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काम अधूरा फिर भी 48 लाख भुगतान
basti
Updated Sun, 06 May 2018 11:36 PM IST
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लाजो के घर पसरा सन्नाटा।
- फोटो : amar ujala
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शहर के एकमात्र कटेश्वर पार्क की स्थिति करीब छह माह से जीर्ण-शीर्ण हो गई है। करोड़ों रुपये खर्च के बाद व्यवस्थित पार्क को अमृत योजना में शामिल कर अत्याधुनिक बनाने की पहल को ग्रहण लग गया है।
जिस कंपनी से पार्क के निर्माण का अनुबंध हुआ वह आधा कार्य कराने के बाद 48 लाख रुपये का भुगतान लेकर गायब है। पार्क में सीमेंटेड पिलर बना है जिसका सरिया बाहर तक निकला है। इसी खतरे के बीच बच्चे खेलते हैं। इन स्थितियों को संज्ञान में लेकर हालांकि नगर पालिका ने संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी किया है, मगर अनुबंधित ठेकेदार चुप्पी साधे हुए हैं।
अमृत योजना में शहर के पार्कों का सुंदरीकरण कराने का प्रस्ताव हुआ। शासन ने इस पर तीन करोड़ रुपये खर्च करने की स्वीकृति दी और धन भी अवमुक्त हो गया। कार्य के लिए एक कंस्ट्रक्शन कंपनी से अनुबंध हुआ। इसके बाद कार्य भी शुरू हो गया। पार्क को अत्याधुनिक बनाने की कवायद के तहत इसे खोदा गया और फिर यहां पिलर बना दिए गए। चूंकि यहां ट्वाय ट्रेन, नौका विहार, फाउंटेन फौव्वारा के अलावा मछली तालाब व अन्य कार्य होने हैं, इसलिए अनुबंधित कंपनी ने यहां गड्ढा बनाया और पिलर में नोकदार सरिया डाल दिया। पार्क पूरी तरह अव्यवस्थित हो गया। इसी बीच ठेका कंपनी ने धीरे-धीरे कर 48 लाख रुपये का भुगतान पालिका से ले लिया। करीब दो माह तक कार्य करने के बाद अनुबंधित कंपनी नदारद हो गई। कार्य बंद होने के बाद भी पार्क संचालित हो रहा है और इसमें बच्चे खेलते हैं, मगर यहां गड्ढा और खतरनाक सरिया कभी भी उनके लिए खतरा बन सकता है। जिम्मेदार अनुबंधित कंपनी से कार्य पूरा करने के लिए दबाव बना रहे हैं, मगर कंपनी उनकी सुनने को तैयार नहीं है। पार्क की हालत को देखते हुए प्रभारी ईओ केके चौबे ने संबंधित कंपनी को नोटिस जारी कर दिया है।
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कहीं आगणन बढ़ाने का खेल तो नहीं
कटेश्वर पार्क के अत्याधुनिकीकरण के लिए यूं तो तीन करोड़ रुपये शासन ने अवमुक्त किए हैं, मगर समय के साथ सामान की कीमत बढ़ने की आड़ लेकर नए सिरे से आगणन का खेल को अंजाम दिए जाने की चर्चा है। हालांकि, अधिकारी इससे इंकार करते हैं। कहते हैं कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद नए सिरे से कार्य की स्वीकृति के लिए शासन को फाइल भेजी गई है, मगर इसमें धन बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
ईओ बोले
नगर पालिका परिषद के प्रभारी अधिशासी अधिकारी केके चौबे ने कहा कि जो प्रस्ताव है उस पर शासन ने मुहर लगा दी है। इस कार्य में अब कोई नया प्रस्ताव नहीं भेजा जा सकता। केवल निर्माण कार्य की सहमति के लिए शासन को फाइल भेजी गई है। यह सही है कि कार्य के एवज में अनुबंधित ठेकेदार कंपनी को 48 लाख का भुगतान किया जा चुका है, कार्य बाधित है। इसके लिए नोटिस दिया गया है। कार्य की समय सीमा अभी शासन ने तय नहीं की है।
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शहर के एकमात्र कटेश्वर पार्क की स्थिति करीब छह माह से जीर्ण-शीर्ण हो गई है। करोड़ों रुपये खर्च के बाद व्यवस्थित पार्क को अमृत योजना में शामिल कर अत्याधुनिक बनाने की पहल को ग्रहण लग गया है।
जिस कंपनी से पार्क के निर्माण का अनुबंध हुआ वह आधा कार्य कराने के बाद 48 लाख रुपये का भुगतान लेकर गायब है। पार्क में सीमेंटेड पिलर बना है जिसका सरिया बाहर तक निकला है। इसी खतरे के बीच बच्चे खेलते हैं। इन स्थितियों को संज्ञान में लेकर हालांकि नगर पालिका ने संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी किया है, मगर अनुबंधित ठेकेदार चुप्पी साधे हुए हैं।
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अमृत योजना में शहर के पार्कों का सुंदरीकरण कराने का प्रस्ताव हुआ। शासन ने इस पर तीन करोड़ रुपये खर्च करने की स्वीकृति दी और धन भी अवमुक्त हो गया। कार्य के लिए एक कंस्ट्रक्शन कंपनी से अनुबंध हुआ। इसके बाद कार्य भी शुरू हो गया। पार्क को अत्याधुनिक बनाने की कवायद के तहत इसे खोदा गया और फिर यहां पिलर बना दिए गए। चूंकि यहां ट्वाय ट्रेन, नौका विहार, फाउंटेन फौव्वारा के अलावा मछली तालाब व अन्य कार्य होने हैं, इसलिए अनुबंधित कंपनी ने यहां गड्ढा बनाया और पिलर में नोकदार सरिया डाल दिया। पार्क पूरी तरह अव्यवस्थित हो गया। इसी बीच ठेका कंपनी ने धीरे-धीरे कर 48 लाख रुपये का भुगतान पालिका से ले लिया। करीब दो माह तक कार्य करने के बाद अनुबंधित कंपनी नदारद हो गई। कार्य बंद होने के बाद भी पार्क संचालित हो रहा है और इसमें बच्चे खेलते हैं, मगर यहां गड्ढा और खतरनाक सरिया कभी भी उनके लिए खतरा बन सकता है। जिम्मेदार अनुबंधित कंपनी से कार्य पूरा करने के लिए दबाव बना रहे हैं, मगर कंपनी उनकी सुनने को तैयार नहीं है। पार्क की हालत को देखते हुए प्रभारी ईओ केके चौबे ने संबंधित कंपनी को नोटिस जारी कर दिया है।
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कहीं आगणन बढ़ाने का खेल तो नहीं
कटेश्वर पार्क के अत्याधुनिकीकरण के लिए यूं तो तीन करोड़ रुपये शासन ने अवमुक्त किए हैं, मगर समय के साथ सामान की कीमत बढ़ने की आड़ लेकर नए सिरे से आगणन का खेल को अंजाम दिए जाने की चर्चा है। हालांकि, अधिकारी इससे इंकार करते हैं। कहते हैं कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद नए सिरे से कार्य की स्वीकृति के लिए शासन को फाइल भेजी गई है, मगर इसमें धन बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
ईओ बोले
नगर पालिका परिषद के प्रभारी अधिशासी अधिकारी केके चौबे ने कहा कि जो प्रस्ताव है उस पर शासन ने मुहर लगा दी है। इस कार्य में अब कोई नया प्रस्ताव नहीं भेजा जा सकता। केवल निर्माण कार्य की सहमति के लिए शासन को फाइल भेजी गई है। यह सही है कि कार्य के एवज में अनुबंधित ठेकेदार कंपनी को 48 लाख का भुगतान किया जा चुका है, कार्य बाधित है। इसके लिए नोटिस दिया गया है। कार्य की समय सीमा अभी शासन ने तय नहीं की है।