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Basti News: विकास की रफ्तार में डूडा, बीडीए आगे... नगर पालिका रह गई पीछे
Tue, 30 Jan 2024 01:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 30 Jan 2024 01:55 AM IST
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महत्वपूर्ण सड़कों की मरम्मत तक नहीं करा पा रही नगर पालिका
शहर को संवारने का किया गया था वादा, दिन-ब-दिन बढ़ रहीं समस्याएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। विकास की रफ्तार में डूडा और बीडीए आगे निकल रहा है। 71 साल पुरानी नगर पालिका पीछे छूट रही है। दो साल से नगर पालिका का कोष खाली चल रहा है। निकाय चुनाव में शहर को संवारने का वादा किया गया था। साल बीतने को है। मगर, नगर पालिका की कंगाली ही नहीं दूर हो पाई। शहर में नई संरचना का निर्माण तो दूर महत्वपूर्ण सड़कों की मरम्मत तक नहीं हो पा रही है।
मंडल की सबसे पुरानी वर्ष 1952 की नगर पालिका परिषद की रौनक छिनती जा रही है। पालिका के पास शहर को संजाने और संवारने के लिए धन ही नहीं है। सिर्फ 15वें राज्य वित्त आयोग के धन से पालिका को यदाकदा संजीवनी मिल पा रही है। वह भी छह-छह माह के अंतर पर। प्रति तिमाही डेढ़ करोड़ रुपये मिलने वाले इस बजट से नगर पालिका के कर्मचारियों का वेतन, पेंशन एवं अन्य देयकों का भुगतान भी होता है।
इसके अलावा प्रति माह 30 लाख रुपये कर्ज भी अदा करना होता है। इसके बाद अवशेष धनराशि से विकास कार्य कराए जाते हैं। इस मद में बमुश्किल 50 लाख रुपये ही तिमाही बच पाता है। यह धनराशि ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। इसके अतिरिक्त कोई भी बजट दो साल से नगर पालिका के हक में नहीं आया है।
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शहर की प्रमुख सड़कों में शुमार मालवीय मार्ग, रेलवे स्टेशन मार्ग और ब्लॉक रोड की हालत दयनीय हो गई है। लंबे समय से इन सड़कों की मरम्मत न होने से जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। पैच कार्य उखड़ा हुआ है। शहरवासी आए दिन समस्या से जूझ रहे हैं। पालिका इन सड़कों पर गिट्टी भी नहीं डाल पा रही है। इतना ही नहीं, भीषण ठंड में भी नगर पालिका धनाभाव के चलते अलाव तक की व्यवस्था नहीं करा सकी है। कोष खाली होने के चलते लकड़ी आपूर्ति के लिए टेंडर नहीं हो सका। मालवीय मार्ग से मंगला कॉलोनी जाने वाली सड़क पैदल चलने लायक भी नहीं रह गई है। खुले नाले के किनारे की यह सड़क जगह- जगह धंस गई है। मोहल्लेवासी लगातार आवाज उठा रहे हैं। पालिका इस सड़क की मरम्मत तक नहीं करा पा रही है। गड्ढा युक्त सड़क पर अनियंत्रित होने के दौरान खुले नाले में गिरने का खतरा बना हुआ है।
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बाद की संस्थाओं ने ले ली रफ्तार
जिले में नगर पालिका के बाद अस्तित्व में आई सरकारी संस्थाओं ने विकास के क्षेत्र में रफ्तार ले ली है। नगर पालिका इसमें पीछे छूट गई है। पांच साल पहले क्रियाशील हुई बस्ती विकास प्राधिकरण ने अवस्थापना मद से दो साल में पांच करोड़ रुपये से शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में निर्माण करके दिखाया है। रेलवे स्टेशन गेट से चीनी मिल गेट तक डेढ़ करोड़ रुपये से हॉट मिक्स प्लांट से सड़क बनाई गई है। सेंट बेसिल स्कूल एवं मड़वानगर-खीरी घाट मार्ग भी बीडीए ने बनवाया है। शास्त्री चौक पर समृद्धि चौक और शौर्य स्तंभ का कार्य निर्माणाधीन है। इसके अलावा डूडा ने भी विकास कार्यों में रफ्तार लिया है। वर्ष 2023-24 में सड़क, नाली आदि कार्यों को मिलाकर छह करोड़ रुपये का टेंडर हुआ है। लगभग दो करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके हैं।
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सभासदों की बढ़ीं मुश्किलें
नगर पालिका परिषद में चुनकर आए सभासदों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। वार्डवार उन पर समस्याओं के समाधान के लिए दबाव बढ़ रहा है। बोर्ड की बैठक में निर्माण कार्यों से संबंधित प्रस्ताव का मोटा पुलिंदा सौंपा जा रहा है। मगर, बजट के अभाव में स्वीकृति कार्यों का भी टेंडर नहीं हो पा रहा है। सत्ता पक्ष से जुड़े सभासद तो अपने प्रस्ताव डूडा और बीडीए से स्वीकृति करा रहे हैं। रौतापार, पिकौरा शिवगुलाम वार्ड में इंटरलॉकिंग सड़क एवं नाली निर्माण के कार्य डूडा ने कराया है।
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बड़ी परियोजनाएं भी अधर में लटकीं
नगर पालिका की ओर से प्रस्तावित बड़ी परियोजनाएं भी अधर में लटक गई हैं। टाउन क्लब परिसर में अंडरग्राउंड पार्किंग का निर्माण पालिका की योजना थी। मगर, यह धरातल पर नहीं उतर पाई। अब बीडीए ने इसे अपने एजेंडे में शामिल कर लिया है। इसके अलावा अमहट घाट पर पार्क निर्माण की योजना भी अधर में लटकी है।
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कोट
मेरे स्तर से शासन को लगातार डिमांड भेजा जा रहा है। एक साल के भीतर लगभग पचास करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कराकर भेजा जा चुका है। मगर, अभी तक बजट नहीं मिला है। उपलब्ध धन से ही विकास कार्य कराया जा रहा है।
नेहा वर्मा, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद
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शहर को संवारने का किया गया था वादा, दिन-ब-दिन बढ़ रहीं समस्याएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। विकास की रफ्तार में डूडा और बीडीए आगे निकल रहा है। 71 साल पुरानी नगर पालिका पीछे छूट रही है। दो साल से नगर पालिका का कोष खाली चल रहा है। निकाय चुनाव में शहर को संवारने का वादा किया गया था। साल बीतने को है। मगर, नगर पालिका की कंगाली ही नहीं दूर हो पाई। शहर में नई संरचना का निर्माण तो दूर महत्वपूर्ण सड़कों की मरम्मत तक नहीं हो पा रही है।
मंडल की सबसे पुरानी वर्ष 1952 की नगर पालिका परिषद की रौनक छिनती जा रही है। पालिका के पास शहर को संजाने और संवारने के लिए धन ही नहीं है। सिर्फ 15वें राज्य वित्त आयोग के धन से पालिका को यदाकदा संजीवनी मिल पा रही है। वह भी छह-छह माह के अंतर पर। प्रति तिमाही डेढ़ करोड़ रुपये मिलने वाले इस बजट से नगर पालिका के कर्मचारियों का वेतन, पेंशन एवं अन्य देयकों का भुगतान भी होता है।
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इसके अलावा प्रति माह 30 लाख रुपये कर्ज भी अदा करना होता है। इसके बाद अवशेष धनराशि से विकास कार्य कराए जाते हैं। इस मद में बमुश्किल 50 लाख रुपये ही तिमाही बच पाता है। यह धनराशि ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। इसके अतिरिक्त कोई भी बजट दो साल से नगर पालिका के हक में नहीं आया है।
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शहर की प्रमुख सड़कों में शुमार मालवीय मार्ग, रेलवे स्टेशन मार्ग और ब्लॉक रोड की हालत दयनीय हो गई है। लंबे समय से इन सड़कों की मरम्मत न होने से जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। पैच कार्य उखड़ा हुआ है। शहरवासी आए दिन समस्या से जूझ रहे हैं। पालिका इन सड़कों पर गिट्टी भी नहीं डाल पा रही है। इतना ही नहीं, भीषण ठंड में भी नगर पालिका धनाभाव के चलते अलाव तक की व्यवस्था नहीं करा सकी है। कोष खाली होने के चलते लकड़ी आपूर्ति के लिए टेंडर नहीं हो सका। मालवीय मार्ग से मंगला कॉलोनी जाने वाली सड़क पैदल चलने लायक भी नहीं रह गई है। खुले नाले के किनारे की यह सड़क जगह- जगह धंस गई है। मोहल्लेवासी लगातार आवाज उठा रहे हैं। पालिका इस सड़क की मरम्मत तक नहीं करा पा रही है। गड्ढा युक्त सड़क पर अनियंत्रित होने के दौरान खुले नाले में गिरने का खतरा बना हुआ है।
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बाद की संस्थाओं ने ले ली रफ्तार
जिले में नगर पालिका के बाद अस्तित्व में आई सरकारी संस्थाओं ने विकास के क्षेत्र में रफ्तार ले ली है। नगर पालिका इसमें पीछे छूट गई है। पांच साल पहले क्रियाशील हुई बस्ती विकास प्राधिकरण ने अवस्थापना मद से दो साल में पांच करोड़ रुपये से शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में निर्माण करके दिखाया है। रेलवे स्टेशन गेट से चीनी मिल गेट तक डेढ़ करोड़ रुपये से हॉट मिक्स प्लांट से सड़क बनाई गई है। सेंट बेसिल स्कूल एवं मड़वानगर-खीरी घाट मार्ग भी बीडीए ने बनवाया है। शास्त्री चौक पर समृद्धि चौक और शौर्य स्तंभ का कार्य निर्माणाधीन है। इसके अलावा डूडा ने भी विकास कार्यों में रफ्तार लिया है। वर्ष 2023-24 में सड़क, नाली आदि कार्यों को मिलाकर छह करोड़ रुपये का टेंडर हुआ है। लगभग दो करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके हैं।
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सभासदों की बढ़ीं मुश्किलें
नगर पालिका परिषद में चुनकर आए सभासदों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। वार्डवार उन पर समस्याओं के समाधान के लिए दबाव बढ़ रहा है। बोर्ड की बैठक में निर्माण कार्यों से संबंधित प्रस्ताव का मोटा पुलिंदा सौंपा जा रहा है। मगर, बजट के अभाव में स्वीकृति कार्यों का भी टेंडर नहीं हो पा रहा है। सत्ता पक्ष से जुड़े सभासद तो अपने प्रस्ताव डूडा और बीडीए से स्वीकृति करा रहे हैं। रौतापार, पिकौरा शिवगुलाम वार्ड में इंटरलॉकिंग सड़क एवं नाली निर्माण के कार्य डूडा ने कराया है।
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बड़ी परियोजनाएं भी अधर में लटकीं
नगर पालिका की ओर से प्रस्तावित बड़ी परियोजनाएं भी अधर में लटक गई हैं। टाउन क्लब परिसर में अंडरग्राउंड पार्किंग का निर्माण पालिका की योजना थी। मगर, यह धरातल पर नहीं उतर पाई। अब बीडीए ने इसे अपने एजेंडे में शामिल कर लिया है। इसके अलावा अमहट घाट पर पार्क निर्माण की योजना भी अधर में लटकी है।
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कोट
मेरे स्तर से शासन को लगातार डिमांड भेजा जा रहा है। एक साल के भीतर लगभग पचास करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कराकर भेजा जा चुका है। मगर, अभी तक बजट नहीं मिला है। उपलब्ध धन से ही विकास कार्य कराया जा रहा है।
नेहा वर्मा, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद