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पोल हटाने के लिए पालिका और पॉवर कॉरपोरेशन में ठनी
basti
Updated Sat, 05 May 2018 11:17 PM IST
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समस्याा
- फोटो : amar ujala
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बस्ती। सड़क चौड़ीकरण की नगर पालिका प्रशासन तैयारी कर रहा है। लेकिन, इस निर्माण में बिजली के पोल बांधा बने हुए हैं। पालिका ने मार्च 2015 में पॉवर कॉरपोरेशन निगम को पोल हटाने के लिए पत्र लिखा था। जिसे संज्ञान में नहीं लिया। पालिका ने इसके लिए कई पत्र लिखे। मामला शासन तक पहुंचा तो आनन-फानन में पॉवर कॉरपोरेशन ने पोल हटाने के लिए 46 लाख रुपये की डिमांड की थी। नगर पालिका प्रशासन की ओर से इसका जब इसका जबाव दिया गया तो तीन माह बाद यह रकम घट कर 12 लाख पर आ गई। इधर पालिका इसके लिए एक रुपये भी देने को तैयार नहीं है। बिजली निगम के पत्र के जवाब में पालिका ने शासनादेश का हवाला देते हुए तत्काल जनहित में खंभा हटाने को कहा है।
शहर में गांधी नगर, मालवीय मार्ग व अन्य स्थानों पर पालिका यातायात को बेहतर बनाने के लिए डिवाइडर निर्माण करा रहा है। इस निर्माण के चलते कई मार्ग संकरे हो रहे हैं। इसके दृष्टिगत पालिका सड़क चौड़ीकरण की तैयारी भी कर चुका है, मगर बिजली के खंभे इसमें रोड़ा अटका रहे हैं। यही नहीं डिवाइडर निर्माण के बाद मालवीय मार्ग व गांधी नगर में अक्सर जाम लग रहा है। क्योंकि दोनो पटरियों पर बिजली खंभे मौजूद हैं। हालांकि पालिका ने मार्च 2015 में ही इसे जनहित में हटवाने के लिए पॉवर कॉरपोरेशन को पत्र लिखा था मगर जिम्मेदारों ने इसे संज्ञान नहीं लिया। मामला शासन के संज्ञान में आया तो आठ मार्च 2017 को लखनऊ में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने सड़क मार्ग पर यात्रा की बाधाएं दूर करने के लिए खंभे हटा लेने का निर्देश दिया। इस निर्देश पर 18 अप्रैल को शासनादेश भी जारी हो गया। इसके बाद निगम के अधिकारियों की नींद टूटी। मार्च माह में ही निगम ने खंभा हटाने के लिए 46 लाख रुपये की मांग पालिका से की। पालिका ने इसे देने से मना कर दिया तो तीन माह बाद ही यह रकम घट कर 12 लाख हो गई। पालिका ने शासनादेश का हवाला देते हुए यह रकम भी देने से मना कर दिया है। निगम खंभा परिवर्तन के लिए धन लेने पर आमादा है तो पालिका जनहित में इस कार्य को करने की कवायद कर रही है। मुख्य अभियंता इं. ओपी यादव ने कहा कि खंभा परिवर्तन में धन व्यय होगा, जिसे संबंधित संस्था अथवा विभाग को अदा करना होगा। प्रभारी ईओ केके चौबे ने बताया कि शासनादेश के आधार पर जनहित में बिजली निगम को पोल हटा देना चाहिए, मगर वे धन की डिमांड कर रहे हैं। चूंकि खंभे तो पालिका की जमीन में ही हैं। ऐसे में इसका भी किराया बिजली निगम को अदा करना चाहिए।
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शहर में गांधी नगर, मालवीय मार्ग व अन्य स्थानों पर पालिका यातायात को बेहतर बनाने के लिए डिवाइडर निर्माण करा रहा है। इस निर्माण के चलते कई मार्ग संकरे हो रहे हैं। इसके दृष्टिगत पालिका सड़क चौड़ीकरण की तैयारी भी कर चुका है, मगर बिजली के खंभे इसमें रोड़ा अटका रहे हैं। यही नहीं डिवाइडर निर्माण के बाद मालवीय मार्ग व गांधी नगर में अक्सर जाम लग रहा है। क्योंकि दोनो पटरियों पर बिजली खंभे मौजूद हैं। हालांकि पालिका ने मार्च 2015 में ही इसे जनहित में हटवाने के लिए पॉवर कॉरपोरेशन को पत्र लिखा था मगर जिम्मेदारों ने इसे संज्ञान नहीं लिया। मामला शासन के संज्ञान में आया तो आठ मार्च 2017 को लखनऊ में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने सड़क मार्ग पर यात्रा की बाधाएं दूर करने के लिए खंभे हटा लेने का निर्देश दिया। इस निर्देश पर 18 अप्रैल को शासनादेश भी जारी हो गया। इसके बाद निगम के अधिकारियों की नींद टूटी। मार्च माह में ही निगम ने खंभा हटाने के लिए 46 लाख रुपये की मांग पालिका से की। पालिका ने इसे देने से मना कर दिया तो तीन माह बाद ही यह रकम घट कर 12 लाख हो गई। पालिका ने शासनादेश का हवाला देते हुए यह रकम भी देने से मना कर दिया है। निगम खंभा परिवर्तन के लिए धन लेने पर आमादा है तो पालिका जनहित में इस कार्य को करने की कवायद कर रही है। मुख्य अभियंता इं. ओपी यादव ने कहा कि खंभा परिवर्तन में धन व्यय होगा, जिसे संबंधित संस्था अथवा विभाग को अदा करना होगा। प्रभारी ईओ केके चौबे ने बताया कि शासनादेश के आधार पर जनहित में बिजली निगम को पोल हटा देना चाहिए, मगर वे धन की डिमांड कर रहे हैं। चूंकि खंभे तो पालिका की जमीन में ही हैं। ऐसे में इसका भी किराया बिजली निगम को अदा करना चाहिए।
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