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गैस एजेंसी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Apr 2016 12:52 AM IST
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जिला उपभोक्ता फोरम
- फोटो : Bureau
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बस्ती। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष रामदरश, सदस्य वंदना मिश्रा और महादेव प्रसाद दुबे की संयुक्त पीठ ने शहर के रत्नाकर गैस एजेंसी के प्रोपराइटर पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा 60 दिन के भीतर शिकायतकर्ता के गैस कनेक्शन को बहाल कर उन्हें गैस सिलिंडर की आपूर्ति के आदेश भी दिए गए है।
बस्ती शहर के बभनगांवा मोहल्ला निवासी राकेश कुमार यादव ने रत्नाकर गैस एजेंसी पुरानी बस्ती और डीएसओ बस्ती के विरुद्ध अधिवक्ता राजेंद्र नाथ पांडेय के माध्यम से परिवाद दाखिल किया। परिवाद के माध्यम से कहा कि छह फरवरी 2003 को उसे कनेक्शन मिला। इसके बाद गैस सिलिंडर की नियमित आपूर्ति हो रही थी।
आरोप लगाया कि गैस कनेक्शन की रसीद मिली थी, मगर उसका पासबुक नहीं मिला था। वादी को कनेक्शन का पासबुक 2010 में मिला, किंतु गैस कनेक्शन संख्या 14405 के स्थान पर 26670 परिवर्तित कर दिया गया। 20 जून 2013 तक गैस की आपूर्ति दी गई। जुलाई 2013 में यह कहते हुए गैस बुक करने से इंकार कर दिया कि यह नंबर किसी अन्य के नाम से फीड है।
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शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाही न होने पर परिवाद दाखिल किया गया। फोरम ने माना कि गैस एजेंसी ने सेवाओं में घोर लापरवाही की गई है। वादी का वाद स्वीकार करते हुए विपक्षी संख्या गैस एजेंसी के प्रोपराइटर को आदेश दिया कि सात दिन के भीतर परिवादी के कनेक्शन को बहाल कर गैस आपूर्ति सुनिश्चित करें। यदि ऐसा संभव न हो तो नया कनेक्शन दें। इसके अलावा वादी को हैरानी और परेशानी और वाद व्यय के लिए 20 हजार रुपये बतौर क्षतिपूर्ति भुगतान करें।
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बस्ती शहर के बभनगांवा मोहल्ला निवासी राकेश कुमार यादव ने रत्नाकर गैस एजेंसी पुरानी बस्ती और डीएसओ बस्ती के विरुद्ध अधिवक्ता राजेंद्र नाथ पांडेय के माध्यम से परिवाद दाखिल किया। परिवाद के माध्यम से कहा कि छह फरवरी 2003 को उसे कनेक्शन मिला। इसके बाद गैस सिलिंडर की नियमित आपूर्ति हो रही थी।
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आरोप लगाया कि गैस कनेक्शन की रसीद मिली थी, मगर उसका पासबुक नहीं मिला था। वादी को कनेक्शन का पासबुक 2010 में मिला, किंतु गैस कनेक्शन संख्या 14405 के स्थान पर 26670 परिवर्तित कर दिया गया। 20 जून 2013 तक गैस की आपूर्ति दी गई। जुलाई 2013 में यह कहते हुए गैस बुक करने से इंकार कर दिया कि यह नंबर किसी अन्य के नाम से फीड है।
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शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाही न होने पर परिवाद दाखिल किया गया। फोरम ने माना कि गैस एजेंसी ने सेवाओं में घोर लापरवाही की गई है। वादी का वाद स्वीकार करते हुए विपक्षी संख्या गैस एजेंसी के प्रोपराइटर को आदेश दिया कि सात दिन के भीतर परिवादी के कनेक्शन को बहाल कर गैस आपूर्ति सुनिश्चित करें। यदि ऐसा संभव न हो तो नया कनेक्शन दें। इसके अलावा वादी को हैरानी और परेशानी और वाद व्यय के लिए 20 हजार रुपये बतौर क्षतिपूर्ति भुगतान करें।