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भ्रमण के दौरान डीएम को जलती मिली पराली
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भ्रमण के दौरान डीएम को जलती मिली पराली
- कृषि विभाग के अधिकारियों को कार्रवाई के दिए निर्देश
- कृषक से पराली न जलाने के लिए सुनिश्चित करें कंबाइन मालिक
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। खेत में पराली जलाने पर कड़ी कार्रवाई को डीएम सौम्या अग्रवाल ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है। मंगलवार को तहसील भानपुर में भ्रमण के दौरान उन्होंने तीन खेतों में एक साथ पराली जलते देखकर कहा कि यह कार्य दंडनीय अपराध है। पराली/फसल अवशेष नहीं जलाने से मृदा में कार्बनिक पदार्थों की वृद्धि होती है, लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ती है, मृदा में जल धारण क्षमता में वृद्धि होती है, दलहनी फसलों के अवशेष से मृदा में नत्रजन एवं अन्य पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है।
डीएम ने कहा है कि कंबाइन हार्वेस्टिंग मशीन फसलों की कटाई लगभग एक फीट छोड़कर किया जाता है, जिससे किसान अगली फसल की बुआई के लिए जलाते हैं, जबकि शासन के निर्देशानुसार जिले में कंबाइन हार्वेस्टिंग स्ट्रा रीपर विद बाइंडर अथवा स्ट्रा रीपर का प्रयोग अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही रीपर मशीन का प्रयोग न करने वाले कंबाइन मशीन मालिकों के विरुद्ध दायित्व भी निर्धारित किए जाने के निर्देश हैं। उन्होंने जिले के सभी कंबाइन मालिकों को सचेत किया है कि जिन कृषकों का धान की फसल उनके कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई की जाती है, उनसे यह सुनिश्चित कर लें कि कटाई के उपरांत फसल अवशेष नहीं जलाएंगे, यदि इसके बाद भी पराली संबंधित कृषक की ओर से जलाई जाती है, तो कृषक के साथ-साथ कंबाइन धारक का भी दायित्व निर्धारित करते हुए कंबाइन सीज/विधिक कार्रवाई होगी। बताया कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण नई दिल्ली की ओर से अवशेष जलाने पर खेत के क्षेत्रफल के अनुसार अर्थदंड दो एकड़ से कम क्षेत्रफल वाले कृषकों से 25 सौ, दो से पांच एकड़ वाले कृषकों से पांच हजार व पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले कृषकों से 15 हजार की क्षतिपूर्ति प्रति घटना की वसूली की जाएगी।
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- कृषि विभाग के अधिकारियों को कार्रवाई के दिए निर्देश
- कृषक से पराली न जलाने के लिए सुनिश्चित करें कंबाइन मालिक
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। खेत में पराली जलाने पर कड़ी कार्रवाई को डीएम सौम्या अग्रवाल ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है। मंगलवार को तहसील भानपुर में भ्रमण के दौरान उन्होंने तीन खेतों में एक साथ पराली जलते देखकर कहा कि यह कार्य दंडनीय अपराध है। पराली/फसल अवशेष नहीं जलाने से मृदा में कार्बनिक पदार्थों की वृद्धि होती है, लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ती है, मृदा में जल धारण क्षमता में वृद्धि होती है, दलहनी फसलों के अवशेष से मृदा में नत्रजन एवं अन्य पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है।
डीएम ने कहा है कि कंबाइन हार्वेस्टिंग मशीन फसलों की कटाई लगभग एक फीट छोड़कर किया जाता है, जिससे किसान अगली फसल की बुआई के लिए जलाते हैं, जबकि शासन के निर्देशानुसार जिले में कंबाइन हार्वेस्टिंग स्ट्रा रीपर विद बाइंडर अथवा स्ट्रा रीपर का प्रयोग अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही रीपर मशीन का प्रयोग न करने वाले कंबाइन मशीन मालिकों के विरुद्ध दायित्व भी निर्धारित किए जाने के निर्देश हैं। उन्होंने जिले के सभी कंबाइन मालिकों को सचेत किया है कि जिन कृषकों का धान की फसल उनके कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई की जाती है, उनसे यह सुनिश्चित कर लें कि कटाई के उपरांत फसल अवशेष नहीं जलाएंगे, यदि इसके बाद भी पराली संबंधित कृषक की ओर से जलाई जाती है, तो कृषक के साथ-साथ कंबाइन धारक का भी दायित्व निर्धारित करते हुए कंबाइन सीज/विधिक कार्रवाई होगी। बताया कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण नई दिल्ली की ओर से अवशेष जलाने पर खेत के क्षेत्रफल के अनुसार अर्थदंड दो एकड़ से कम क्षेत्रफल वाले कृषकों से 25 सौ, दो से पांच एकड़ वाले कृषकों से पांच हजार व पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले कृषकों से 15 हजार की क्षतिपूर्ति प्रति घटना की वसूली की जाएगी।
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