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Basti News: जीएसटी नंबर के पेच में अटकी खाद
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दुबौलिया। ब्लाॅक क्षेत्र के न्याय पंचायत बैरागल स्थित साधन सहकारी समिति बैरागल को जीएसटी नंबर आवंटित नहीं होने से खाद का उठान और वितरण नहीं हो पा रहा, जबकि इसी परिसर में न्याय पंचायत पारा की भी समिति है।
इन दोनों समितियों के दर्जनों गांव के किसान खाद के लिए भटक रहे हैं। इस समिति के अधीन बेदपुर, बैरागल, मिश्रौलिया, गौरा, तिवारीपुर, मझियार, शुकुलपुरा, गुलौरी, मरवटिया, सहित दर्जनों गांव के किसानों को खाद के लिए भटकना मजबूरी है। किसान रामचंद्र, प्रमोद, कपींद्र, गोपाल, राजेंद्र आदि कहते कि गेहूं व सरसों की बुवाई के लिए डीएपी के इंतजार में बुवाई पिछड़ रही है। बैरागल समिति के सचिव संजीव सिंह का कहना है की व्यापार कर विभाग समिति के नाम से खतौनी मांग रहा है जो की उपलब्ध नहीं है। बैरागल समिति जिस भूमि पर संचालित है उसका बैनामा 1977, में बेदपुर निवासी एक व्यक्ति से कराया गया था लेकिन तत्कालीन सचिव की लापरवाही से खारिज दाखिल नही हुई वहीं उसी व्यक्ति ने उसी जमीन को फिर से दूसरे के नाम बैनामा कर दी ऐसे में मामला न्यायालय में विचाराधीन है जिससे खतौनी के चलते जीएसटी नंबर नहीं मिल पा रहा है। जबकि जिले की तमाम समितियों से व्यापार कर विभाग खतौनी नहीं ले रहा है। संवाद
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इन दोनों समितियों के दर्जनों गांव के किसान खाद के लिए भटक रहे हैं। इस समिति के अधीन बेदपुर, बैरागल, मिश्रौलिया, गौरा, तिवारीपुर, मझियार, शुकुलपुरा, गुलौरी, मरवटिया, सहित दर्जनों गांव के किसानों को खाद के लिए भटकना मजबूरी है। किसान रामचंद्र, प्रमोद, कपींद्र, गोपाल, राजेंद्र आदि कहते कि गेहूं व सरसों की बुवाई के लिए डीएपी के इंतजार में बुवाई पिछड़ रही है। बैरागल समिति के सचिव संजीव सिंह का कहना है की व्यापार कर विभाग समिति के नाम से खतौनी मांग रहा है जो की उपलब्ध नहीं है। बैरागल समिति जिस भूमि पर संचालित है उसका बैनामा 1977, में बेदपुर निवासी एक व्यक्ति से कराया गया था लेकिन तत्कालीन सचिव की लापरवाही से खारिज दाखिल नही हुई वहीं उसी व्यक्ति ने उसी जमीन को फिर से दूसरे के नाम बैनामा कर दी ऐसे में मामला न्यायालय में विचाराधीन है जिससे खतौनी के चलते जीएसटी नंबर नहीं मिल पा रहा है। जबकि जिले की तमाम समितियों से व्यापार कर विभाग खतौनी नहीं ले रहा है। संवाद
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