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यूपी मेडिकल फैकल्टी के निशाने पर दो पैरा मेडिकल कॉलेज

Thu, 11 Apr 2019 11:23 PM IST
basti Published by: राकेश पांडेय Updated Thu, 11 Apr 2019 11:23 PM IST
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two para medical colleges are suspicious
medicine
बस्ती। जिले में फर्जी पैरा मेडिकल कॉलेज का खुलासा होने के बाद यूपी मेडिकल फैकल्टी लखनऊ अब सतर्क हो गया है। जिले के दो पैरा मेडिकल कॅालेज उसके निशाने पर हैं। इनके संसाधनों की जांच के निर्देश लखनऊ ने सीएमओ को दिए हैं। सीएमओ ने जांच की जिम्मेदारी एसीएमओ डॉ. सीएल कन्नौजिया को दी है। 
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पैरा मेडिकल कॉलेज का फर्जीवाड़ा जिला मुख्यालय पर हुुआ। इस कॉलेज में प्रवेश लिए दर्जनों छात्रों का भविष्य अधर में है। दोबारा ऐसा न हो इस पर यूपी मेडिकल फैकल्टी निगाह रखे हुए है। इसके तहत जिले के ब्रह्मदत्त द्विवेदी पैरा मेडिकल साइंसेज एंड नर्सिंग छावनी व एसआर मेडिकल इंस्टीट्यूट दसिया के जांच के निर्देश दिए गए है। यहां स्वास्थ्य विभाग उक्त कॉलेजों के पंजीकरण, अस्पताल की बेड संख्या, ओपीडी व आईपीडी के अलावा संसाधनों की जांच करेगी। लखनऊ के इस निर्देश पर जांच शुरू हो गई है। एसीएमओ डॉ. सीएल कन्नौजिया ने बताया कि यूपी मेडिकल फैकल्टी लखनऊ ने उक्त पैरा मेडिकल कॉलेजों के जांच के निर्देश दिए हैं। सीएमओ की ओर से मिले निर्देश पर इनकी जांच की जाएगी। क्योंकि अपने जिले में पैरा मेडिकल कॉलेज के फर्जीवाड़ा का खुलासा पिछले दिनों हुआ था। इसे लेकर तंत्र सतर्कता बरत रहा है। क्योंकि फर्जीवाड़ा होने के बाद इसमें पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य पर संकट खड़ा हो जाता है। ऐसा दोबारा न होने पाए इसके लिए जांच की जा रही है। अभी प्रथम चरण की जांच शुरू हुई है।
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आंख अस्पताल के लाइसेंस निलंबन की संस्तुति
बस्ती। जन आरोग्य योजना में संचालित आयुष्मान भारत में चयनित शहर के संतकबीर नगर आंख अस्पताल के लाइसेंस निलंबन की संस्तुति एसीएमओ डॉ. सीएल कन्नौजिया ने जांच के बाद कर दी है। इससे पहले अस्पताल की जांच आयुष्मान भारत का संचालन करने वाली लखनऊ की संस्था सांची ने की।
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जांच में टीम ने अस्पताल की ओपीडी, आईपीडी व चिकित्सीय संसाधनों का निरीक्षण किया। यहां जांच में अस्पताल का वार्ड ऑपरेशन थियेटर से दूरी पर पाया गया। मौके पर उसे एक भी मरीज नहीं मिले। यही नहीं अस्पताल के बिजली पानी की वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं मिली। इसके अलावा हर दिन 15 ऑपरेशन होने के बाद भी वार्ड में एक भी मरीज नहीं पाया गया। हालांकि, 30 बेड का अस्पताल मिला जरूर। इसके अलावा जांच में यह बात भी सामने आई कि वार्ड में जिस डॉक्टर की तैनाती है, वह महज एमबीबीएस हैं। जबकि आई सर्जन ऑपरेशन कर चले जाते हैं। यहां तमाम खामियां पाने के बाद लखनऊ की जांच टीम ने सीएमओ को जांच करने के निर्देश दिए। सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा के निर्देश पर एसीएमओ डॉ. सीएल कन्नौजिया ने आंख अस्पताल की जांच की और लखनऊ टीम के निरीक्षण में पाई गई खामियों पर नजर घुमाई। एसीएमओ डॉ. कन्नौजिया ने कहा कि जांच में जो खामियां पाई गईं थीं वे सही हैं। ऐसे में अस्पताल के लाइसेंस को तब तक के लिए निलंबित कर दिया गया है, जब तक कि उन खामियों को अस्पताल संचालक दूर नहीं कर लेते। अस्पताल के संचालक निर्मल सिंह ने कहा कि जांच में टीम को क्या मिला, यह तो मैं नहीं बता सकता, मगर उनके मानक के अनुसार वार्ड को यहां स्थानांतरित कराने की व्यवस्था बनाई गई है। रही डॉक्टर की बात तो वार्ड में 24 घंटे की तैनाती है। नेत्र विशेषज्ञ चिकित्सक व सर्जन भी उपलब्ध हैं। वार्ड में पानी, बिजली की भी वैकल्पिक व्यवस्था है।
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