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उत्पीड़न के विरोध में मिलकर्मी एकजुट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 May 2016 12:13 AM IST
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डीएम कार्यालय पर शुगर मिल कर्मचारी संघ ने दिया धरना।
- फोटो : रमेश मिश्र
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बस्ती। लंबे समय से बस्ती चीनी मिल गेट पर धरना दे रहे मजदूर मंगलवार को डीएम कार्यालय परिसर पहुंचे। कार्यालय परिसर में धरने में इंटक अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने प्रदेश की सपा सरकार और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। दोनों सरकारों पर छलावा करने का आरोप लगाया।
बस्ती चीनी मिल गेट पर 976 दिन से मिल मजदूर विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलित हैं। इंटक अध्यक्ष ने कहा कि वैधानिक देयकों, वेतन व रिटेनिंग भत्ता को लेकर मजबूरन धरना दिया जा रहा है। अध्यक्षता कर रहे आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राज्य प्रवक्ता श्याम मनोहर जायसवाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें खोखले नारे पर चल रही हैं। अध्यक्ष ने कहा कि मेक इन इंडिया का नारा फेल हो चुुका है। पूर्वांचल की चीनी मिलें बंद हो रही हैं।
नौजवान पलायन को मजबूर है। मिल मालिकों को गन्ना विकास और मेंटेनेंस के नाम पर भारी भरकम पैकेज दिए जाते हैं। फिर भी घाटे के नाम पर किसानों का भुगतान रोक कर मिल बंद कर दी जाती है। यहां किसानों की जायज मांगों पर गोलियां चलाई जाती हैं। इसका उदाहरण मुंडेरवा, रामकोला है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार के संरक्षण में पिछले 25 साल से उद्योगों की बंदी जारी है। मिल प्रबंधतंत्र लगातार शोषण और उत्पीड़न कर रहा है लेकिन मजदूरों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सभा को परमात्मा श्रीवास्तव, तिलक प्रसाद चौधरी, कृष्ण कुमार मिश्रा आदि ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर तुलसी राम, गजराज, राम नरेश, राम भुआल, बच्चन, राजेंद्र, अरबिंद नाथ मिश्रा, राजनाथ, सुखराम, रामदास, माया राम, अमरनाथ, तूफानी, रामभगन आदि शामिल रहे।
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बस्ती चीनी मिल गेट पर 976 दिन से मिल मजदूर विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलित हैं। इंटक अध्यक्ष ने कहा कि वैधानिक देयकों, वेतन व रिटेनिंग भत्ता को लेकर मजबूरन धरना दिया जा रहा है। अध्यक्षता कर रहे आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राज्य प्रवक्ता श्याम मनोहर जायसवाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें खोखले नारे पर चल रही हैं। अध्यक्ष ने कहा कि मेक इन इंडिया का नारा फेल हो चुुका है। पूर्वांचल की चीनी मिलें बंद हो रही हैं।
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नौजवान पलायन को मजबूर है। मिल मालिकों को गन्ना विकास और मेंटेनेंस के नाम पर भारी भरकम पैकेज दिए जाते हैं। फिर भी घाटे के नाम पर किसानों का भुगतान रोक कर मिल बंद कर दी जाती है। यहां किसानों की जायज मांगों पर गोलियां चलाई जाती हैं। इसका उदाहरण मुंडेरवा, रामकोला है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार के संरक्षण में पिछले 25 साल से उद्योगों की बंदी जारी है। मिल प्रबंधतंत्र लगातार शोषण और उत्पीड़न कर रहा है लेकिन मजदूरों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सभा को परमात्मा श्रीवास्तव, तिलक प्रसाद चौधरी, कृष्ण कुमार मिश्रा आदि ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर तुलसी राम, गजराज, राम नरेश, राम भुआल, बच्चन, राजेंद्र, अरबिंद नाथ मिश्रा, राजनाथ, सुखराम, रामदास, माया राम, अमरनाथ, तूफानी, रामभगन आदि शामिल रहे।
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