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Basti News: खतौनी जारी करने में नकद का वारा-न्यारा

Sat, 10 Feb 2024 02:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sat, 10 Feb 2024 02:46 AM IST
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Distinction of cash in issuing Khatauni
सदर तहसील में खतौनी लेने के लिए लगी लाइन।
तहसील सदर में एकल खिड़की से जारी हो रही सत्यापित खतौनी, शुल्क का हिसाब नहीं
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15 रुपये की जगह 20 देना अनिवार्य, फुटकर नहीं तो काश्तकारों से पचास रुपये भी कर ले रहे जमा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सदर तहसील..। खिड़की सरकारी है। मगर वसूली अवैध है। सत्यापित खतौनी निर्गत करने के लिए 15 की जगह 20 लिया जा रहा है। इतना भी हो तो गनीमत घंटों लाइन में लगने के बाद बारी आने पर यदि फुटकर नहीं है तो बहाना बनाकर एक खतौनी का 50 रुपये जमा कर लिया जा रहा है। एतराज करने पर फुटकर रुपये लाने के लिए बाहर भेज दिया जा रहा है। फिर आने पर दोबारा लाइन लगानी पड़ रही है। इस जहमत से अच्छा खिड़की के अंदर बैठे लोगों की शर्त मानना ज्यादा ठीक है। भले ही रुपये ज्यादा लग जा रहे हैं।
यह कलई शुक्रवार को सदर तहसील में कलवारी से खतौनी निकालने आए राम स्वरूप ने खोली। उन्हीं की तरह बनकटी के राम प्रगट, मुंडेरवा के हरिप्रसाद आदि ने भी तहसील की खिड़की पर खतौनी निर्गत करने के लिए अधिक रूपये लिए जाने की खुली चर्चा की। इनका कहना था कि यह सब खेल जिम्मेदारों की मिलीभगत से हो रहा है। इसी भवन में अफसर भी बैठते हैं। बावजूद इसके खतौनी निर्गत करने में निर्धारित शुल्क 15 की जगह 20 रुपये खुलेआम वसूला जा रहा है। फुटकर न होने पर और अधिक रुपये ले लिया जा रहा है। इसकी कोई रसीद भी नहीं कट रही है। रुपये लेने के बाद केवल खतौनी ही दी जा रही है। एतराज करने पर बैरंग लौटा दिया जा रहा है। अधिक रुपये देकर सत्यापित खतौनी लेने की काश्तकारों की विवशता बन गई है।
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प्रतिदिन निर्गत हो रही 300 से 400 खतौनी
सदर तहसील में प्रतिदिन 300 से 400 खतौनी व्यवहारिक रूप से निर्गत की जा रही है। दिन भर में दो सौ से अधिक नागरिक यहां लाइन लगाते हैं। मगर तहसील प्रशासन की तरफ से जनसुविधा के दृष्टिगत खतौनी काउंटर नहीं बढ़ाए जा रहे हैं। केवल एकल खिड़की से ही खतौनी जारी की जा रही है। अंदर दो कर्मचारी ही बैठ रहे हैं। एक कर्मचारी द्वारा खतौनी निकालकर पैसा जमा किया जा रहा और दूसरा मुहर लगाकर सत्यापित करता है।
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अक्सर 12 बजे खुलती है खिड़की
काश्तकार पंकज कुमार, आशीष शुक्ल, जगदंबा प्रसाद, हीरा आदि ने बताया कि यहां खतौनी खिड़की अक्सर दिन में 12 बजे खुलती है। कंप्यूटर पर बैठने वाले कर्मचारी इससे पहले नहीं आते हैं। आधा दिन बीतने के बाद जब खिड़की खुलती है तो पहले अपने सेटिंग की खतौनी निर्गत की जाती है। इसमें आधा से एक घंटे लगते हैं। इसके बाद आम काश्तकारों को खतौनी दिए जाने की बारी आती है।
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लेनदेन के समय अक्सर हो रहा विवाद
शुक्रवार को खतौनी निकालने आए नगर बाजार के युवक राजन से खिड़की के अंदर बैठे कर्मचारियों से लेनदेन के लिए बहस होने लगी। युवक ने 100 की नोट देकर खतौनी लिया। इसके साथ महज 50 रुपये वापस किया गया। इस पर युवक भड़क गया और निर्धारित शुल्क 15 रुपये लेने की बात कही। अंदर से उससे खतौनी वापस कर फुटकर लाने को कहा गया। लगभग आधे घंटे तक कहासुनी होती रही। बाद में युवक का पैसा वापस हुआ।
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हिसाब- किताब का कोई रजिस्टर नहीं
खतौनी निर्गत करने के लिए कर्मचारियों के पास हिसाब- किताब का कोई रजिस्टर मौके पर उपलब्ध नहीं दिखा। पूछने पर बताया गया कि शाम को खिड़की बंद करने के बाद प्राप्त रुपये जमा कराए जाते हैं। काश्तकारों के अनुसार सरकारी फीस का पारदर्शी ढंग से हिसाब होना चाहिए। हमें उसकी रसीद मिलनी चाहिए।रसीद की व्यवस्था न होने की आड़ में कमाई की जा रही है।
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दिन में तीन बजे तक बंद रहती है अभिलेखागार की खिड़की
जिला अभिलेखागार की खिड़की भी दिन में तीन बजे तक बंद रह रही है। यह खिड़की केवल सवा घंटे के लिए 3 से 4.15 बजे तक खुल रही है। ऐसे में राजस्व के पुराने अभिलेख की नकल के लिए वादकारियों, अधिवक्ताओं और फरियादियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। यहां भी अभिलेखों की सत्यापित नकल के लिए निर्धारित शुल्क से अधिक रुपये लिए जाने की शिकायत आम है।

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खतौनी काउंटर समय से खोलने के निर्देश दिए हैं। वहां निर्धारित शुल्क भी चस्पा करने की सख्त हिदायत है। अधिक वसूली किए जाने की कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। फिर भी इसकी जॉच कराई जाएगी।
गुलाब चंद्र, एसडीएम सदर।
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