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मौसम: सूखे की आहट से सन्न हुए किसान, घटाए धान का रकबा
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सूखे की आहट से जिले में घटा धान का रकबा
बस्ती। मानसून के गच्चा देने से जनपद के किसान निराश हैं। लगातार बारिश न होने से उन्हें सूखे का डर सताने लगा है। ऐसे में ज्यादातर किसानों ने धान की खेती का रकबा घटा लिया है। जिसे 10 बीघे खेत में रोपाई करनी थी, वे इस विपरीत हालात में सात आठ बीघा ही धान की खेती करने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं। हालांकि मौसम के जानकारों ने शनिवार को अच्छी बारिश का संकेत दिया है।
जनपद में इस वर्ष एक लाख 20 हजार हेक्टेयर रकबा में धान की खेती की जानी है। जिसकी तुलना में अभी अनुमानत: 10 प्रतिशत ही रोपाई हो पाई है। कृषि विभाग के मुताबिक धान की रोपाई का यही सबसे मध्य का समय चल रहा है। बहादुरपुर ब्लॉक के किसान इंद्रजीत सिंह का कहना है कि अभी से सूखे जैसी स्थिति बन गई है। धान का रकबा बढ़ाना इस बार संभव नहीं दिखता। सदर ब्लॉक के अशोक का कहना है कि करीब 15 बीघे धान की खेती करते थे लेकिन इस बार 10 बीघे में ही रोपाई करवाएंगे।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि शनिवार को बस्ती समेत पूर्वांचल के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है।
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मई जैसा बीता जुलाई का पहला हफ्ता
शुक्रवार को अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। जबकि वातावरण में 70 फीसदी आर्द्रता बरकरार है। इससे पहले बृहस्पतिवार को भी कमोबेस इतना तापमान ही रहा। मानसून के इस रुख से जहां एक ओर मौसम विज्ञानी हैरान हैं वहीं किसानों में भारी निराशा है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि कमजोर पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खड़ी से नमी लेकर आ रही हवाओं के दिशा भटकने के कारण बारिश में कमी आ रही है।
आंकड़ों की बात करें तो बस्ती मंडल के तीनों जिले में इस बार पिछले वर्ष की तुलना में 49 फीसदी कम बारिश हुई। पिछले वर्ष 2021 जून के अंतिम सप्ताह में 70 मिलीमीटर, 2020 में 85 मिलीमीटर बारिश हो चुकी थी। 2021 की जुलाई के शुरुआती चार दिनों में 50 मिलीलीटर से अधिक बारिश हुई थी। खेत-तालाब लबालब भर गए थे। इससे धान की रोपाई में काफी सुविधा हुई थी। इस बार जुलाई में अभी सिर्फ 32 मिलीलीटर बारिश ही हुई। इसीलिए जुलाई के पहले सप्ताह में चिलचिलाती धूप खिल रही है और बेहाल करने वाली गर्मी कम होने का नाम नहीं ले रही है।
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बस्ती। मानसून के गच्चा देने से जनपद के किसान निराश हैं। लगातार बारिश न होने से उन्हें सूखे का डर सताने लगा है। ऐसे में ज्यादातर किसानों ने धान की खेती का रकबा घटा लिया है। जिसे 10 बीघे खेत में रोपाई करनी थी, वे इस विपरीत हालात में सात आठ बीघा ही धान की खेती करने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं। हालांकि मौसम के जानकारों ने शनिवार को अच्छी बारिश का संकेत दिया है।
जनपद में इस वर्ष एक लाख 20 हजार हेक्टेयर रकबा में धान की खेती की जानी है। जिसकी तुलना में अभी अनुमानत: 10 प्रतिशत ही रोपाई हो पाई है। कृषि विभाग के मुताबिक धान की रोपाई का यही सबसे मध्य का समय चल रहा है। बहादुरपुर ब्लॉक के किसान इंद्रजीत सिंह का कहना है कि अभी से सूखे जैसी स्थिति बन गई है। धान का रकबा बढ़ाना इस बार संभव नहीं दिखता। सदर ब्लॉक के अशोक का कहना है कि करीब 15 बीघे धान की खेती करते थे लेकिन इस बार 10 बीघे में ही रोपाई करवाएंगे।
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आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि शनिवार को बस्ती समेत पूर्वांचल के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है।
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मई जैसा बीता जुलाई का पहला हफ्ता
शुक्रवार को अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। जबकि वातावरण में 70 फीसदी आर्द्रता बरकरार है। इससे पहले बृहस्पतिवार को भी कमोबेस इतना तापमान ही रहा। मानसून के इस रुख से जहां एक ओर मौसम विज्ञानी हैरान हैं वहीं किसानों में भारी निराशा है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि कमजोर पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खड़ी से नमी लेकर आ रही हवाओं के दिशा भटकने के कारण बारिश में कमी आ रही है।
आंकड़ों की बात करें तो बस्ती मंडल के तीनों जिले में इस बार पिछले वर्ष की तुलना में 49 फीसदी कम बारिश हुई। पिछले वर्ष 2021 जून के अंतिम सप्ताह में 70 मिलीमीटर, 2020 में 85 मिलीमीटर बारिश हो चुकी थी। 2021 की जुलाई के शुरुआती चार दिनों में 50 मिलीलीटर से अधिक बारिश हुई थी। खेत-तालाब लबालब भर गए थे। इससे धान की रोपाई में काफी सुविधा हुई थी। इस बार जुलाई में अभी सिर्फ 32 मिलीलीटर बारिश ही हुई। इसीलिए जुलाई के पहले सप्ताह में चिलचिलाती धूप खिल रही है और बेहाल करने वाली गर्मी कम होने का नाम नहीं ले रही है।
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