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फर्जी डीएल प्रकरण : शासन को भेजी गई जांच रिपोर्ट, कार्रवाई पर निगाह

Fri, 08 May 2026 12:44 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 12:44 AM IST
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Fake DL case: Investigation report sent to the government, action on watch
बस्ती। परिवहन विभाग के संभागीय निरीक्षक प्राविधिक कार्यालय में हैवी डीएल के फर्जीबाड़ा का खुलासा होने के बाद व्यवस्था में परिवर्तन दिखा। उपपरिवहन आयुक्त राजकुमार सिंह की जांच पूरी होते ही यहां तैनात आरआई सीमा गौतम को शासन स्तर से निलंबित कर दिया गया है।
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हालांकि वह गोरखपुर में तैनाती के दौरान वाहनों के फिटनेस में हुई अनियमितता के मामले में कार्रवाई के लपेटे में आईं है। अभी बस्ती से जुड़े हैवी डीएल फर्जीवाड़ा प्रकरण में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद डिप्टी कमिश्नर परिवहन विभाग ने अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है।
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डीएम स्तर से यह रिपोर्ट शासन को प्रेषित की गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार फर्जी डीएल के प्रकरण में आरआई सीमा गौतम और सारथी पोर्टल के तहत तैनात वेंडर प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाए गए हैं। इसीलिए विभाग के उच्च पदस्थ अधिकारियों ने आरआई सीमा गौतम के गोरखपुर से जुड़े फिटनेस में अनियमितता के पुराने मामले में उन्हें निलंबित करने का तत्काल फैसला लिया।
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यह मामला एक साल से दबा हुआ था। जबकि बस्ती से जुड़े फर्जी हैवी डीएल मामले में अभी शासन से कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। इसको लेकर विभाग के अन्य अधिकारियों के भी होश उड़े हुए हैं।
क्योंकि ने विभागीय जांच के अलावा डीएम कृत्तिका ज्योत्सना ने इस मामले की प्रशासनिक जांच भी करवाई है। यह दोनों रिपोर्ट शासन को प्रेषित हुई है। मगर अभी कार्रवाई तय नहीं की गई है। इधर आरआई सीमा गौतम के निलंबित होने के बाद डीटीआई सेंटर की व्यवस्था में परिवर्तन दिखने लगा हैं।
एआरटीओ प्रशासन माला बाजपेई अब डीएल संबंधी कार्यों को खुद संभाल रही हैं। वहीं स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए उन्होंने अपने कार्यालय के बाबू प्रेमसागर की तैनाती डीटीआई सेंटर में की है। निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित बाबू प्रत्येक स्थायी लाइसेंस की पत्रावली की गहनता जांच करने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। इसके पहले स्थाई लाइसेंस के लिए किसी बाबू की तैनाती विभागीय अधिकारियों ने नहीं की थी। आरआई के अधीन तैनात सारथी पोर्टल के वेंडर ही उनके लॉगिन, पॉसवर्ड से स्थाई डीएल, पता बदलने एवं रिन्युअल के आवेदनों को अप्रूवल देते रहे।

विभागीय अधिकारियों के इसी उदासीनता का लाभ दलालों और वेंडरों ने खूब उठाया। लंबे समय से पता बदलकर एवं रिन्यूवल के आधार पर फर्जी डीएल जारी होते रहे। अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी या जानबूझकर जिम्मेदार अनजान बने रहे।
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