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Basti News: गाय, गंगा और गायत्री सनातन संस्कृति का आधार
Mon, 21 Apr 2025 12:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 21 Apr 2025 12:37 AM IST
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बस्ती। श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराते हुए पंडित देवस्य मिश्र ने श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। कहा कि निराकार की अपेक्षा साकार रूप की पूजा अधिक फलदायी होती है। गाय, गंगा और गायत्री सनातन संस्कृति का आधार है। इनका अनुसरण जीवन को पूर्णता प्रदान करता है।
प्रहलाद कॉलोनी प्रहलाद कालोनी में चल रही कथा में व्यास ने पूतना उद्धार और बकासुर वध का वर्णन किया। बताया कि बाल स्वरूप में भगवान श्रीकृष्ण ने दुष्ट शक्तियों का विनाश कर भक्तों की रक्षा की। पूतना, जो बालक कृष्ण को मारने के उद्देश्य से आई थी, परमगति को प्राप्त हुई।
पंडित मिश्र ने नग्न स्नान को अशुभ बताते हुए कहा कि श्रीकृष्ण ने यमुना किनारे गोपियों के वस्त्र चुराकर उन्हें जीवन का सच्चा संदेश दिया, जो आत्मज्ञान और लज्जा की मर्यादा से जुड़ा है। कथा में ब्रज की बालाओं संग होली खेलने का मनोहारी दृश्य भी प्रस्तुत किया गया। इससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
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उन्होंने कहा कि संत वेदों का हृदय होते हैं और महापुरुषों के मुख से कथा सुनने से पापों का क्षय होता है। इससे पुण्य का उदय होता है। इस मौके पर श्याम नारायण पाल, लालमति पाल, सौरभ पाल, राजकुमार पाल, धर्मेंद्र पाल, रामकुमार पाल, विनोद पाल, चूड़ामणि त्रिपाठी, रिपु सूदन यादव, रामकिशोर आदि मौजूद रहे। संवाद
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प्रहलाद कॉलोनी प्रहलाद कालोनी में चल रही कथा में व्यास ने पूतना उद्धार और बकासुर वध का वर्णन किया। बताया कि बाल स्वरूप में भगवान श्रीकृष्ण ने दुष्ट शक्तियों का विनाश कर भक्तों की रक्षा की। पूतना, जो बालक कृष्ण को मारने के उद्देश्य से आई थी, परमगति को प्राप्त हुई।
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पंडित मिश्र ने नग्न स्नान को अशुभ बताते हुए कहा कि श्रीकृष्ण ने यमुना किनारे गोपियों के वस्त्र चुराकर उन्हें जीवन का सच्चा संदेश दिया, जो आत्मज्ञान और लज्जा की मर्यादा से जुड़ा है। कथा में ब्रज की बालाओं संग होली खेलने का मनोहारी दृश्य भी प्रस्तुत किया गया। इससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
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उन्होंने कहा कि संत वेदों का हृदय होते हैं और महापुरुषों के मुख से कथा सुनने से पापों का क्षय होता है। इससे पुण्य का उदय होता है। इस मौके पर श्याम नारायण पाल, लालमति पाल, सौरभ पाल, राजकुमार पाल, धर्मेंद्र पाल, रामकुमार पाल, विनोद पाल, चूड़ामणि त्रिपाठी, रिपु सूदन यादव, रामकिशोर आदि मौजूद रहे। संवाद