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Basti News: बेझिझक बनाए परेशानी, होगा समस्या का समाधान
Fri, 27 Jun 2025 12:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 27 Jun 2025 12:13 AM IST
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बस्ती। यदि आप किसी सरकारी योजना के लाभार्थी है तो आपके मोबाइल पर कभी भी फोन आ सकता है। इससे आप घबराइए नहीं, बल्कि खुलकर अपनी परेशानी बताइए। पीएम आवास (ग्रामीण), स्वच्छता अभियान, जल जीवन मिशन, संस्थागत प्रसव समेत तमाम योजनाओं का फीडबैक के लिए सीडीओ सार्थक अग्रवाल ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर नई व्यवस्था विकसित की है।
उन्होंने विकास भवन में अपने कार्यालय के बगल कॉल सेंटर खुलवाया है। यहां से सीधे लाभार्थी, प्रधान, ग्राम सचिव, सहायक सचिव को सीधे फोन करके योजनावार फीड बैक लिया जा रहा है।
सीडीओ ने अपना वन-वे कॉल सेंटर रोजाना सक्रिय रखने के लिए विकास भवन के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। इसका नोडल अधिकारी एडीपीआरओ को बनाया गया है। यहां प्रतिदिन कॉल करने के बाद योजनावार प्राप्त फीड बैक ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है। इसकी मॉनीटरिंग सीडीओ खुद कर रहे हैं।
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लाभार्थी को कॉल करने के बाद पहले संबंधित कर्मचारी अपना पूरा परिचय दे रहे हैं। इसके बाद योजना के बाबत विस्तृत जानकारी ले रहे हैं। यह भी पूछा जा रहा है कि लाभार्थी बनने के लिए क्या कठिनाई हुई। आवास योजना, शौचालय, जननी सुरक्षा योजना में किसी कर्मचारी या अधिकारी की ओर से सुविधा शुल्क की मांग की गई या नहीं। या फिर कितना सुविधा शुल्क देना पड़ा।
कर्मचारी बातचीत के दौरान लाभार्थी को भरोसे में लेकर असलियत जानने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। फीडबैक के हिसाब से सीडीओ विभिन्न अधिकारियों से उसका मैनुअल सत्यापन भी करा रहे हैं।
संस्थागत प्रसव भी मिला कम : संस्थागत प्रसव के संबंध में 300 कॉल कराए जा चुके हैं। ढाई महीने में तीन प्रसव होने का फीडबैक मिला है। इसमें 10 प्रतिशत प्रसूताओं से सीधे कॉल करके बात की गई है।
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उन्होंने विकास भवन में अपने कार्यालय के बगल कॉल सेंटर खुलवाया है। यहां से सीधे लाभार्थी, प्रधान, ग्राम सचिव, सहायक सचिव को सीधे फोन करके योजनावार फीड बैक लिया जा रहा है।
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सीडीओ ने अपना वन-वे कॉल सेंटर रोजाना सक्रिय रखने के लिए विकास भवन के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। इसका नोडल अधिकारी एडीपीआरओ को बनाया गया है। यहां प्रतिदिन कॉल करने के बाद योजनावार प्राप्त फीड बैक ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है। इसकी मॉनीटरिंग सीडीओ खुद कर रहे हैं।
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लाभार्थी को कॉल करने के बाद पहले संबंधित कर्मचारी अपना पूरा परिचय दे रहे हैं। इसके बाद योजना के बाबत विस्तृत जानकारी ले रहे हैं। यह भी पूछा जा रहा है कि लाभार्थी बनने के लिए क्या कठिनाई हुई। आवास योजना, शौचालय, जननी सुरक्षा योजना में किसी कर्मचारी या अधिकारी की ओर से सुविधा शुल्क की मांग की गई या नहीं। या फिर कितना सुविधा शुल्क देना पड़ा।
कर्मचारी बातचीत के दौरान लाभार्थी को भरोसे में लेकर असलियत जानने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। फीडबैक के हिसाब से सीडीओ विभिन्न अधिकारियों से उसका मैनुअल सत्यापन भी करा रहे हैं।
संस्थागत प्रसव भी मिला कम : संस्थागत प्रसव के संबंध में 300 कॉल कराए जा चुके हैं। ढाई महीने में तीन प्रसव होने का फीडबैक मिला है। इसमें 10 प्रतिशत प्रसूताओं से सीधे कॉल करके बात की गई है।