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सिद्धार्थ विवि : कॉलेजों में प्रिंसिपल तय करेंगे बाहरी परीक्षक
Thu, 18 May 2023 01:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 18 May 2023 01:09 AM IST
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बस्ती। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु-सिद्धार्थनगर ने अब बाहरी परीक्षकों की तैनाती का अधिकार प्राचार्यों को दे दिया है। प्राचार्य आसपास के महाविद्यालयों के शिक्षकों को बाह्य परीक्षक के रूप में बुला सकेंगे। इससे परीक्षकों को तो आसानी होगी ही, महाविद्यालयों के प्राचार्यों को भी अनावश्यक परेशानियों से छुटकारा मिल जाएगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरिबहादुर श्रीवास्तव ने महाविद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षा के लिए परीक्षक बुलाने की जिम्मेदारी संबंधित प्राचार्य को सौंप दी है। इससे प्रैक्टिकल परीक्षा संपन्न कराने के लिए प्राचार्यों व विद्यार्थियों पर न तो मानसिक दबाव रहेगा और न ही किसी तरह के आर्थिक शोषण का भय रहेगा। जिले के अनुदानित, स्ववित्तपोषित समेत सभी प्राचार्यों ने कुलपति की इस पहल की सराहना की है।
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लगातार दूसरे वर्ष मिली सौगात
विवि के कुलपति प्रो. हरिबहादुर श्रीवास्तव ने पिछले साल आंतरिक परीक्षकों की तैनाती में भी बदलाव किया था। पहले प्रायोगिक परीक्षा के लिए आंतरिक व बाह्य परीक्षकों की सूची विवि प्रशासन जारी करता था। प्राचार्य चाह कर भी कोई तब्दीली नहीं करवा सकते थे। कुलपति ने प्राचार्यों का अधिकृत कर दिया का कि वे अपने महाविद्यालय अथवा आसपास के कॉलेज के शिक्षक को आंतरिक परीक्षक के तौर पर तैनात कर सकते हैं। इससे प्राचार्यों को आसानी हुई थी और परीक्षाएं समय से संपन्न हो गई थीं और परिणाम भी बेहतर आए थे। इस बार यही व्यवस्था बाह्य परीक्षकों की तैनाती में की गई है।
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शिक्षाविदों ने की सराहना
संतराम चौधरी श्रीमती राजकली देवी कॉलेज, दसिया-रुधौली के प्राचार्य डॉ. वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि विवि के कुलपति प्रो. हरिबहादुर श्रीवास्तव ने पिछले दिनों कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिससे प्राचार्यों के अधिकार क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हुई है। इसका लाभ निजी व अनुदानित समेत सरकारी उच्च शिक्षण संस्थाओं को मिलेगा।
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श्रीराम सहाय सिंह कन्या महाविद्यालय के संस्थापक सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि विवि के कुलपति ने निजी शिक्षण संस्थाओं को बड़ी राहत दी है। परीक्षकों की तैनाती के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था और परीक्षार्थियों पर दबाव बना रहता था। इस व्यवस्था से महाविद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक माहौल बनेगा।
एपीएन पीजी कॉलेज बस्ती के पूर्व प्राचार्य दिलीप कुमार अस्थाना ने बताया कि नई व्यवस्था का सबसे अधिक लाभ परीक्षकों को मिलेगा। विवि प्रशासन से तैनाती होने के कारण किसी भी जिले में भेजे जाने का भय समाप्त हो चुका है। अब प्राचार्य व परीक्षक आपसी वार्ता के तहत सुविधानुसार परीक्षा संपन्न करवा सकेंगे।
बीएचयू के शोधकर्ता डॉ. राम विलास शर्मा ने कहा कि परीक्षकों की तैनाती को लेकर हमेशा महाविद्यालय प्रशासन सकते में रहता था। यह एक पुरानी परंपरा थी, जिसमें लंबा खेल होता रहता था। अब इस तरह की खामियों से निजात मिलेगी और महाविद्यालय प्रशासन बेहिचक प्रायोगिक परीक्षा संपन्न करा सकेंगे।
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वर्जन
छात्रों और शिक्षकों की सहूलियत के लिए निर्णय लिए गए है। इसका दूरगामी सकारात्मक परिणाम होगा। इससेउच्च शिक्षा के परीक्षार्थियों व परीक्षकों के समय की बचत होगी। परीक्षा भी सरलता से संपन्न होगी। -प्रो. हरि बहादुर श्रीवास्तव, कुलपति, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय
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लगातार दूसरे वर्ष मिली सौगात
विवि के कुलपति प्रो. हरिबहादुर श्रीवास्तव ने पिछले साल आंतरिक परीक्षकों की तैनाती में भी बदलाव किया था। पहले प्रायोगिक परीक्षा के लिए आंतरिक व बाह्य परीक्षकों की सूची विवि प्रशासन जारी करता था। प्राचार्य चाह कर भी कोई तब्दीली नहीं करवा सकते थे। कुलपति ने प्राचार्यों का अधिकृत कर दिया का कि वे अपने महाविद्यालय अथवा आसपास के कॉलेज के शिक्षक को आंतरिक परीक्षक के तौर पर तैनात कर सकते हैं। इससे प्राचार्यों को आसानी हुई थी और परीक्षाएं समय से संपन्न हो गई थीं और परिणाम भी बेहतर आए थे। इस बार यही व्यवस्था बाह्य परीक्षकों की तैनाती में की गई है।
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शिक्षाविदों ने की सराहना
संतराम चौधरी श्रीमती राजकली देवी कॉलेज, दसिया-रुधौली के प्राचार्य डॉ. वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि विवि के कुलपति प्रो. हरिबहादुर श्रीवास्तव ने पिछले दिनों कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिससे प्राचार्यों के अधिकार क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हुई है। इसका लाभ निजी व अनुदानित समेत सरकारी उच्च शिक्षण संस्थाओं को मिलेगा।
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श्रीराम सहाय सिंह कन्या महाविद्यालय के संस्थापक सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि विवि के कुलपति ने निजी शिक्षण संस्थाओं को बड़ी राहत दी है। परीक्षकों की तैनाती के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था और परीक्षार्थियों पर दबाव बना रहता था। इस व्यवस्था से महाविद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक माहौल बनेगा।
एपीएन पीजी कॉलेज बस्ती के पूर्व प्राचार्य दिलीप कुमार अस्थाना ने बताया कि नई व्यवस्था का सबसे अधिक लाभ परीक्षकों को मिलेगा। विवि प्रशासन से तैनाती होने के कारण किसी भी जिले में भेजे जाने का भय समाप्त हो चुका है। अब प्राचार्य व परीक्षक आपसी वार्ता के तहत सुविधानुसार परीक्षा संपन्न करवा सकेंगे।
बीएचयू के शोधकर्ता डॉ. राम विलास शर्मा ने कहा कि परीक्षकों की तैनाती को लेकर हमेशा महाविद्यालय प्रशासन सकते में रहता था। यह एक पुरानी परंपरा थी, जिसमें लंबा खेल होता रहता था। अब इस तरह की खामियों से निजात मिलेगी और महाविद्यालय प्रशासन बेहिचक प्रायोगिक परीक्षा संपन्न करा सकेंगे।
वर्जन
छात्रों और शिक्षकों की सहूलियत के लिए निर्णय लिए गए है। इसका दूरगामी सकारात्मक परिणाम होगा। इससेउच्च शिक्षा के परीक्षार्थियों व परीक्षकों के समय की बचत होगी। परीक्षा भी सरलता से संपन्न होगी। -प्रो. हरि बहादुर श्रीवास्तव, कुलपति, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय