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सामूहिक दुष्कर्म में दो को 14 वर्ष की सजा
basti
Updated Sun, 19 Aug 2018 12:07 AM IST
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दिल्ली हाईकोर्ट
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बस्ती। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश हर्ष अग्रवाल ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए 14 वर्ष की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। इसे न अदा करने पर एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी जय गोविंद सिंह व अधिवक्ता शशि प्रकाश शुक्ल ने घटना का विवरण अदालत में प्रस्तुत किया। बताया कि नगर थाना क्षेत्र के एक गांव की पीड़िता ने रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें कहा कि 15 अगस्त 2012 को स्कूल के कार्यक्रम में शामिल होने गई थी। सुबह दस बजे के बाद जब साइकिल से वापस लौट रही थी कि रास्ते में राजेश यादव व उमाशंकर मिले। बताए कि तुम्हारे मां की तबीयत ज्यादा खराब है और तत्काल बाइक पर बैठ जाओ और साइकिल उमाशंकर को देने की बात कही। थोड़ी दूर पर एक सुनसान मकान पर वे लोग लेकर पहुंचे और साइकिल रखने के लिए राजेश ने दरवाजा खोला। जैैसे ही वह साइकिल रखने अंदर गई। दोनों युवक कमरे में घुस गए और दरवाजा बंद कर जबरन दुष्कर्म किए। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ। पीड़िता के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दुष्कर्म के मामले का आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हुआ। अभियोजन की ओर से पीड़िता सहित अन्य गवाहों के बयान हुए। बचाव पक्ष से रंजिशन बयान दिए जाने की बात कही गई। घटना के समय दोनों आरोपी एक व्यक्ति का इलाज कराने मुख्यालय गए थे। न्यायालय ने बचाव पक्ष की दलील को खारिज करते हुए सजा सुनाई।
गैर इरादतन हत्या में दंपती सहित तीन को सजा
लालगंज थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर की घटना
एडीजे प्रथम के कोर्ट का फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम मदन लाल निगम की अदालत ने गैर इरादतन हत्या के मामले में दंपती सहित तीन को पांच वर्ष की कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर चार हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। इसे अदा न करने पर एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस मामले में एक आरोपी को कोर्ट ने बरी कर दिया है।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राघवेश प्रसाद पांडेय ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि लालगंज थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर निवासी राजू निषाद ने थाना लालगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 17 मई 2015 को सुबह साढ़े दस बजे माता शांती गड्ढे में कूड़ा फेंकने गई थीं। कूड़ा फेंकने की बात को लेकर गांव की गायत्री व उसके पति राजन, आरती व परदेशी ने मिलकर उनकी माता शांती को मारापीटा। जब इस घटना को देखकर बहन पूजा वहां पहुंची तो उसे भी मारापीटा गया। इस मारपीट में शांती व बहन पूूजा को गंभीर चोट आ गई। उन्हें गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां माता की हालत बिगड़ते देखकर डॉक्टरों ने उन्हें गोरखपुर रेफर कर दिया। गोरखपुर जाते समय रास्ते में मां ने दम तोड़ दिया। रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज होकर चारों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ। अभियोजन की ओर से वादी सहित आठ गवाहों के बयान दर्ज हुए। बचाव पक्ष से झूठा व रंजिशन फंसाने की बात की दलील दी गई। गवाहों के बयान व सबूतों के आधार न्यायाधीश ने गायत्री, राजन व आरती को सजा सुनाई। परदेशी को बरी कर दिया।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी जय गोविंद सिंह व अधिवक्ता शशि प्रकाश शुक्ल ने घटना का विवरण अदालत में प्रस्तुत किया। बताया कि नगर थाना क्षेत्र के एक गांव की पीड़िता ने रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें कहा कि 15 अगस्त 2012 को स्कूल के कार्यक्रम में शामिल होने गई थी। सुबह दस बजे के बाद जब साइकिल से वापस लौट रही थी कि रास्ते में राजेश यादव व उमाशंकर मिले। बताए कि तुम्हारे मां की तबीयत ज्यादा खराब है और तत्काल बाइक पर बैठ जाओ और साइकिल उमाशंकर को देने की बात कही। थोड़ी दूर पर एक सुनसान मकान पर वे लोग लेकर पहुंचे और साइकिल रखने के लिए राजेश ने दरवाजा खोला। जैैसे ही वह साइकिल रखने अंदर गई। दोनों युवक कमरे में घुस गए और दरवाजा बंद कर जबरन दुष्कर्म किए। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ। पीड़िता के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दुष्कर्म के मामले का आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हुआ। अभियोजन की ओर से पीड़िता सहित अन्य गवाहों के बयान हुए। बचाव पक्ष से रंजिशन बयान दिए जाने की बात कही गई। घटना के समय दोनों आरोपी एक व्यक्ति का इलाज कराने मुख्यालय गए थे। न्यायालय ने बचाव पक्ष की दलील को खारिज करते हुए सजा सुनाई।
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गैर इरादतन हत्या में दंपती सहित तीन को सजा
लालगंज थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर की घटना
एडीजे प्रथम के कोर्ट का फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम मदन लाल निगम की अदालत ने गैर इरादतन हत्या के मामले में दंपती सहित तीन को पांच वर्ष की कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर चार हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। इसे अदा न करने पर एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस मामले में एक आरोपी को कोर्ट ने बरी कर दिया है।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राघवेश प्रसाद पांडेय ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि लालगंज थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर निवासी राजू निषाद ने थाना लालगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 17 मई 2015 को सुबह साढ़े दस बजे माता शांती गड्ढे में कूड़ा फेंकने गई थीं। कूड़ा फेंकने की बात को लेकर गांव की गायत्री व उसके पति राजन, आरती व परदेशी ने मिलकर उनकी माता शांती को मारापीटा। जब इस घटना को देखकर बहन पूजा वहां पहुंची तो उसे भी मारापीटा गया। इस मारपीट में शांती व बहन पूूजा को गंभीर चोट आ गई। उन्हें गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां माता की हालत बिगड़ते देखकर डॉक्टरों ने उन्हें गोरखपुर रेफर कर दिया। गोरखपुर जाते समय रास्ते में मां ने दम तोड़ दिया। रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज होकर चारों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ। अभियोजन की ओर से वादी सहित आठ गवाहों के बयान दर्ज हुए। बचाव पक्ष से झूठा व रंजिशन फंसाने की बात की दलील दी गई। गवाहों के बयान व सबूतों के आधार न्यायाधीश ने गायत्री, राजन व आरती को सजा सुनाई। परदेशी को बरी कर दिया।