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भगवान के साथ सच्ची प्रीत से ही ज्ञान प्रकट होता है: आचार्य शत्रुघ्न
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती । सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में अनेक बाल लीलाएं कीं। जो वात्सल्य भाव के उपासकों के चित्त को अनायास ही आकर्षित करती हैं। जो भक्तों के पापों का हरण कर लेते हैं, वही हरि हैं। भगवान के प्रति सच्ची प्रीत से ही ज्ञान प्रकट होता है।
यह उद्गार कथा व्यास शत्रुध्न शुक्ल ने व्यक्त किया। वह सोमवार को इंद्र अवध सदन भूअर निरंजन पुर में श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन कर रहे थे। श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का हुआ। भागवत कथा के व्यास पीठ पर कथावाचक आचार्य शत्रुघ्न ने पंच अध्याय का वर्णन किया। कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत, भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है। वह भव पार हो जाता है। उसे वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती हैं।
कथा व्यास ने भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, उद्धव-गोपी संवाद, द्वारका की स्थापना, रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया। कहा कि आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति आवश्यक हैं। भगवत प्राप्ति के लिए निश्चय और परिश्रम भी जरूरी है। कथा मंडप में मुख्य यजमान इन्द्रावती, शैलेश उपाध्याय, डॉ. सौम्या, डॉ. अरुण उपाध्याय के साथ इस मौके पर पूर्व मुख्य अभियंता राजीव लोचन मिश्र, डॉ. आरती मिश्रा, आरपी पाठक, प्रवक्ता राइका नैनीताल अजय कुमार चौबे,रामकृष्ण पांडेय, हनुमान पाण्डेय आदि मौजूद रहे।
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बस्ती । सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में अनेक बाल लीलाएं कीं। जो वात्सल्य भाव के उपासकों के चित्त को अनायास ही आकर्षित करती हैं। जो भक्तों के पापों का हरण कर लेते हैं, वही हरि हैं। भगवान के प्रति सच्ची प्रीत से ही ज्ञान प्रकट होता है।
यह उद्गार कथा व्यास शत्रुध्न शुक्ल ने व्यक्त किया। वह सोमवार को इंद्र अवध सदन भूअर निरंजन पुर में श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन कर रहे थे। श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का हुआ। भागवत कथा के व्यास पीठ पर कथावाचक आचार्य शत्रुघ्न ने पंच अध्याय का वर्णन किया। कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत, भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है। वह भव पार हो जाता है। उसे वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती हैं।
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कथा व्यास ने भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, उद्धव-गोपी संवाद, द्वारका की स्थापना, रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया। कहा कि आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति आवश्यक हैं। भगवत प्राप्ति के लिए निश्चय और परिश्रम भी जरूरी है। कथा मंडप में मुख्य यजमान इन्द्रावती, शैलेश उपाध्याय, डॉ. सौम्या, डॉ. अरुण उपाध्याय के साथ इस मौके पर पूर्व मुख्य अभियंता राजीव लोचन मिश्र, डॉ. आरती मिश्रा, आरपी पाठक, प्रवक्ता राइका नैनीताल अजय कुमार चौबे,रामकृष्ण पांडेय, हनुमान पाण्डेय आदि मौजूद रहे।
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