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हत्या में पति को आजीवन कारावास
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Nov 2017 11:26 PM IST
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बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय अजय कुमार शाही ने पत्नी की दहेज हत्या को हत्या मानते हुए पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को 12 हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करना होगा। इसे अदा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी जय गोविंद सिंह ने घटना का विवरण कोर्ट में रखा। कहा कि सिद्धार्थनगर जिले के थाना पथरा बाजार ग्राम सेमरहना निवासी राजकुमार ने 28 अगस्त 2015 को थाने पर तहरीर देकर कहा कि उसने अपनी बेटी गीता की शादी सोनहा थाना के बडौनी गांव निवासी शेषराम के साथ की थी।
शादी के कुछ दिनों तो सब कुछ ठीक रहा, मगर कुछ दिनों बाद पति व सास उसे दहेज में बाइक व 50 हजार रुपये की मांग को लेकर प्रताड़ित करने लगे। इसी बीच गीता ने दो बेटियों को भी जन्म दिया। इसे लेकर ससुराल के लोग और खफा रहने लगे। 22 मई 2015 की रात दस बजे गीता ने फोन कर बताया कि उसे पति शेषराम ने मारा पीटा है अब जिंदा नहीं बचूंगी।
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सुबह जब बडौनी पहुंचा तो पता चला कि पति व सास ने उसे मार कर पंखे से लटका दिए था। रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ। न्यायालय में हत्या का आरोप पत्र पुलिस ने दाखिल किया। मृतका के पति व सास पर आरोप तय होने के बाद अभियोजन की ओर से आठ गवाहों के बयान हुए। बयान के आधार पर न्यायालय ने शेषराम को दोषी करार दिया, जबकि सास को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी जय गोविंद सिंह ने घटना का विवरण कोर्ट में रखा। कहा कि सिद्धार्थनगर जिले के थाना पथरा बाजार ग्राम सेमरहना निवासी राजकुमार ने 28 अगस्त 2015 को थाने पर तहरीर देकर कहा कि उसने अपनी बेटी गीता की शादी सोनहा थाना के बडौनी गांव निवासी शेषराम के साथ की थी।
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शादी के कुछ दिनों तो सब कुछ ठीक रहा, मगर कुछ दिनों बाद पति व सास उसे दहेज में बाइक व 50 हजार रुपये की मांग को लेकर प्रताड़ित करने लगे। इसी बीच गीता ने दो बेटियों को भी जन्म दिया। इसे लेकर ससुराल के लोग और खफा रहने लगे। 22 मई 2015 की रात दस बजे गीता ने फोन कर बताया कि उसे पति शेषराम ने मारा पीटा है अब जिंदा नहीं बचूंगी।
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सुबह जब बडौनी पहुंचा तो पता चला कि पति व सास ने उसे मार कर पंखे से लटका दिए था। रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ। न्यायालय में हत्या का आरोप पत्र पुलिस ने दाखिल किया। मृतका के पति व सास पर आरोप तय होने के बाद अभियोजन की ओर से आठ गवाहों के बयान हुए। बयान के आधार पर न्यायालय ने शेषराम को दोषी करार दिया, जबकि सास को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।