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डीबीटी के चक्कर में पढ़ाई लिखाई बंद
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डीबीटी के चक्कर में पढ़ाई-लिखाई बंद
स्वेटर, जूता- मोजा और यूनिफार्म का रुपया भेजने को किया जा रहा डाटा फीडिंग
बस्ती। परिषदीय विद्यालय में बच्चों के डाटा फीडिंग करने का काम उनकी पढ़ाई में बाधक बनने लगा है। वजह यह कि स्कूलों के शिक्षक अपने यहां पढ़ने वालों का डाटा फीडिंग कराने में व्यस्त हो गए हैं। हालांकि पिछले दिनों बीएसए ने पत्र जारी कर निर्देश दिया था कि डीबीटी के डाटा फीडिंग का काम बीआरसी से होगा, मगर इसके बाद भी तमाम शिक्षकों को इसकी जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
दरअसल शासन ने परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को यूनिफॉर्म, स्वेटर एवं जूता-मोजे का पैसा उनके अभिभावकों के खाते में भेजने का निर्णय लिया है। जिसके लिए डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) से बच्चों के अभिभावकों के खाता एवं आधार की सूचना पोर्टल पर फीड किया जा रहा है। जिले में 2206 परिषदीय विद्यालय हैं। जिसमें 1437 प्राथमिक, 320 जूनियर और 319 कंपोजिट विद्यालय संचालित हो रहे हैं। जिसमें लगभग 1.80 लाख बच्चों का पंजीकृत है। इन बच्चों को शासन की ओर से अब तक ड्रेस, जूता-मोजा, स्वेटर, स्कूल बैग नि:शुल्क दिया जाता है। लेकिन इस बार एमडीएम के कनवर्जन कॉस्ट की तरह ही ड्रेस का पैसा भी बच्चों के अभिभावकों के खाते में सीधे डीबीटी के जरिए भेजा जाना है। इसके तहत इस सत्र में बच्चों को स्वेटर, स्कूल बैग, यूनीफार्म व जूता- मोजा का पैसा 1056 रुपये खाता में भेजने के लिए डीबीटी एप पर बच्चों का डाटा भरा जा रहा है। जिसके कारण शिक्षकों का पूरा दिन उसी में गुजर रहा है। तकनीकी परेशानी अलग से हो रही है । ऐसे में स्कूल खुलने के बाद भी बच्चों की पढ़ाई-लिखाई नहीं हो पा रही है। कुछ अभिभावकों के आधार बैंक खाता से लिंक न होने की समस्या आ रही है, तो वहीं कुछ के आधार व बैंक खाते में नाम के अक्षरों में अंतर मिल रहा है। जिससे अभी तक उनका ब्योरा डीबीटी एप पर अपलोड नहीं हो रहा है।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के मंत्री बाल कृष्ण ओझा का कहना है कि शिक्षकों के पास कंप्यूटर नहीं है। जिसके कारण शिक्षकों को छात्रों का ब्योरा मोबाइल से डीबीटी एप पर अपलोड करना पड़ रहा है। वहीं, नेटवर्क व सर्वर की समस्या हमेशा बनी रहती है। पूरा दिन शिक्षकों का डाटा अपलोड करने में बीत जा रहा है। जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। डीबीटी का कार्य पूरा करने के चक्कर में शिक्षक इन दिनों बच्चों को होमवर्क तक नहीं दे पा रहे हैं, कई अभिभावक शिक्षकों को फोन कर होमवर्क को लेकर शिकायत कर रहे हैं।
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अभिभावकों के खाता एवं आधार की सूचना पोर्टल पर अपलोड कार्य लगभग पूरा हो गया है। कुछ बच्चों के डाटा फीडिंग का काम शेष है, जिसके लिए शिक्षकों को भी सहयोग करने के लिए कहा गया है। वहीं, जिन अभिभावकों के बैंक खाता आधार से लिंक होने की समस्या आ रही है, उनकी समस्या के समाधान का प्रयास किया जा रहा है।
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रमेश मिश्र
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स्वेटर, जूता- मोजा और यूनिफार्म का रुपया भेजने को किया जा रहा डाटा फीडिंग
बस्ती। परिषदीय विद्यालय में बच्चों के डाटा फीडिंग करने का काम उनकी पढ़ाई में बाधक बनने लगा है। वजह यह कि स्कूलों के शिक्षक अपने यहां पढ़ने वालों का डाटा फीडिंग कराने में व्यस्त हो गए हैं। हालांकि पिछले दिनों बीएसए ने पत्र जारी कर निर्देश दिया था कि डीबीटी के डाटा फीडिंग का काम बीआरसी से होगा, मगर इसके बाद भी तमाम शिक्षकों को इसकी जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
दरअसल शासन ने परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को यूनिफॉर्म, स्वेटर एवं जूता-मोजे का पैसा उनके अभिभावकों के खाते में भेजने का निर्णय लिया है। जिसके लिए डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) से बच्चों के अभिभावकों के खाता एवं आधार की सूचना पोर्टल पर फीड किया जा रहा है। जिले में 2206 परिषदीय विद्यालय हैं। जिसमें 1437 प्राथमिक, 320 जूनियर और 319 कंपोजिट विद्यालय संचालित हो रहे हैं। जिसमें लगभग 1.80 लाख बच्चों का पंजीकृत है। इन बच्चों को शासन की ओर से अब तक ड्रेस, जूता-मोजा, स्वेटर, स्कूल बैग नि:शुल्क दिया जाता है। लेकिन इस बार एमडीएम के कनवर्जन कॉस्ट की तरह ही ड्रेस का पैसा भी बच्चों के अभिभावकों के खाते में सीधे डीबीटी के जरिए भेजा जाना है। इसके तहत इस सत्र में बच्चों को स्वेटर, स्कूल बैग, यूनीफार्म व जूता- मोजा का पैसा 1056 रुपये खाता में भेजने के लिए डीबीटी एप पर बच्चों का डाटा भरा जा रहा है। जिसके कारण शिक्षकों का पूरा दिन उसी में गुजर रहा है। तकनीकी परेशानी अलग से हो रही है । ऐसे में स्कूल खुलने के बाद भी बच्चों की पढ़ाई-लिखाई नहीं हो पा रही है। कुछ अभिभावकों के आधार बैंक खाता से लिंक न होने की समस्या आ रही है, तो वहीं कुछ के आधार व बैंक खाते में नाम के अक्षरों में अंतर मिल रहा है। जिससे अभी तक उनका ब्योरा डीबीटी एप पर अपलोड नहीं हो रहा है।
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उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के मंत्री बाल कृष्ण ओझा का कहना है कि शिक्षकों के पास कंप्यूटर नहीं है। जिसके कारण शिक्षकों को छात्रों का ब्योरा मोबाइल से डीबीटी एप पर अपलोड करना पड़ रहा है। वहीं, नेटवर्क व सर्वर की समस्या हमेशा बनी रहती है। पूरा दिन शिक्षकों का डाटा अपलोड करने में बीत जा रहा है। जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। डीबीटी का कार्य पूरा करने के चक्कर में शिक्षक इन दिनों बच्चों को होमवर्क तक नहीं दे पा रहे हैं, कई अभिभावक शिक्षकों को फोन कर होमवर्क को लेकर शिकायत कर रहे हैं।
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अभिभावकों के खाता एवं आधार की सूचना पोर्टल पर अपलोड कार्य लगभग पूरा हो गया है। कुछ बच्चों के डाटा फीडिंग का काम शेष है, जिसके लिए शिक्षकों को भी सहयोग करने के लिए कहा गया है। वहीं, जिन अभिभावकों के बैंक खाता आधार से लिंक होने की समस्या आ रही है, उनकी समस्या के समाधान का प्रयास किया जा रहा है।
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रमेश मिश्र