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Basti News: संविदा परिचालक के शव को लेकर एआरएम ऑफिस पहुंचे परिजन, किया घेराव
Tue, 25 Jul 2023 12:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 25 Jul 2023 12:05 AM IST
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परशुरामपुर ब्लाक परिसर मे घटना का निरीक्षण करते थाना प्रभारी।
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बस्ती। रोडवेज डिपो में कार्यरत संविदा परिचालक राजा बाबू के 23 जुलाई को ट्रेन के आगे कूदकर जान देने का मामला दूसरे दिन सोमवार को तूल पकड़ लिया। पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजन एंबुलेंस पर शव को लेकर दोपहर बाद एआरएम आफिस पहुंच गए और एआरएम कार्यालय के सामने शव रखकर घेर लिया। परिजनों के साथ वहां अन्य परिचालकों व चालकों ने भी पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया।
पिता और चाचा ने एआरएम पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। परिजन एआरएम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग पर अड़े रहे। इस दौरान एआरएम आयुष भटनागर अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे। हंगामे के चलते बसों का संचालन ठप हो गया।
परशुरामपुर थाने के पिटुड़ा श्रृंगीनारी निवासी राजा बाबू रोडवेज डिपो में संविदा परिचालक थे। उनकी ड्यूटी मखौड़ा से गोरखपुर रूट की एक अनुबंधित बस पर थी। 22 जुलाई की शाम को वह ड्यूटी से घर गए। अगले दिन 23 जुलाई की शाम गौर थाना क्षेत्र के बलुआ समय माता मंदिर के पास राजा बाबू ने अपनी बाइक खड़ी कर मालगाड़ी के आगे रेलवे ट्रैक पर कूदकर जान दे दी। सोमवार को परिजन शव लेकर पोस्टमार्टम कराने पहुंचे। इस बीच संवेदना व्यक्त करने एआरएम भटनागर भी पीएम हाउस पहुंचे। परिजन उनके ऊपर उत्पीड़न का आरोप लगाने लगे। परिजनों का कड़ा रुख देख कर एआरएम वहां से निकल लिए।
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पोस्टमार्टम के बाद परिजन संविदा परिचालक का शव लेकर उनके कार्यालय पहुंच गए। यहां एआरएम मौजूद नहीं थे। कुछ देर बाद शहर कोतवाल विनय कुमार पाठक भी मय फोर्स मौके पर आ गए। वह परिजनों को समझाने बुझाने का घंटे भर प्रयास किए, लेकिन गुस्साए लोग नहीं माने। परिजन एआरएम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और उनके स्थानांतरण की मांग पर अड़े रहे।
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कमरे में बुलाकर लगाई थी फटकार
मृतक संविदा परिचालक के पिता ओंकारनाथ पाठक ने कहा कि उनके बेटे की आम शोहरत विभाग में अच्छी थी। एआरएम उन्हें अक्सर परेशान करते थे। कहा कि 22 जुलाई को वर्दी न पहनकर आने के कारण एआरएम ने उन्हें अपने कमरे बुलाकर डांटा फटकारा। उनके ऊपर जुर्माना भी लगाया। लोड फैक्टर कम होने पर स्थानांतरण की धमकी दी, जिससे उनका बेटा काफी हताश होकर घर पहुंचा। उस दिन शाम को घटनाक्रम बताकर नौकरी छोड़ने की बात कही। अगले दिन उसने जान दे दी।
शव के साथ पहुंचे अन्य परिजनों ने भी एआरएम पर चालक, परिचालकों के उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाया। कहा कि राजा बाबू की तरह अन्य चालक, परिचालक भी उत्पीड़न का शिकार है, लेकिन कार्रवाई के भय से कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। पिता के साथ चाचा अरुण कुमार पांडेय, शशि कुमार पांडेय एवं अन्य रिश्तेदार मौजूद रहे।
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कोतवाल ने एसडीएम और एआरएम से की बात
एसडीएम और एआरएम से फोन पर वार्ता कर स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद परिजनों से कहा कि अंतिम संस्कार के लिए शव को ले जाएं। बाद में एआरएम को लेकर वह स्वयं मृतक के घर पहुंचेंगे, लेकिन परिजन नहीं माने। उनका कहना था कि मुकदमा दर्ज किया जाए या कार्रवाई का लिखित आश्वासन मिले।
-विनय कुमार पाठक, शहर कोतवाल
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मेरी कोई भूमिका नहीं
संविदा परिचालक की मौत में मेरी कोई भूमिका नहीं है। लोड फैक्टर कम होने के लिए एसएसआई स्तर से 50 से अधिक लोगाें से स्पष्टीकरण मांगा गया था। यह रूटीन कार्रवाई है। इसके अलावा मेरे स्तर से कोई दुर्व्यवहार नहीं किया गया है। मृतक एवं उनके शोकाकुल परिजनों के साथ मेरी पूरी सहानुभूति है।
-आयुष भटनागर, एआरएम, रोडवेज डिपो
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पिता और चाचा ने एआरएम पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। परिजन एआरएम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग पर अड़े रहे। इस दौरान एआरएम आयुष भटनागर अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे। हंगामे के चलते बसों का संचालन ठप हो गया।
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परशुरामपुर थाने के पिटुड़ा श्रृंगीनारी निवासी राजा बाबू रोडवेज डिपो में संविदा परिचालक थे। उनकी ड्यूटी मखौड़ा से गोरखपुर रूट की एक अनुबंधित बस पर थी। 22 जुलाई की शाम को वह ड्यूटी से घर गए। अगले दिन 23 जुलाई की शाम गौर थाना क्षेत्र के बलुआ समय माता मंदिर के पास राजा बाबू ने अपनी बाइक खड़ी कर मालगाड़ी के आगे रेलवे ट्रैक पर कूदकर जान दे दी। सोमवार को परिजन शव लेकर पोस्टमार्टम कराने पहुंचे। इस बीच संवेदना व्यक्त करने एआरएम भटनागर भी पीएम हाउस पहुंचे। परिजन उनके ऊपर उत्पीड़न का आरोप लगाने लगे। परिजनों का कड़ा रुख देख कर एआरएम वहां से निकल लिए।
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पोस्टमार्टम के बाद परिजन संविदा परिचालक का शव लेकर उनके कार्यालय पहुंच गए। यहां एआरएम मौजूद नहीं थे। कुछ देर बाद शहर कोतवाल विनय कुमार पाठक भी मय फोर्स मौके पर आ गए। वह परिजनों को समझाने बुझाने का घंटे भर प्रयास किए, लेकिन गुस्साए लोग नहीं माने। परिजन एआरएम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और उनके स्थानांतरण की मांग पर अड़े रहे।
कमरे में बुलाकर लगाई थी फटकार
मृतक संविदा परिचालक के पिता ओंकारनाथ पाठक ने कहा कि उनके बेटे की आम शोहरत विभाग में अच्छी थी। एआरएम उन्हें अक्सर परेशान करते थे। कहा कि 22 जुलाई को वर्दी न पहनकर आने के कारण एआरएम ने उन्हें अपने कमरे बुलाकर डांटा फटकारा। उनके ऊपर जुर्माना भी लगाया। लोड फैक्टर कम होने पर स्थानांतरण की धमकी दी, जिससे उनका बेटा काफी हताश होकर घर पहुंचा। उस दिन शाम को घटनाक्रम बताकर नौकरी छोड़ने की बात कही। अगले दिन उसने जान दे दी।
शव के साथ पहुंचे अन्य परिजनों ने भी एआरएम पर चालक, परिचालकों के उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाया। कहा कि राजा बाबू की तरह अन्य चालक, परिचालक भी उत्पीड़न का शिकार है, लेकिन कार्रवाई के भय से कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। पिता के साथ चाचा अरुण कुमार पांडेय, शशि कुमार पांडेय एवं अन्य रिश्तेदार मौजूद रहे।
कोतवाल ने एसडीएम और एआरएम से की बात
एसडीएम और एआरएम से फोन पर वार्ता कर स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद परिजनों से कहा कि अंतिम संस्कार के लिए शव को ले जाएं। बाद में एआरएम को लेकर वह स्वयं मृतक के घर पहुंचेंगे, लेकिन परिजन नहीं माने। उनका कहना था कि मुकदमा दर्ज किया जाए या कार्रवाई का लिखित आश्वासन मिले।
-विनय कुमार पाठक, शहर कोतवाल
मेरी कोई भूमिका नहीं
संविदा परिचालक की मौत में मेरी कोई भूमिका नहीं है। लोड फैक्टर कम होने के लिए एसएसआई स्तर से 50 से अधिक लोगाें से स्पष्टीकरण मांगा गया था। यह रूटीन कार्रवाई है। इसके अलावा मेरे स्तर से कोई दुर्व्यवहार नहीं किया गया है। मृतक एवं उनके शोकाकुल परिजनों के साथ मेरी पूरी सहानुभूति है।
-आयुष भटनागर, एआरएम, रोडवेज डिपो