बस्ती के शिक्षा प्रेमियों में एक नई उम्मीद जगाई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस शिक्षा के मंदिर को उसका पुराना वैभव लौटाने के लिए कितनी जल्दी कदम उठाता है।