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फोटो... हल्के में लेने से बढ़ता गया बवाल
Updated Tue, 05 Sep 2017 11:35 PM IST
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बवाल को हल्के में लेना पुलिस की चूक
बस्ती। पॉलीटेक्निक छात्रा की ट्रक से कुचलकर मौत के बाद रोड पर बैठे छात्रों को तत्काल हटा दिया गया होता तो बवाल इतना न बढ़ता। शुरुआत की ढिलाई से छात्रों का तेवर उग्र होता गया। जिससे छात्रों ने खुलकर उपद्रव किया।
पुलिस व्यवस्था में तालमेल के अभाव में भी काफी हद तक उपद्रव बढ़ गया। कॉलेज प्रशासन की तरफ से भी संवेदनहीनता बरती गई। गुस्साए छात्रों को समझाने तक की कोशिश नहीं की। इसे मूक समर्थन मानकर छात्रों का मनोबल और भी बढ़ता गया। साथ ही उग्र छात्रों को समझाने-बुझाने में काफी वक्त गंवाया। जिसके चलते भीड़ के साथ मनोबल बढ़ता गया। इसका असर उल्टा हुआ और छात्र-छात्राओं का हुजूम भी फोरलेन पर पहुंचने लगा। महिला पुलिस नहीं होने से अधिकारियों के भी हाथ पांव फूल गए। मजबूरन उन्हें फोरलेन पर आने से रोकने के लिए दीवार बनकर खड़ा रहना पड़ा। वहीं सहपाठी की लाश देखकर आपे से बाहर हुईं छात्राएं, अधिकारियों से धक्का-मुक्की करते हुए हाइवे पर आ गईं। हाथ से मामला निकलते देख एसपी संकल्प शर्मा टीम के साथ उन्हें हाइवे से हटाने लगे। इस पर छात्र पीछे तो हटे लेकिन छात्रों की ओर से पथराव शुरू हो गया। एएसपी के गनर के अलावा दो सीओ समेत 19 पुलिसकर्मियों को चोटें लगीं।
19 धाराओं में 500 उपद्रवियों पर मुकदमा दर्ज
बस्ती। फोरलेन हादसे के बाद हुए उपद्रव में पुलिस ने 28 नामजद समेत पांच सौ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। हिरासत में रखे गए सभी नामजदों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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पुरानी बस्ती के थानेदार अनिल कुमार की तहरीर पर आईपीसी सहित 19 संगीन धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। जिसमें घटना के विरोध में फोरलेन पर यातायात बाधित करके आम जन को तकलीफ देने, हटने का अनुरोध करने पर गोलबंद होकर पुलिस पर हमला करना, सरकारी कार्य में बाधा, ईट-पत्थर फेंक कर अफरातफरी का माहौल पैदा करना, सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने तथा आगजनी का आरोप है। एसपी संकल्प शर्मा के मुताबिक एसओ से विवेचना कराई जा रही है।
हिरासत के सभी 28 की गिरफ्तारी
- पॉलिटेक्निक छात्र अभिषेक आर्य निवासी पूर्सिया थाना वाल्टरगंज, शिरिश तिवारी बडसरी थाना बांसडीह बलिया, अभिषेक गुप्ता तिरही थाना दुल्लहपुर गाजीपुर, मनीष यादव बभनियाव थाना उभावं जिला बलिया, धनंजय सिंह जटहरा थाना कोरांव इलाहाबाद, शैलेन्द्र कुमार मिश्रौलिया थाना मुंडेरवा, प्रदीप कुमार पाकरडाड थाना लालगंज, रामशंकर गुप्ता इटबहरा थाना गौर, मनोज निवासी जमुहरा वाल्टरगंज, हरिशंकर यादव गौरा थाना वाल्टरगंज, नागेश सिंह खजुरी गोरखपुर, अवनीश दुबे भेलसा हरपुर बुदहट गोरखपुर, सुधीर कुमार सिंह निवासी कटका थाना महुली संतकबीरनगर, अंबुज कुमार श्रीवास्तव अमानाबाद थाना मुंडेरवा, अभिषेक कुमार विसुन्दरी चन्दौली, विनय कुमार निवासी सहरोजा पकड़ी बलिया, शिवम गुप्ता निवासी खजुरी खजनी गोरखपुर, आदित्य गुप्ता निवासी बक्शीपुर गोरखपुर, राजा राय निवासी कृष्ण दत्तपुर रोहनिया वाराणसी, मिथिलेश विश्वकर्मा निवासी चकदहा कलवारी, दुर्गेश चौधरी बबुरहवा थाना त्रिलोकपुर सिद्घार्थनगर, आशुतोश तिवारी बनमालीपुर थाना औराई भदोही, श्रीराम निवासी खैरात देवरिया, शिवम भिरिया थाना खजनी गोरखपुर, रजनीश कुमार निवासी बिसुन्धरी थाना चन्दौली जिला चन्दौली, रजनीश गुप्ता सुर्ती हट्टा थाना पुरानी बस्ती, विशाल गुप्ता पांडेय बाजार के अलावा आर्यन श्रीवास्तव निवासी पिकौरा बस्ती शामिल हैं।
कमिश्नर से नौकरी की मांग
- हादसे में मृत पॉलिटेक्निक छात्रा निशा चौधरी की मां लीलावती पत्नी बाल गोविंद ने मंगलवार को कमिश्नर को मांग पत्र दिया। जिसमें अपनी बड़ी बेटी को नौकरी दिलाने की मांग की गई है। मां का कहना है कि उनके परिवार में कोई भी कमाई का जरिया नहीं है। घर की सारी जमापूंजी लगाकर निशा को पढ़ा रही थीं। उसकी मृत्यु के बाद परिवार की हालत दयनीय हो गई है। 20 लाख रुपये मुआवजा की मांग भी की गई है।
प्रिंसिपल की शह पर बेकाबू हुए छात्र !
बस्ती। राजकीय पॉलीटेक्निक के छात्रों को मांग मनवाने के लिए उत्पात मचाने की सलाह प्राचार्य को महंगी पड़ती दिख रही है। मंगलवार को मजिस्ट्रियल जांच में प्रथम दृष्ट्या प्राचार्य को छात्रों को कंट्रोल करने की कोशिया करने के बजाए उकसाने का दोषी पाया गया। सामने आया है कि उनकी शह पर ही छात्राएं हाइवे पर उतरीं, जिसके बाद मामला बिगड़ा। मौके पर मौजूद एसपी संकल्प शर्मा ने पहले ही प्राचार्य पर गंभीर आरोप लगाया था।
उधर, छात्रा निशा चौधरी की मौत केे बाद हुए उपद्रव को संज्ञान में लेते हुए यूपी टेक्निकल यूनिवर्सिटी कानपुर ने मंगलवार को ज्वाइंट डायरेक्टर शैलेश कुमार जांच के लिए भेजा। जेडी ने प्राचार्य के अलावा स्टाफ से भी लंबी पूछताछ की। निदेशक भी पूरे प्रकरण में कालेज प्रशासन की भूमिका की जांच करेंगे।
मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट के मद्देनजर डीएम अरविंद कुमार सिंह ने शासन व यूपीटीयू कानपुर को प्राचार्य के विरुद्घ कठोर कार्रवाई का आग्रह किया है। डीएम का कहना है कि मुख्य राजस्व अधिकारी आरडी पांडेय व सीओ सिटी पवन गौतम से इस पूरे मामले की जांच कराई गई। पाया गया कि प्राचार्य ने खुद बच्चों को यह कहकर उकसाया कि बिना सड़क पर उतरकर हंगामा किए उनकी मांग नहीं मानी जाएगी। इसके बाद कालेज कैंपस के छात्र भी रोड पर आ गए। बाद में प्राचार्य ने छात्राओं को भी हाईवे पर धरना देने के लिए भेज दिया, जिसके बाद पुलिस व प्रशानिक अमला बेबस हुआ।
प्राचार्य को डीएम ने सोमवार को भी बुलाकर फटकारा था। क्योंकि एसपी संकल्प शर्मा की अगुआई में पुलिस बल के भीतर पहुंचने के बाद कालेज प्रशासन के आपे से बाहर होने लगे थे।
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कैंपस में सन्नाटा
- मंगलवार को कैंपस में सन्नाटा पसरा रहा। अधिकतर छात्रों को फोर्स लीव पर भेजे जाने के बाद बचे-खुचे छात्र भी अपने कमरों में दुबके रहे। क्लास भी नहीं चली। चौराहे की चाय-पान की दुकानों पर लोग दिन भर चर्चा करते रहे।
बस्ती। पॉलीटेक्निक छात्रा की ट्रक से कुचलकर मौत के बाद रोड पर बैठे छात्रों को तत्काल हटा दिया गया होता तो बवाल इतना न बढ़ता। शुरुआत की ढिलाई से छात्रों का तेवर उग्र होता गया। जिससे छात्रों ने खुलकर उपद्रव किया।
पुलिस व्यवस्था में तालमेल के अभाव में भी काफी हद तक उपद्रव बढ़ गया। कॉलेज प्रशासन की तरफ से भी संवेदनहीनता बरती गई। गुस्साए छात्रों को समझाने तक की कोशिश नहीं की। इसे मूक समर्थन मानकर छात्रों का मनोबल और भी बढ़ता गया। साथ ही उग्र छात्रों को समझाने-बुझाने में काफी वक्त गंवाया। जिसके चलते भीड़ के साथ मनोबल बढ़ता गया। इसका असर उल्टा हुआ और छात्र-छात्राओं का हुजूम भी फोरलेन पर पहुंचने लगा। महिला पुलिस नहीं होने से अधिकारियों के भी हाथ पांव फूल गए। मजबूरन उन्हें फोरलेन पर आने से रोकने के लिए दीवार बनकर खड़ा रहना पड़ा। वहीं सहपाठी की लाश देखकर आपे से बाहर हुईं छात्राएं, अधिकारियों से धक्का-मुक्की करते हुए हाइवे पर आ गईं। हाथ से मामला निकलते देख एसपी संकल्प शर्मा टीम के साथ उन्हें हाइवे से हटाने लगे। इस पर छात्र पीछे तो हटे लेकिन छात्रों की ओर से पथराव शुरू हो गया। एएसपी के गनर के अलावा दो सीओ समेत 19 पुलिसकर्मियों को चोटें लगीं।
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19 धाराओं में 500 उपद्रवियों पर मुकदमा दर्ज
बस्ती। फोरलेन हादसे के बाद हुए उपद्रव में पुलिस ने 28 नामजद समेत पांच सौ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। हिरासत में रखे गए सभी नामजदों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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पुरानी बस्ती के थानेदार अनिल कुमार की तहरीर पर आईपीसी सहित 19 संगीन धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। जिसमें घटना के विरोध में फोरलेन पर यातायात बाधित करके आम जन को तकलीफ देने, हटने का अनुरोध करने पर गोलबंद होकर पुलिस पर हमला करना, सरकारी कार्य में बाधा, ईट-पत्थर फेंक कर अफरातफरी का माहौल पैदा करना, सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने तथा आगजनी का आरोप है। एसपी संकल्प शर्मा के मुताबिक एसओ से विवेचना कराई जा रही है।
हिरासत के सभी 28 की गिरफ्तारी
- पॉलिटेक्निक छात्र अभिषेक आर्य निवासी पूर्सिया थाना वाल्टरगंज, शिरिश तिवारी बडसरी थाना बांसडीह बलिया, अभिषेक गुप्ता तिरही थाना दुल्लहपुर गाजीपुर, मनीष यादव बभनियाव थाना उभावं जिला बलिया, धनंजय सिंह जटहरा थाना कोरांव इलाहाबाद, शैलेन्द्र कुमार मिश्रौलिया थाना मुंडेरवा, प्रदीप कुमार पाकरडाड थाना लालगंज, रामशंकर गुप्ता इटबहरा थाना गौर, मनोज निवासी जमुहरा वाल्टरगंज, हरिशंकर यादव गौरा थाना वाल्टरगंज, नागेश सिंह खजुरी गोरखपुर, अवनीश दुबे भेलसा हरपुर बुदहट गोरखपुर, सुधीर कुमार सिंह निवासी कटका थाना महुली संतकबीरनगर, अंबुज कुमार श्रीवास्तव अमानाबाद थाना मुंडेरवा, अभिषेक कुमार विसुन्दरी चन्दौली, विनय कुमार निवासी सहरोजा पकड़ी बलिया, शिवम गुप्ता निवासी खजुरी खजनी गोरखपुर, आदित्य गुप्ता निवासी बक्शीपुर गोरखपुर, राजा राय निवासी कृष्ण दत्तपुर रोहनिया वाराणसी, मिथिलेश विश्वकर्मा निवासी चकदहा कलवारी, दुर्गेश चौधरी बबुरहवा थाना त्रिलोकपुर सिद्घार्थनगर, आशुतोश तिवारी बनमालीपुर थाना औराई भदोही, श्रीराम निवासी खैरात देवरिया, शिवम भिरिया थाना खजनी गोरखपुर, रजनीश कुमार निवासी बिसुन्धरी थाना चन्दौली जिला चन्दौली, रजनीश गुप्ता सुर्ती हट्टा थाना पुरानी बस्ती, विशाल गुप्ता पांडेय बाजार के अलावा आर्यन श्रीवास्तव निवासी पिकौरा बस्ती शामिल हैं।
कमिश्नर से नौकरी की मांग
- हादसे में मृत पॉलिटेक्निक छात्रा निशा चौधरी की मां लीलावती पत्नी बाल गोविंद ने मंगलवार को कमिश्नर को मांग पत्र दिया। जिसमें अपनी बड़ी बेटी को नौकरी दिलाने की मांग की गई है। मां का कहना है कि उनके परिवार में कोई भी कमाई का जरिया नहीं है। घर की सारी जमापूंजी लगाकर निशा को पढ़ा रही थीं। उसकी मृत्यु के बाद परिवार की हालत दयनीय हो गई है। 20 लाख रुपये मुआवजा की मांग भी की गई है।
प्रिंसिपल की शह पर बेकाबू हुए छात्र !
बस्ती। राजकीय पॉलीटेक्निक के छात्रों को मांग मनवाने के लिए उत्पात मचाने की सलाह प्राचार्य को महंगी पड़ती दिख रही है। मंगलवार को मजिस्ट्रियल जांच में प्रथम दृष्ट्या प्राचार्य को छात्रों को कंट्रोल करने की कोशिया करने के बजाए उकसाने का दोषी पाया गया। सामने आया है कि उनकी शह पर ही छात्राएं हाइवे पर उतरीं, जिसके बाद मामला बिगड़ा। मौके पर मौजूद एसपी संकल्प शर्मा ने पहले ही प्राचार्य पर गंभीर आरोप लगाया था।
उधर, छात्रा निशा चौधरी की मौत केे बाद हुए उपद्रव को संज्ञान में लेते हुए यूपी टेक्निकल यूनिवर्सिटी कानपुर ने मंगलवार को ज्वाइंट डायरेक्टर शैलेश कुमार जांच के लिए भेजा। जेडी ने प्राचार्य के अलावा स्टाफ से भी लंबी पूछताछ की। निदेशक भी पूरे प्रकरण में कालेज प्रशासन की भूमिका की जांच करेंगे।
मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट के मद्देनजर डीएम अरविंद कुमार सिंह ने शासन व यूपीटीयू कानपुर को प्राचार्य के विरुद्घ कठोर कार्रवाई का आग्रह किया है। डीएम का कहना है कि मुख्य राजस्व अधिकारी आरडी पांडेय व सीओ सिटी पवन गौतम से इस पूरे मामले की जांच कराई गई। पाया गया कि प्राचार्य ने खुद बच्चों को यह कहकर उकसाया कि बिना सड़क पर उतरकर हंगामा किए उनकी मांग नहीं मानी जाएगी। इसके बाद कालेज कैंपस के छात्र भी रोड पर आ गए। बाद में प्राचार्य ने छात्राओं को भी हाईवे पर धरना देने के लिए भेज दिया, जिसके बाद पुलिस व प्रशानिक अमला बेबस हुआ।
प्राचार्य को डीएम ने सोमवार को भी बुलाकर फटकारा था। क्योंकि एसपी संकल्प शर्मा की अगुआई में पुलिस बल के भीतर पहुंचने के बाद कालेज प्रशासन के आपे से बाहर होने लगे थे।
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कैंपस में सन्नाटा
- मंगलवार को कैंपस में सन्नाटा पसरा रहा। अधिकतर छात्रों को फोर्स लीव पर भेजे जाने के बाद बचे-खुचे छात्र भी अपने कमरों में दुबके रहे। क्लास भी नहीं चली। चौराहे की चाय-पान की दुकानों पर लोग दिन भर चर्चा करते रहे।