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स्वास्थ्य से खिलवाड़, शहर में खुलेआम हुक्का बार
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स्वास्थ्य से खिलवाड़, शहर में खुलेआम हुक्का बार
पुलिस का संरक्षण, कैफे की आड़ में चल रहा धंधा
स्कूलों के निकट स्थित हुक्का बार में युवाओं की भीड़
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। शहर में खुलेआम चल रहे हुक्का बार से लोगों में गुस्सा है। कैफे की आड़ में शहर के आधा दर्जन स्थानों पर आधुनिक साज-सज्जा युक्त कैफे बार में युवाओं को हुक्का की लत लगाकर उनसे मोटी रकम वसूली जा रही है। हालांकि, कैफेे के संचालक इसके प्रयोग को स्वास्थ्य प्रभावित करने वाला नहीं करार देते हैं, मगर डॉक्टरों की मानें तो हुक्का में रसायनयुक्त पदार्थ जलने पर शरीर के भीतर तमाम रोग को जन्म दे रहा है।
शहर के मालवीय रोड, गांधी नगर, हाईवे, द्विजेश मार्ग, पुरानी बस्ती सहित आधा दर्जन स्थानों पर अत्याधुनिक साज-सज्जा युक्त कैफे खुले हैं। यहां शाम को युवाओं व स्कूली छात्र-छात्राओं की खूब भीड़ होती है। कैफे में सामान्य खानपान के अलावा हुक्का का भी इंतजाम संचालक करते हैं। हुक्का संचालकों की मानें तो यहां जो हुक्का दिया जाता है उसमें नारकोटिक्स का कोई मिश्रण नहीं होता। यह पूरी तरह शाकाहारी व नशामुक्त सेव, केला, संतरा, अन्नास, लीची व अन्य तमाम फ्लेवर का होता है। इसके लाइसेंस न होने की बात तो वे स्वीकारते हैं, मगर उनका यह कहना है कि हुक्का में प्रयोग होने वाले सामान का स्वास्थ्य पर कहीं कोई बुरा प्रभाव नहीं है।
इधर, फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि हुक्का पीने के लिए जो भी सामान प्रयोग किया जाता है उसमें रसायन होता है, जो मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक है। यानी यह एक प्रकार का जहर शरीर में पहुंचा देता है। इसकी लत लगने के बाद आदती इसका अत्यधिक प्रयोग करने लगते हैं, जिससे किडनी, अमाशय, फेफड़े आदि प्रभावित हो जाते हैं। इससे तमाम बीमारियां भी जन्म लेती हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी अपूर्व श्रीवास्तव ने बताया कि हुक्का बार के लिए विभाग किसी भी प्रकार का लाइसेंस जारी नहीं करता। खान-पान के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग लाइसेंस देता है। एडीएम रमेश चंद्र ने कहा कि हुक्का बार का संचालन बगैर लाइसेंस हो रहा है तो यह अवैध कार्य है। प्रशासन के नाक के नीचे इसका संचालन कतई नहीं होने पाएगा। इसकी जांच करा कार्रवाई होगी।
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पुलिस का संरक्षण, कैफे की आड़ में चल रहा धंधा
स्कूलों के निकट स्थित हुक्का बार में युवाओं की भीड़
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। शहर में खुलेआम चल रहे हुक्का बार से लोगों में गुस्सा है। कैफे की आड़ में शहर के आधा दर्जन स्थानों पर आधुनिक साज-सज्जा युक्त कैफे बार में युवाओं को हुक्का की लत लगाकर उनसे मोटी रकम वसूली जा रही है। हालांकि, कैफेे के संचालक इसके प्रयोग को स्वास्थ्य प्रभावित करने वाला नहीं करार देते हैं, मगर डॉक्टरों की मानें तो हुक्का में रसायनयुक्त पदार्थ जलने पर शरीर के भीतर तमाम रोग को जन्म दे रहा है।
शहर के मालवीय रोड, गांधी नगर, हाईवे, द्विजेश मार्ग, पुरानी बस्ती सहित आधा दर्जन स्थानों पर अत्याधुनिक साज-सज्जा युक्त कैफे खुले हैं। यहां शाम को युवाओं व स्कूली छात्र-छात्राओं की खूब भीड़ होती है। कैफे में सामान्य खानपान के अलावा हुक्का का भी इंतजाम संचालक करते हैं। हुक्का संचालकों की मानें तो यहां जो हुक्का दिया जाता है उसमें नारकोटिक्स का कोई मिश्रण नहीं होता। यह पूरी तरह शाकाहारी व नशामुक्त सेव, केला, संतरा, अन्नास, लीची व अन्य तमाम फ्लेवर का होता है। इसके लाइसेंस न होने की बात तो वे स्वीकारते हैं, मगर उनका यह कहना है कि हुक्का में प्रयोग होने वाले सामान का स्वास्थ्य पर कहीं कोई बुरा प्रभाव नहीं है।
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इधर, फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि हुक्का पीने के लिए जो भी सामान प्रयोग किया जाता है उसमें रसायन होता है, जो मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक है। यानी यह एक प्रकार का जहर शरीर में पहुंचा देता है। इसकी लत लगने के बाद आदती इसका अत्यधिक प्रयोग करने लगते हैं, जिससे किडनी, अमाशय, फेफड़े आदि प्रभावित हो जाते हैं। इससे तमाम बीमारियां भी जन्म लेती हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी अपूर्व श्रीवास्तव ने बताया कि हुक्का बार के लिए विभाग किसी भी प्रकार का लाइसेंस जारी नहीं करता। खान-पान के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग लाइसेंस देता है। एडीएम रमेश चंद्र ने कहा कि हुक्का बार का संचालन बगैर लाइसेंस हो रहा है तो यह अवैध कार्य है। प्रशासन के नाक के नीचे इसका संचालन कतई नहीं होने पाएगा। इसकी जांच करा कार्रवाई होगी।
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