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लाभ न होने से गन्ने की खेती छोड़ रहे किसान
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लाभ न होने से गन्ने की खेती छोड़ रहे किसान
बस्ती। गन्ने की खेती करने वाले किसान मुनाफा कम होने से चिंतित हैं। वह अब गन्ने की खेती से मुंह मोड़ने लगे हैं। किसानों का तर्क है कि लागत बढ़ रही है, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं बढ़ा रहा है। ऐसे में फायदे के बजाय नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऊपर से जंगली जानवरों व छुट्टा मवेशियों से फसल को बचाना भी मुश्किल होता जा रहा है।
मुंडेरवा चीनी मिल क्षेत्र के गन्ना किसान दीनानाथ त्रिपाठी बताते हैं कि लागत बढ़ने और श्रमिक न मिलने के कारण अब गन्ने की खेती से मन ऊब चुका है। इसलिए रकबा कम कर दिया। किसान रामकृपाल चौधरी ने बताया कि समय से पर्ची और गन्ना मूल्य का भुगतान न होने के कारण गन्ने की खेती नहीं करना चाहते। बभनान क्षेत्र के गन्ना किसान सतीश सिंह बताते हैं कि जंगली जानवरों का आतंक बढ़ गया है। फसल सुरक्षित रखने के लिए रतजगा करनी पड़ती है। ऊपर से लागत के अनुसार रेट भी नहीं मिल रहा है। किसान विनोद सिंह बताते हैं किसानों की आय का मुख्य स्त्रोत गन्ना रहा है, लेकिन अब यह घाटे का सौदा बन गया है। बताते हैं कि समय से पर्ची नहीं मिल रही है। 30 गाड़ी का कोटा है, लेकिन अब तक 19 पर्ची ही मिल पाई है। 17 जनवरी के बाद एक भी पर्ची नहीं मिली।
भारतीय किसान यूनियन के मंडल उपाध्यक्ष दीवान चंद्र पटेल बताते हैं कि सरकार वर्ष 2017-18 सीजन में 10 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाया गया था। तब से प्रदेश में गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ाया गया। वर्ष 2017-18 से लागत में 30 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हो चुका है। डीजल का भाव आसमान छू रहा है। ऐसे में फायदा कम और लागत बढ़ रही है। जिला गन्ना अधिकारी रंजीत कुमार निराला बताते हैं कि पिछले बुआई सत्र में मौसम ने साथ नहीं दिया था, जिससे रकबे में कुछ कमी आई है। फिलहाल इस बार पर्याप्त मात्रा में गन्ने की बुआई कराई जा रही है। किसानों को उन्नतशील प्रजाति के गन्ने के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ब्लॉक स्तर पर गोष्ठियां आयोजित कर किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
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मुंडेरवा गन्ना समिति का घटा रकबा
मुंडेरवा गन्ना समिति क्षेत्र का रकबा घट रहा है। पेराई सत्र 2019-2020 के गन्ना सर्वे के अनुसार 15425.54 हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती की गई थी, जो 2020-2021 में सिमटकर 12803.28 हेक्टेयर हो गई। समिति क्षेत्र के रकबे में करीब 2612.26 हेक्टेयर की कमी आई। मुंडेरवा चीनी मिल ने अपने पहले पेराई सत्र में 44.18 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई किया था जो इस बार सिमटकर 34 लाख क्विंटल हो गया।
अप्रैल तक चलेगी बभनान मिल
बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की बभनान इकाई ने 22 नंवबर से पेराई सत्र शुरू किया। मिल प्रबंधन ने मौजूदा सत्र में 1.5 करोड़ क्विंटल गन्ने की पेराई का रखा था। अब तक करीब 8081000 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हो चुकी है। मिल प्रशासनिक व श्रम अधिकारी केपी सिंह ने बताया कि सात समितियों के 70 से अधिक क्रय केंद्र से गन्ने की खरीद की जा रही है। क्षेत्र में अब भी काफी गन्ना पड़ा है। लक्ष्य पूर्ति के लिए पांच अप्रैल तक मिल चलाई जा सकती है।
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बस्ती। गन्ने की खेती करने वाले किसान मुनाफा कम होने से चिंतित हैं। वह अब गन्ने की खेती से मुंह मोड़ने लगे हैं। किसानों का तर्क है कि लागत बढ़ रही है, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं बढ़ा रहा है। ऐसे में फायदे के बजाय नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऊपर से जंगली जानवरों व छुट्टा मवेशियों से फसल को बचाना भी मुश्किल होता जा रहा है।
मुंडेरवा चीनी मिल क्षेत्र के गन्ना किसान दीनानाथ त्रिपाठी बताते हैं कि लागत बढ़ने और श्रमिक न मिलने के कारण अब गन्ने की खेती से मन ऊब चुका है। इसलिए रकबा कम कर दिया। किसान रामकृपाल चौधरी ने बताया कि समय से पर्ची और गन्ना मूल्य का भुगतान न होने के कारण गन्ने की खेती नहीं करना चाहते। बभनान क्षेत्र के गन्ना किसान सतीश सिंह बताते हैं कि जंगली जानवरों का आतंक बढ़ गया है। फसल सुरक्षित रखने के लिए रतजगा करनी पड़ती है। ऊपर से लागत के अनुसार रेट भी नहीं मिल रहा है। किसान विनोद सिंह बताते हैं किसानों की आय का मुख्य स्त्रोत गन्ना रहा है, लेकिन अब यह घाटे का सौदा बन गया है। बताते हैं कि समय से पर्ची नहीं मिल रही है। 30 गाड़ी का कोटा है, लेकिन अब तक 19 पर्ची ही मिल पाई है। 17 जनवरी के बाद एक भी पर्ची नहीं मिली।
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भारतीय किसान यूनियन के मंडल उपाध्यक्ष दीवान चंद्र पटेल बताते हैं कि सरकार वर्ष 2017-18 सीजन में 10 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाया गया था। तब से प्रदेश में गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ाया गया। वर्ष 2017-18 से लागत में 30 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हो चुका है। डीजल का भाव आसमान छू रहा है। ऐसे में फायदा कम और लागत बढ़ रही है। जिला गन्ना अधिकारी रंजीत कुमार निराला बताते हैं कि पिछले बुआई सत्र में मौसम ने साथ नहीं दिया था, जिससे रकबे में कुछ कमी आई है। फिलहाल इस बार पर्याप्त मात्रा में गन्ने की बुआई कराई जा रही है। किसानों को उन्नतशील प्रजाति के गन्ने के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ब्लॉक स्तर पर गोष्ठियां आयोजित कर किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
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मुंडेरवा गन्ना समिति का घटा रकबा
मुंडेरवा गन्ना समिति क्षेत्र का रकबा घट रहा है। पेराई सत्र 2019-2020 के गन्ना सर्वे के अनुसार 15425.54 हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती की गई थी, जो 2020-2021 में सिमटकर 12803.28 हेक्टेयर हो गई। समिति क्षेत्र के रकबे में करीब 2612.26 हेक्टेयर की कमी आई। मुंडेरवा चीनी मिल ने अपने पहले पेराई सत्र में 44.18 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई किया था जो इस बार सिमटकर 34 लाख क्विंटल हो गया।
अप्रैल तक चलेगी बभनान मिल
बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की बभनान इकाई ने 22 नंवबर से पेराई सत्र शुरू किया। मिल प्रबंधन ने मौजूदा सत्र में 1.5 करोड़ क्विंटल गन्ने की पेराई का रखा था। अब तक करीब 8081000 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हो चुकी है। मिल प्रशासनिक व श्रम अधिकारी केपी सिंह ने बताया कि सात समितियों के 70 से अधिक क्रय केंद्र से गन्ने की खरीद की जा रही है। क्षेत्र में अब भी काफी गन्ना पड़ा है। लक्ष्य पूर्ति के लिए पांच अप्रैल तक मिल चलाई जा सकती है।