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बस्ती फर्जी डीएल प्रकरण: अभिलेख खंगाल रही शासन की टीम, आधार, पता और मोबाइल नंबर तक का हो रहा है सत्यापन
Wed, 29 Apr 2026 11:19 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 29 Apr 2026 11:19 PM IST
सार
जांच टीम उस तह तक पहुंचने के प्रयास में है कि अरुणाचल तक फैले हैवी डीएल जारी कराने वाले दलालों के सिंडीकेट से विभाग का कौन अधिकारी व कर्मचारी जुड़ा है। टीम हैवी डीएल से जुड़े एक-एक अभिलेख और ऑनलाइन डाटा खंगाल रही है। फर्जी हैवी डीएल का मामला सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी बचने का बहाना ढूढ़ रहे हैं।
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यूपी में फर्जी डीएल बनवाने का गिरोह।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
बैकलाग फीडिंग के आधार पर फर्जी हैवी ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शासन से भेजे गए उप परिवहन आयुक्त राजकुमार सिंह की टीम दो दिनों से जांच-पड़ताल में जुटी हुई है। इस दौरान बस्ती में पता बदलकर बनाए गए फर्जी परमानेंट हैवी डीएल के कई चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं।
बुधवार को भी टीम ने आरआई कार्यालय में अरुणाचल प्रदेश से बैकलाग डीएल की फीडिंग को पता बदलने के मामले की छानबीन में जुटी रही।
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बुधवार को भी टीम ने आरआई कार्यालय में अरुणाचल प्रदेश से बैकलाग डीएल की फीडिंग को पता बदलने के मामले की छानबीन में जुटी रही।
टीम उस तह तक पहुंचने के प्रयास में है कि अरुणाचल तक फैले हैवी डीएल जारी कराने वाले दलालों के सिंडीकेट से विभाग का कौन अधिकारी व कर्मचारी जुड़ा है। टीम हैवी डीएल से जुड़े एक-एक अभिलेख और ऑनलाइन डाटा खंगाल रही है। फर्जी हैवी डीएल का मामला सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी बचने का बहाना ढूढ़ रहे हैं।
चर्चा है कि इस खेल में पूर्व कई अधिकारियों की भी भूमिका संदिग्ध है। बताते हैं कि आरआई के लाॅगिन व पासवर्ड से ही अरुणाचल से बैकलाग डीएल की फीडिंग के बाद पता बदलने की संस्तुति की गई है। अब कार्रवाई से बचने के लिए सारथी पोर्टल पर पता बदलने वाले आवेदकों के पूरा डाटा शो न होने की दलील दी जा रही है।
चर्चा है कि इस खेल में पूर्व कई अधिकारियों की भी भूमिका संदिग्ध है। बताते हैं कि आरआई के लाॅगिन व पासवर्ड से ही अरुणाचल से बैकलाग डीएल की फीडिंग के बाद पता बदलने की संस्तुति की गई है। अब कार्रवाई से बचने के लिए सारथी पोर्टल पर पता बदलने वाले आवेदकों के पूरा डाटा शो न होने की दलील दी जा रही है।
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मगर जिम्मेदार इस सवाल पर उलझते जा रहे हैं कि पता बदलने और रिन्यूअल के आवेदकों की संस्तुति से पहले ऑॅफलाइन जांच क्यों नहीं की गई। यहां तक कि आरआई स्तर से उनके कार्यालय में इस तरह के आवेदक तलब तक नहीं किए गए।
आरआई स्तर से अधिकृत आउटसोर्स कर्मचारी उनके लाॅगिन, पासवर्ड का उपयोग कर फर्जी हैवी डीएल बनवाने में दलालों को मदद पहुंचाता रहा। इसके बदले आउटसोर्स कर्मचारी द्वारा दलालों के सिंडीकेट से से अच्छी खासी रकम ऐंठने की बात सामने आ रहे हैं। बहरहाल इस पूरे खेल स्थानीय अफसरों के हाथ होने पर कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
आरआई स्तर से अधिकृत आउटसोर्स कर्मचारी उनके लाॅगिन, पासवर्ड का उपयोग कर फर्जी हैवी डीएल बनवाने में दलालों को मदद पहुंचाता रहा। इसके बदले आउटसोर्स कर्मचारी द्वारा दलालों के सिंडीकेट से से अच्छी खासी रकम ऐंठने की बात सामने आ रहे हैं। बहरहाल इस पूरे खेल स्थानीय अफसरों के हाथ होने पर कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
फर्जीवाड़े के खेल में एक महिला बाबू भी बन सकती है मोहरा
फर्जी डीएल के इस खेल में आरआई कार्यालय में तैनात एक महिला लिपिक को भी मोहरा बनाने की चाल चली जा रही है, जबकि इनके पास डुप्लीकेट, परमानेंट एवं एमवी डीएल और वाहन फिटनेस का दायित्व सौंपा गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि हैवी एवं परमानेंट डीएल के लिए किसी स्थाई बाबू की तैनाती नहीं की गई है।
जानकार बताते हैं कि इसके पीछे गहरा राज है। यदि स्थाई कर्मचारी तैनात होंगे तो डीएल बनाने में होने वाली वसूली में इनका भी हिस्सा लगेगा। इससे जिम्मेदारों को मोटी रकम नहीं मिल पाएगी। इसीलिए बस्ती में नया एलएमवी एवं हैवी डीएल से संबंधित जिम्मेदारी कार्यालय के किसी भी कर्मचारी को नहीं दी गई है। यह पूरा कार्य सरकारी बाबू की तरह आउटसोर्स कर चुपचाप निपटा रहे।
फर्जी डीएल के इस खेल में आरआई कार्यालय में तैनात एक महिला लिपिक को भी मोहरा बनाने की चाल चली जा रही है, जबकि इनके पास डुप्लीकेट, परमानेंट एवं एमवी डीएल और वाहन फिटनेस का दायित्व सौंपा गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि हैवी एवं परमानेंट डीएल के लिए किसी स्थाई बाबू की तैनाती नहीं की गई है।
जानकार बताते हैं कि इसके पीछे गहरा राज है। यदि स्थाई कर्मचारी तैनात होंगे तो डीएल बनाने में होने वाली वसूली में इनका भी हिस्सा लगेगा। इससे जिम्मेदारों को मोटी रकम नहीं मिल पाएगी। इसीलिए बस्ती में नया एलएमवी एवं हैवी डीएल से संबंधित जिम्मेदारी कार्यालय के किसी भी कर्मचारी को नहीं दी गई है। यह पूरा कार्य सरकारी बाबू की तरह आउटसोर्स कर चुपचाप निपटा रहे।
फर्जीवाड़ा पकड़ में आने पर अब आवेदनों के अप्रूवल में जांच तेज
बस्ती आरटीओ कार्यालय में हुए खेल के बाद आवेदनों की जांच तेज हो गई है। चार पहिया हो या फिर हैवी लाइसेंस के लिए आवेदन, पूरी प्रक्रिया के तहत अब आगे बढ़ाया जा रहा है। टेस्टिंग भी अनिवार्य रूप से करवा रहे हैं। लर्निंग का खास ध्यान रखा जा रहा है। वहीं, अब कथित दलाल भी परिसर में नहीं दिख रहे।
बाहर से ही जुगाड़ लगा रहे, मगर शासन स्तर से चल रही जांच में कर्मी से लेकर अधिकारी तक सर्तक दिख रहे हैं और जुगाड़ के जरिये खुद को पाक-साफ करने में जुट गए हैं। वहीं, जिस नाम के डीएल बैकलाग से बने हैं, वहां विशेष वाहक भेजकर जांच शुरू है।
बस्ती आरटीओ कार्यालय में हुए खेल के बाद आवेदनों की जांच तेज हो गई है। चार पहिया हो या फिर हैवी लाइसेंस के लिए आवेदन, पूरी प्रक्रिया के तहत अब आगे बढ़ाया जा रहा है। टेस्टिंग भी अनिवार्य रूप से करवा रहे हैं। लर्निंग का खास ध्यान रखा जा रहा है। वहीं, अब कथित दलाल भी परिसर में नहीं दिख रहे।
बाहर से ही जुगाड़ लगा रहे, मगर शासन स्तर से चल रही जांच में कर्मी से लेकर अधिकारी तक सर्तक दिख रहे हैं और जुगाड़ के जरिये खुद को पाक-साफ करने में जुट गए हैं। वहीं, जिस नाम के डीएल बैकलाग से बने हैं, वहां विशेष वाहक भेजकर जांच शुरू है।
पिछले छह माह में अरुणाचल प्रदेश या अन्य राज्य से बैकलाग इंट्री की गई उन सभी डीएल के विवरण की जांच कराई जा रही है। इसके लिए लोकल स्तर पर टीम बनाई गई है। साथ ही सत्यापन लाइसेंसिंग अथॉरिटी से कराया जा रहा है। जो भी डीएल गलत पाए जाएंगे, उसे निरस्त कर दिया जाएगा: फरीउद्दीन, आरटीओ, बस्ती।