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Basti News: अब कुआनो उफनाई, सैकड़ों बीघा धान फसल डूबी, बढ़ी परेशानी
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सल्टौआ ब्लाक के अजगैवाजगंल मे कुवानो की बाढ से डूबी फसल
- फोटो : ARchive
बस्ती। सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे चला गया है लेकिन कटान जारी है। एक सप्ताह से कुदरहा, दुबौलिया, विक्रमजोत क्षेत्र में रोजाना उपजाऊ जमीन नदी में समा रही है। हालांकि, यह कटान अब रुक-रुक कर हो रही। सरयू की धारा मईपुर गांव से सटकर बह रही है। कुआनो के उफान से सैकड़ों बीघा धान फसल डूब गई है। मार्ग पर पानी भर जाने से आवागमन में भी परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि जलस्तर कम हुआ तो तो सरयू कटान कर रही है। यहां गन्ने की फसल लगे खेत नदी की जद में हैं। कई किसानों की जमीन और खड़ी फसल कटान से प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि जलस्तर घटने के बावजूद कटान नहीं रुक रही है, जिससे उनकी जमीन और फसल दोनों खतरे में हैं। धान फसल भी बर्बाद हो चुकी है। कुदरहा के मईपुर, महुआपार कला में संकट बरकरार है। विक्रमजोत के छह से अधिक गांवों के किसान नदी के सटे खेत की कटान से परेशान हैं। बीडी तटबंध के अंदर बसे शंभूपुर, पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, लकड़ी दूबे और अर्जुनपुर समेत कई गांवों के ग्रामीण कटान को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान ही नदी ने कई स्थानों पर कटान शुरू कर दिया था। अब पानी तेजी से घटने के साथ कटान बढ़ने की आशंका है। बाढ़ के कारण मवेशियों के चारे की समस्या भी बनी हुई है। ग्रामीणों को पशुओं के लिए चारा जुटाने के लिए काफी दूर तक भटकना पड़ रहा है।
सरयू खतरे के निशान से 68 सेमी नीचे
दुबौलिया। सरयू के जलस्तर घटने का सिलसिला लगातार जारी है। मैरुंड गांव सुविका बाबू के ग्रामीणों की दिनचर्या एक बार फिर पटरी पर लौटने लगी है। कटरिया-चांदपुर गांव के सामने बने ठोकर नंबर एक पर भी दबाव धीरे-धीरे कम होने लगा है। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार चार बजे जलस्तर 92.05 पर दर्ज किया गया जो कि लाल निशान 92.73 से 68, सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि, कहीं-कहीं रुक-रुक खेतों में कटान जारी है, जिससे किसान चिंतित हैं। लोग फॉगिंग और एंटीलार्वा के छिड़काव की मांग उठा रहे हैं। संवाद
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कोट:::
सरयू नदी के तटबंधों के संवेदनशील जगहों पर निगरानी की जा रही है। हालत अब सामान्य हो गए हैं। फिर भी टीम सतर्क है। -दिनेश कुमार, एक्सईएन बाढ़ खंड
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किसानों की जमा पूंजी डूबी
टिनिच। कुआनो नदी का जलस्तर बढ़ने से भानपुर तहसील क्षेत्र के कई गांवों में जलभराव की स्थिति बन गई है। नदी का पानी खेतों में पहुंचने से हजारों बीघा धान समेत गन्ना, तिल, उड़द, अरहर और सब्जियों की फसल डूब गई है। कई दिनों से खेतों में पानी भरा होने के कारण पककर तैयार धान की फसल के सड़ने-गलने की आशंका बढ़ गई है। फसल तैयार होने के समय जलभराव से किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। झलहनिया, मझौवा, बेतौहा, तिनहरी, भदना, बारहछत्तर, सुवरिहवा, चेतरा, बलुआ, संसारपुर, पकरी, चौरा, निद्धीपुर, खलवा बजहिया और अजगैवा जंगल समेत कई गांव प्रभावित हैं। किसानों का कहना है कि धान की फसल पूरी तरह तैयार थी, लेकिन अचानक बढ़े जलस्तर से खेतों में पानी भर गया। इससे उनकी महीनों की मेहनत और खेती में लगी पूंजी डूब गई। किसान कामता प्रसाद, रामनयन यादव और संजय ने बताया कि धान की फसल तैयार होने के बाद अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन जलभराव ने पूरी फसल बर्बाद कर दी। हरिराम उर्फ नोहर यादव ने बताया कि कुआनो नदी के किनारे बड़ी संख्या में किसान खेती करते हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से उनकी फसलें डूब गई हैं। प्रधान प्रतिनिधि चंद्रशेखर चौधरी और उमाशंकर यादव ने प्रशासन से तत्काल फसल क्षति का सर्वे कराकर नुकसान का आकलन कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। संवाद
कुआनो लील गई 25 बीघा धान की फसल
नगर बाजार। कुआनो नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्राम पंचायत नेउरीगाडा के कुसरौत, ककराई और मोहटा गांवों के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नदी का पानी खेतों में घुसने से करीब 25 बीघा धान की खड़ी फसल जलमग्न हो गई है। नदी का पानी बढ़ने से ग्रामीणों में भी चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि फसल काफी हद तक तैयार हो चुकी है। कई दिनों तक पानी में डूबे रहने से धान की बालियां खराब होने और पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा है। ग्रामीणों को आशंका है कि जलस्तर और बढ़ा तो खेतों के बाद आबादी की ओर भी पानी पहुंच सकता है।
फसल डूबने की सूचना पर लेखपाल भूपेंद्र कुमार दुबे नाव से मौके पर पहुंचे। उन्होंने कुआनो नदी पार कर जलमग्न खेतों का निरीक्षण किया और प्रभावित फसलों की क्षति का आकलन किया। ग्रामीणों ने प्रशासन से नुकसान का शीघ्र आकलन कर शासन को रिपोर्ट भेजने और प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत व मुआवजा दिलाने की मांग की। ग्रामीणों ने भागीरथ, रामनरेश, मुनीलाला, रामजनक, भवचंद, संजय, संतोषी, ईश्वरचंद, रामअतुल, धर्मनाथ, रामपट, घनश्याम, अशोक, राममिलन, रामप्रसाद, रामअनुज, रामलोट, रामटहल, परदेसी, दिलीप, रामनारायण, हरिप्रसाद, हरिद्वार ने धान फसल डूबने से नुकसान होगा।
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ग्रामीणों ने बताया कि जलस्तर कम हुआ तो तो सरयू कटान कर रही है। यहां गन्ने की फसल लगे खेत नदी की जद में हैं। कई किसानों की जमीन और खड़ी फसल कटान से प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि जलस्तर घटने के बावजूद कटान नहीं रुक रही है, जिससे उनकी जमीन और फसल दोनों खतरे में हैं। धान फसल भी बर्बाद हो चुकी है। कुदरहा के मईपुर, महुआपार कला में संकट बरकरार है। विक्रमजोत के छह से अधिक गांवों के किसान नदी के सटे खेत की कटान से परेशान हैं। बीडी तटबंध के अंदर बसे शंभूपुर, पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, लकड़ी दूबे और अर्जुनपुर समेत कई गांवों के ग्रामीण कटान को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान ही नदी ने कई स्थानों पर कटान शुरू कर दिया था। अब पानी तेजी से घटने के साथ कटान बढ़ने की आशंका है। बाढ़ के कारण मवेशियों के चारे की समस्या भी बनी हुई है। ग्रामीणों को पशुओं के लिए चारा जुटाने के लिए काफी दूर तक भटकना पड़ रहा है।
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सरयू खतरे के निशान से 68 सेमी नीचे
दुबौलिया। सरयू के जलस्तर घटने का सिलसिला लगातार जारी है। मैरुंड गांव सुविका बाबू के ग्रामीणों की दिनचर्या एक बार फिर पटरी पर लौटने लगी है। कटरिया-चांदपुर गांव के सामने बने ठोकर नंबर एक पर भी दबाव धीरे-धीरे कम होने लगा है। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार चार बजे जलस्तर 92.05 पर दर्ज किया गया जो कि लाल निशान 92.73 से 68, सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि, कहीं-कहीं रुक-रुक खेतों में कटान जारी है, जिससे किसान चिंतित हैं। लोग फॉगिंग और एंटीलार्वा के छिड़काव की मांग उठा रहे हैं। संवाद
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सरयू नदी के तटबंधों के संवेदनशील जगहों पर निगरानी की जा रही है। हालत अब सामान्य हो गए हैं। फिर भी टीम सतर्क है। -दिनेश कुमार, एक्सईएन बाढ़ खंड
किसानों की जमा पूंजी डूबी
टिनिच। कुआनो नदी का जलस्तर बढ़ने से भानपुर तहसील क्षेत्र के कई गांवों में जलभराव की स्थिति बन गई है। नदी का पानी खेतों में पहुंचने से हजारों बीघा धान समेत गन्ना, तिल, उड़द, अरहर और सब्जियों की फसल डूब गई है। कई दिनों से खेतों में पानी भरा होने के कारण पककर तैयार धान की फसल के सड़ने-गलने की आशंका बढ़ गई है। फसल तैयार होने के समय जलभराव से किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। झलहनिया, मझौवा, बेतौहा, तिनहरी, भदना, बारहछत्तर, सुवरिहवा, चेतरा, बलुआ, संसारपुर, पकरी, चौरा, निद्धीपुर, खलवा बजहिया और अजगैवा जंगल समेत कई गांव प्रभावित हैं। किसानों का कहना है कि धान की फसल पूरी तरह तैयार थी, लेकिन अचानक बढ़े जलस्तर से खेतों में पानी भर गया। इससे उनकी महीनों की मेहनत और खेती में लगी पूंजी डूब गई। किसान कामता प्रसाद, रामनयन यादव और संजय ने बताया कि धान की फसल तैयार होने के बाद अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन जलभराव ने पूरी फसल बर्बाद कर दी। हरिराम उर्फ नोहर यादव ने बताया कि कुआनो नदी के किनारे बड़ी संख्या में किसान खेती करते हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से उनकी फसलें डूब गई हैं। प्रधान प्रतिनिधि चंद्रशेखर चौधरी और उमाशंकर यादव ने प्रशासन से तत्काल फसल क्षति का सर्वे कराकर नुकसान का आकलन कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। संवाद
कुआनो लील गई 25 बीघा धान की फसल
नगर बाजार। कुआनो नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्राम पंचायत नेउरीगाडा के कुसरौत, ककराई और मोहटा गांवों के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नदी का पानी खेतों में घुसने से करीब 25 बीघा धान की खड़ी फसल जलमग्न हो गई है। नदी का पानी बढ़ने से ग्रामीणों में भी चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि फसल काफी हद तक तैयार हो चुकी है। कई दिनों तक पानी में डूबे रहने से धान की बालियां खराब होने और पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा है। ग्रामीणों को आशंका है कि जलस्तर और बढ़ा तो खेतों के बाद आबादी की ओर भी पानी पहुंच सकता है।
फसल डूबने की सूचना पर लेखपाल भूपेंद्र कुमार दुबे नाव से मौके पर पहुंचे। उन्होंने कुआनो नदी पार कर जलमग्न खेतों का निरीक्षण किया और प्रभावित फसलों की क्षति का आकलन किया। ग्रामीणों ने प्रशासन से नुकसान का शीघ्र आकलन कर शासन को रिपोर्ट भेजने और प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत व मुआवजा दिलाने की मांग की। ग्रामीणों ने भागीरथ, रामनरेश, मुनीलाला, रामजनक, भवचंद, संजय, संतोषी, ईश्वरचंद, रामअतुल, धर्मनाथ, रामपट, घनश्याम, अशोक, राममिलन, रामप्रसाद, रामअनुज, रामलोट, रामटहल, परदेसी, दिलीप, रामनारायण, हरिप्रसाद, हरिद्वार ने धान फसल डूबने से नुकसान होगा।

सल्टौआ ब्लाक के अजगैवाजगंल मे कुवानो की बाढ से डूबी फसल- फोटो : ARchive