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बेटी को जलाकर मारने के दोषी पिता, चाचा को उम्रकैद
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बेटी को जलाकर मारने के दोषी पिता, चाचा को उम्रकैद
बस्ती। बेटी को जलाकर मार डालने के मामले के दोषी पिता व चाचा को जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ ईसी एक्ट की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश शिवचंद ने दोषियों पर बीस-बीस हजार का अर्थदंड भी लगाया। इसे अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
जिला अपर फौजदारी अधिवक्ता राघवेश प्रसाद पांडेय ने अदालत को बताया कि खराहरा शुक्ल निवासी अभियुक्त वाजिद अली की पत्नी सकरुन्नीशा ने वाल्टगंज थाने में तहरीर देकर बताया कि घटना 18 मई 2017 की है। उनकी बेटी बेबी मोबाइल से बात कर रही थी, जिससे चाचा अहमद व पिता वाजिद अली खफा हो गए थे। दोनों ने बेबी पर केरोसिन छिड़ककर जला दिया था। गंभीर रूप से झुलसी बेबी को सल्टौआ सरकारी अस्पताल ले जाया गया गया।
उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टर ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। जिला अस्पताल से बेबी को मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया गया था। वहां इलाज के दौरान उसने अपना बयान मजिस्ट्रेट को दर्ज कराया था। उसी दिन उसकी मृत्यु हो गई। विवेचक ने जून 2017 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। छह गवाहों, बेबी का मृत्यु के पूर्व दिया गया बयान व पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर न्यायाधीश ने दोषी पिता व चाचा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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बस्ती। बेटी को जलाकर मार डालने के मामले के दोषी पिता व चाचा को जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ ईसी एक्ट की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश शिवचंद ने दोषियों पर बीस-बीस हजार का अर्थदंड भी लगाया। इसे अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
जिला अपर फौजदारी अधिवक्ता राघवेश प्रसाद पांडेय ने अदालत को बताया कि खराहरा शुक्ल निवासी अभियुक्त वाजिद अली की पत्नी सकरुन्नीशा ने वाल्टगंज थाने में तहरीर देकर बताया कि घटना 18 मई 2017 की है। उनकी बेटी बेबी मोबाइल से बात कर रही थी, जिससे चाचा अहमद व पिता वाजिद अली खफा हो गए थे। दोनों ने बेबी पर केरोसिन छिड़ककर जला दिया था। गंभीर रूप से झुलसी बेबी को सल्टौआ सरकारी अस्पताल ले जाया गया गया।
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उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टर ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। जिला अस्पताल से बेबी को मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया गया था। वहां इलाज के दौरान उसने अपना बयान मजिस्ट्रेट को दर्ज कराया था। उसी दिन उसकी मृत्यु हो गई। विवेचक ने जून 2017 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। छह गवाहों, बेबी का मृत्यु के पूर्व दिया गया बयान व पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर न्यायाधीश ने दोषी पिता व चाचा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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