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बरसात में फिर लगेगा पानी का कर्फ्यू
basti
Updated Sat, 19 May 2018 11:42 PM IST
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जिला महिला अस्पताल के पास जाम पड़ा नाला।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती।
मौसम विभाग तो 15 जून से बारिश की बात करता है, लेकिन बेमौसम बरसात का भरोसा नहीं। ऐसे में नगर पालिका शहरी क्षेत्र को जलभराव से बचाने के लिए हर साल नालों की सफाई करता है। इस बार भी यह हो रहा है, मगर बरसात में इस बार भी शहर में पानी का कर्फ्यू लगना तय है। जगह-जगह अधूूरे और कूड़ा-कचरा से भरे नाले बारिश में फिर उफनाएंगे और शहरियों को मुसीबत उठानी पड़ेगी।
शहर में कुल 37 किलोमीटर के 39 नाले हैं। जबकि 45 किलोमीटर नालियां बनाई गई हैं। इनकी सफाई को लेकर हर साल लाखों रुपये बहाए जाते हैं, मगर बरसात में इसका परिणाम शून्य होता है। क्योंकि समूचा शहर जलभराव की समस्या से जूझता है। सबसे ज्यादा बुरी स्थिति आवास विकास कालोनी, कोतवाली, मालवीय मार्ग पुरानी बस्ती क्षेत्र के दक्षिण दरवाजा की होती है। यहां गंदा पानी सड़कों पर बहनें लगता है और इसी के बीच से होकर लोग आते-जाते हैं। बरसात में यहां नगर पालिका की व्यवस्था ऊपर वाले के भरोसे हो जाती है।
यूं हो रही सफाई
इस बार नाला सफाई का कार्य दस-दस लोगों की दो टीम कर रही है। इसके अलावा छोटे-बड़े जेसीबी भी इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। यहां बरसात को करीब मानकर पालिका प्रशासन दो शिफ्टों में सफाई कार्य करा रहा है। यह अलग बात है कि एक ओर सफाई हो रही है तो दूसरी ओर फिर से नालों में कूड़ा नजर आने लगता है। ऐसे में सफाई की कवायद केवल कागजी नजर आती है। विभागीय आंकड़ों की मानें तो इस साल अब तक 2.25 लाख रुपये सफाई व्यवस्था को चाक चौबंद करने के लिए खर्च किए जा चुके हैं।
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तीन वर्ष में खर्च हुआ साठ लाख
नगर पालिका परिषद के तत्कालीन व्यवस्था में तीन वर्ष में कागजों में साठ लाख रुपये नाला सफाई पर बहा दिया गया, मगर परिणाम शून्य रहा। तीनों वर्ष में यहां के नागरिकों ने मुसीबत झेली। कई घरों में बरसात का पानी घुस गया और लोग छत पर दिन गुजारते थे। वर्ष 2014-15 में नाला सफाई पर 24 लाख, वर्ष 2015-16 में 13.50 लाख तो वर्ष 16-17 में 22.50 लाख रुपये खर्च किए गए। बावजूद इसके हालात जस के तस हैं।
अब तक 2.25 लाख खर्च
नगर पालिका परिषद के नए सत्र में पालिका प्रशासन की निगरानी तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट चंद्रमोहन गर्ग व प्रभारी ईओ केके चौबे ने की। इस बार रणनीति बनाकर नाला सफाई का कार्य शुरू कराया गया। लखनऊ की बीस लोगों की टीम को सफाई कार्य सौंपा गया, मगर अब तक केवल 2.25 लाख रुपये व्यय हुए हैं। विभागीय अधिकारी तकरीबन करीब पांच लाख रुपये व्यय का अनुमान लगा रहे हैं।
बीस किलोमीटर नाला अधूरा
शहर में पानी निकास के लिए बनाए गए 37 किलोमीटर नाला कई स्थानों पर अधूरा है। इसका परिणाम नागरिक झेलते हैं। विभागीय सर्वे की मानें तो शहरी क्षेत्र में अब भी बीस किलोमीटर नाला निर्माण जरूरी है। हालांकि, अभी इस पर पालिका प्रशासन केवल सर्वे कराने की बात कह रहा है, मगर बरसात से पहले इसके निर्माण की उम्मीद भी जता रहा है।
इन मोहल्लों में जलभराव
शहर के आवास विकास कालोनी, मालवीय मार्ग के विभिन्न मोहल्ले, त्रिपाठी गली, धर्मशाला रोड, सुर्ती हट्टा, स्टेशन रोड, दक्षिण दरवाजा, चइयाबारी, पांडेय बाजार आदि मोहल्लों में बारिश के दिनों में जलभराव होता है। इसका कारण यहां नालों के निर्माण में मानकों को दर किनार किया गया है।
अधिशासी अधिकारी ने कहा
नगर पालिका परिषद के प्रभारी ईओ कमलेश कुमार चौबे कहते हैं कि पीछे क्या हुआ, इस बारे में वे कोई टिप्पणी नहीं करते, मगर अब बरसात को लेकर पालिका पूरी तैैयारी कर चुकी है। इस बार जलभराव की समस्या से निपटने के लिए जहां दो शिफ्टों में नालों की सफाई कराई जा रही है, वहीं, पालिका के जेसीबी भी इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। यहां सर्वे कराया गया है। उत्तरी आवास विकास व पश्चिमी बैरिहवां के अलावा रौता चौराहा मार्ग व पचपेड़िया में कुछ दूरी तक नाला निर्माण अधूरा है, जिसे बरसात से पूर्व पूरा कराया जाएगा। सर्वे पूरा हो चुका है। प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
इनकी सुनिए
शहर के मालवीय रोड निवासी राम गोपाल कसौधन कहते हैं कि नाला सफाई से जलभराव की समस्या दूर नहीं हो सकती जब तक नालों को तय मानकों के अनुसार दुरुस्त नहीं कराया जाएगा तब तक यह समस्या बनी रहेगी।
पूर्व सभासद चंद्रपाल चौधरी कहते हैं कि पूर्व में इस मामले को बोर्ड की बैठक में कई बार उठाया गया, मगर जिम्मेदारों के कान पर जूं नहीं रेंगा। मंशा अच्छी होती तो निश्चित रूप से शहर को जलभराव से निजात मिल जाती।
जयपुरवा मोहल्ला निवासी कृष्णाकांत तिवारी कहते हैं कि जलभराव की समस्या से पूरा शहर परेशान है, मगर नगर पालिका के जिम्मेदारों को इससे कोई लेना देना नहीं है। पिछले सालों में समूचा शहर इस समस्या से जूझा है।
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मौसम विभाग तो 15 जून से बारिश की बात करता है, लेकिन बेमौसम बरसात का भरोसा नहीं। ऐसे में नगर पालिका शहरी क्षेत्र को जलभराव से बचाने के लिए हर साल नालों की सफाई करता है। इस बार भी यह हो रहा है, मगर बरसात में इस बार भी शहर में पानी का कर्फ्यू लगना तय है। जगह-जगह अधूूरे और कूड़ा-कचरा से भरे नाले बारिश में फिर उफनाएंगे और शहरियों को मुसीबत उठानी पड़ेगी।
शहर में कुल 37 किलोमीटर के 39 नाले हैं। जबकि 45 किलोमीटर नालियां बनाई गई हैं। इनकी सफाई को लेकर हर साल लाखों रुपये बहाए जाते हैं, मगर बरसात में इसका परिणाम शून्य होता है। क्योंकि समूचा शहर जलभराव की समस्या से जूझता है। सबसे ज्यादा बुरी स्थिति आवास विकास कालोनी, कोतवाली, मालवीय मार्ग पुरानी बस्ती क्षेत्र के दक्षिण दरवाजा की होती है। यहां गंदा पानी सड़कों पर बहनें लगता है और इसी के बीच से होकर लोग आते-जाते हैं। बरसात में यहां नगर पालिका की व्यवस्था ऊपर वाले के भरोसे हो जाती है।
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यूं हो रही सफाई
इस बार नाला सफाई का कार्य दस-दस लोगों की दो टीम कर रही है। इसके अलावा छोटे-बड़े जेसीबी भी इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। यहां बरसात को करीब मानकर पालिका प्रशासन दो शिफ्टों में सफाई कार्य करा रहा है। यह अलग बात है कि एक ओर सफाई हो रही है तो दूसरी ओर फिर से नालों में कूड़ा नजर आने लगता है। ऐसे में सफाई की कवायद केवल कागजी नजर आती है। विभागीय आंकड़ों की मानें तो इस साल अब तक 2.25 लाख रुपये सफाई व्यवस्था को चाक चौबंद करने के लिए खर्च किए जा चुके हैं।
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तीन वर्ष में खर्च हुआ साठ लाख
नगर पालिका परिषद के तत्कालीन व्यवस्था में तीन वर्ष में कागजों में साठ लाख रुपये नाला सफाई पर बहा दिया गया, मगर परिणाम शून्य रहा। तीनों वर्ष में यहां के नागरिकों ने मुसीबत झेली। कई घरों में बरसात का पानी घुस गया और लोग छत पर दिन गुजारते थे। वर्ष 2014-15 में नाला सफाई पर 24 लाख, वर्ष 2015-16 में 13.50 लाख तो वर्ष 16-17 में 22.50 लाख रुपये खर्च किए गए। बावजूद इसके हालात जस के तस हैं।
अब तक 2.25 लाख खर्च
नगर पालिका परिषद के नए सत्र में पालिका प्रशासन की निगरानी तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट चंद्रमोहन गर्ग व प्रभारी ईओ केके चौबे ने की। इस बार रणनीति बनाकर नाला सफाई का कार्य शुरू कराया गया। लखनऊ की बीस लोगों की टीम को सफाई कार्य सौंपा गया, मगर अब तक केवल 2.25 लाख रुपये व्यय हुए हैं। विभागीय अधिकारी तकरीबन करीब पांच लाख रुपये व्यय का अनुमान लगा रहे हैं।
बीस किलोमीटर नाला अधूरा
शहर में पानी निकास के लिए बनाए गए 37 किलोमीटर नाला कई स्थानों पर अधूरा है। इसका परिणाम नागरिक झेलते हैं। विभागीय सर्वे की मानें तो शहरी क्षेत्र में अब भी बीस किलोमीटर नाला निर्माण जरूरी है। हालांकि, अभी इस पर पालिका प्रशासन केवल सर्वे कराने की बात कह रहा है, मगर बरसात से पहले इसके निर्माण की उम्मीद भी जता रहा है।
इन मोहल्लों में जलभराव
शहर के आवास विकास कालोनी, मालवीय मार्ग के विभिन्न मोहल्ले, त्रिपाठी गली, धर्मशाला रोड, सुर्ती हट्टा, स्टेशन रोड, दक्षिण दरवाजा, चइयाबारी, पांडेय बाजार आदि मोहल्लों में बारिश के दिनों में जलभराव होता है। इसका कारण यहां नालों के निर्माण में मानकों को दर किनार किया गया है।
अधिशासी अधिकारी ने कहा
नगर पालिका परिषद के प्रभारी ईओ कमलेश कुमार चौबे कहते हैं कि पीछे क्या हुआ, इस बारे में वे कोई टिप्पणी नहीं करते, मगर अब बरसात को लेकर पालिका पूरी तैैयारी कर चुकी है। इस बार जलभराव की समस्या से निपटने के लिए जहां दो शिफ्टों में नालों की सफाई कराई जा रही है, वहीं, पालिका के जेसीबी भी इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। यहां सर्वे कराया गया है। उत्तरी आवास विकास व पश्चिमी बैरिहवां के अलावा रौता चौराहा मार्ग व पचपेड़िया में कुछ दूरी तक नाला निर्माण अधूरा है, जिसे बरसात से पूर्व पूरा कराया जाएगा। सर्वे पूरा हो चुका है। प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
इनकी सुनिए
शहर के मालवीय रोड निवासी राम गोपाल कसौधन कहते हैं कि नाला सफाई से जलभराव की समस्या दूर नहीं हो सकती जब तक नालों को तय मानकों के अनुसार दुरुस्त नहीं कराया जाएगा तब तक यह समस्या बनी रहेगी।
पूर्व सभासद चंद्रपाल चौधरी कहते हैं कि पूर्व में इस मामले को बोर्ड की बैठक में कई बार उठाया गया, मगर जिम्मेदारों के कान पर जूं नहीं रेंगा। मंशा अच्छी होती तो निश्चित रूप से शहर को जलभराव से निजात मिल जाती।
जयपुरवा मोहल्ला निवासी कृष्णाकांत तिवारी कहते हैं कि जलभराव की समस्या से पूरा शहर परेशान है, मगर नगर पालिका के जिम्मेदारों को इससे कोई लेना देना नहीं है। पिछले सालों में समूचा शहर इस समस्या से जूझा है।