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Basti News: गली के गुंडे बन गए कुत्ते...रातभर मचा रहे हुड़दंग

Wed, 19 Nov 2025 01:53 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 19 Nov 2025 01:53 AM IST
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Dogs have become street thugs...creating ruckus all night long
गली में घूम रहे कुत्ते।
बस्ती। कुत्ते गली के गुंडे बन गए हैं। दिनभर काटने के लिए दौड़ाते हैं और रातभर हुड़दंग मचाते हैं। ऐसे में लोगों की नींद टूट जा रही है। लोगों का कहना है कि एक बार नींद टूटने पर घंटों करवट बदलने के बाद आती है। दिन में कामकाज का दबाव और रात में नींद पूरी न होने से लोग चिड़चिड़ेपन के शिकार हो रहे हैं।
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कुत्तों का आतंक गली-मोहल्ले में तो है ही, साथ में जिन क्षेत्रों में मांस-मछली की बिक्री होती हैं, वहां के लोग खासे परेशान हैं। शहर के चिकवा टोला, कंपनी बाग, बीएसएनएल ऑफिस के पास, रोडवेज और मछली मंडी क्षेत्र में कुत्तों की भरमार है। इन इलाकों में कुत्तों की दिनभर धमा-चौकड़ी होती रहती है। लोगों का कहना है कि मांस-मछली के टुकड़ों के लालच में जुटने वाले कुत्ते भगाने से भी नहीं भागते हैं। यदि कोई लाठी-डंडे से भागने की कोशिश करता है तो उस पर हमला करने से भी नहीं चूकते हैं।
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रोडवेज के पास रहने वाले संजय कुमार का कहना है कि दिन में मुर्गे और बकरे की मीट की बिक्री होती है। शाम को इनकी दुकानें भी सजती हैं। ऐसे में मांस-मछली खाकर कुत्ते खूंखार हो गए हैं। भगाने पर ऐसे आंखें तरेर कर गुर्राने लगते हैं कि लगता है कि अभी नोच लेंगे। बच्चों के दुश्मन बन गए हैं। मोहल्ले में क्रिकेट खेलने के दौरान यदि गेंद कुत्तों के पास चल जाती है तो काटने के लिए दौड़ा लेते हैं।
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पिकौरा शिव गुलाम मोहल्ले के प्रभाकर मणि त्रिपाठी ने बताया कि उनके मोहल्ले में कुत्तों की भरमार हो गई है। अजनबियों पर ऐसे झपट्टा मारते हैं कि लगता है कि काट कर लहूलुहान कर देंगे। कुछ दिन पहले एक बच्चे को कुत्ते ने दौड़ा लिया था, मगर मोहल्लेवासियों की सतर्कता से बच गया। उन्होंने कहा कि नगर पालिका प्रशासन कुत्तों को पकड़वाने में नाकाम है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी अरुण कुमार गुप्ता का कहना है कि यह मौसम कुत्तों की ब्रीडिंग का है। ऐसे में कुत्ते खुद और बच्चों के असुरक्षित महसूस होते ही लोगों पर हमला बोल देते हैं। सतर्कता से कुत्तों से बचा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं पकड़े जा रहे कुत्ते

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को पकड़ कर संरक्षित करने का आदेश दे रखा है। इसके बावजूद यहां के अधिकारियों के कानों पर जू नहीं रेंग रही है। बस्ती में अब तक एनीमल बीलिंग सेंटर (एबीसी) की स्थापना ही नहीं हो पाई है। इतना ही नहीं, सरकारी कार्यालयों और नगर पालिका परिसर में भी आवारा कुत्ते घूमते देखे जा सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अपने कार्यालय परिसर को आवार कुत्तों से मुक्त न करा पाने वाले अफसर शहरवासियों की क्या सुरक्षा करेंगे।


कुत्तों को रखने की समस्या है। क्योंकि एनीमल बीलिंग सेंटर (एबीसी) की स्थापना नहीं हो पाई है। कुत्तों को रखने की व्यवस्था होते ही अभियान की शुरुआत की जाएगी।
-आनंद गुप्ता, ईओ, नगर पालिका बस्ती
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