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Basti News: डॉक्टरों-स्टाफ नर्स को दी गई हाई रिस्क प्रेग्नेंसी संबंधी टिप्स
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बस्ती। जनपद में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए उच्च जोखिम गर्भवती (एचआरपी) महिलाओं की नियमित जांच की जा रही है। ब्लॉक स्तरीय अस्पतालों में इनकी निगरानी की जा रही है। अब, 32 डॉक्टरों-स्टाफ नर्स को प्रशिक्षण दिया गया है, जो अपने स्वास्थ्य इकाइयों पर एचआरपी महिलाओं का सफल प्रसव कराएंगे।
सोमवार को एडी हेल्थ कार्यालय सभागार में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के ब्लॉक एवं नगरीय क्षेत्रों से आए 32 डॉक्टरों एवं स्टाफ नर्सों को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन आरसीएच के नोडल अधिकारी डॉ. बृजेश शुक्ल ने किया। अध्यक्षता सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने की। स्टेट स्तर के टीयूटी ट्रेनर डॉ. आशुतोष शर्मा कार्यक्रम में बताया गया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह की एक, नौ, 16 और 24 तारीख को उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच की जाती है।
इन महिलाओं की पहचान एएनएम द्वारा की जाती है, जिसके बाद ब्लॉक एवं जिला स्तरीय अस्पतालों पर उनकी जांच कराई जाती है। विशेषज्ञों ने बताया कि जिन गर्भवती महिलाओं में खून की कमी, उच्च रक्तचाप, दौरे की समस्या, मधुमेह, 145 सेंटीमीटर से कम कद, 35 किलोग्राम से कम वजन या 18 वर्ष से कम एवं 35 वर्ष से अधिक आयु जैसी जटिलताएं पाई जाती हैं, उन्हें उच्च जोखिम श्रेणी में रखा जाता है।
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गंभीर स्थिति होने पर ऐसी महिलाओं को तुरंत हायर सेंटर रेफर किया जाता है। एमओ और स्टाफ नर्स को भी इसी प्रक्रिया के तहत कार्य करने के लिए विशेष जानकारी दी गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च के प्रतिनिधि डॉ. अनुज पांडेय, टीयूटी प्रशिक्षक राज कुमार, डॉ. पूनम गंगवार, यूनीसेफ के मंडलीय कोआर्डिनेटर सुरेंद्र शुक्ल, डॉ. नीतेश कनेरिया, डीसीपीएम दुर्गेश मल्ल, अर्बन हेल्थ कोआर्डिनेटर सचिन चौरसिया ने भी सहयोग प्रदान किया।
सीएमओ ने बताया कि कुदरहा, सल्टौआ, हर्रैया और विक्रमजोत में मंगलवार से ट्रेनिंग लेने वाले डॉक्टर और स्टाफ नर्स एएनएम को इसी विषय पर ट्रेनिंग देंगे। इससे एचआरपी की संख्या कम होगी।
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सोमवार को एडी हेल्थ कार्यालय सभागार में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के ब्लॉक एवं नगरीय क्षेत्रों से आए 32 डॉक्टरों एवं स्टाफ नर्सों को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन आरसीएच के नोडल अधिकारी डॉ. बृजेश शुक्ल ने किया। अध्यक्षता सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने की। स्टेट स्तर के टीयूटी ट्रेनर डॉ. आशुतोष शर्मा कार्यक्रम में बताया गया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह की एक, नौ, 16 और 24 तारीख को उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच की जाती है।
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इन महिलाओं की पहचान एएनएम द्वारा की जाती है, जिसके बाद ब्लॉक एवं जिला स्तरीय अस्पतालों पर उनकी जांच कराई जाती है। विशेषज्ञों ने बताया कि जिन गर्भवती महिलाओं में खून की कमी, उच्च रक्तचाप, दौरे की समस्या, मधुमेह, 145 सेंटीमीटर से कम कद, 35 किलोग्राम से कम वजन या 18 वर्ष से कम एवं 35 वर्ष से अधिक आयु जैसी जटिलताएं पाई जाती हैं, उन्हें उच्च जोखिम श्रेणी में रखा जाता है।
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गंभीर स्थिति होने पर ऐसी महिलाओं को तुरंत हायर सेंटर रेफर किया जाता है। एमओ और स्टाफ नर्स को भी इसी प्रक्रिया के तहत कार्य करने के लिए विशेष जानकारी दी गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च के प्रतिनिधि डॉ. अनुज पांडेय, टीयूटी प्रशिक्षक राज कुमार, डॉ. पूनम गंगवार, यूनीसेफ के मंडलीय कोआर्डिनेटर सुरेंद्र शुक्ल, डॉ. नीतेश कनेरिया, डीसीपीएम दुर्गेश मल्ल, अर्बन हेल्थ कोआर्डिनेटर सचिन चौरसिया ने भी सहयोग प्रदान किया।
सीएमओ ने बताया कि कुदरहा, सल्टौआ, हर्रैया और विक्रमजोत में मंगलवार से ट्रेनिंग लेने वाले डॉक्टर और स्टाफ नर्स एएनएम को इसी विषय पर ट्रेनिंग देंगे। इससे एचआरपी की संख्या कम होगी।