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Basti News: 476 परिषदीय विद्यालयों के पास भवन नहीं, एक कमरे में पढ़ाई करते हैं बच्चे
Thu, 21 Sep 2023 11:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 21 Sep 2023 11:38 AM IST
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निष्प्रयोज्य बताकर 298 स्कूल भवन ढहा दिए गए, लेकिन निर्माण 34 भवनों का
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बेसिक शिक्षा परिषद के एक-दो नहीं, बल्कि 476 प्राथमिक और जूनियर विद्यालय मानक विहीन हैं। विभाग ने इन्हें खुद सूचीबद्ध किया है। तीन साल पहले इन स्कूल भवनों की जीर्णशीर्ण अवस्था को देखकर निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया गया था। इनमें से 298 स्कूल भवन ढहा भी दिए गए, लेकिन नए भवन नहीं बनाए गए। ढहाए गए स्कूल के बच्चे या तो एक कमरे में शिफ्ट कर दिए गए हैं या फिर दूसरे स्कूलों में मर्ज। विभाग अपने विद्यालयों की इस अव्यवस्था पर ध्यान नहीं दे रहा है। जबकि 2071 परिषदीय स्कूलों में से एक चौथाई स्कूल बिना भवन के संचालित हो रहे हैं।
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले 20 हजार से अधिक बच्चों के लिए भवन उपलब्ध नहीं है। इनकी पढ़ाई या तो खुले आसमान के नीचे हो रही है या टीन शेड के नीचे बैठना पड़ रहा है। कहीं-कहीं बैठने की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इससे बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। विभाग की ओर से ढहाए गए 298 स्कूल भवनों में से सिर्फ 34 स्कूल भवनों का ही निर्माण कराया जा रहा है। इसमें प्राथमिक विद्यालय पर 15.14 लाख और जूनियर विद्यालय के निर्माण पर 28 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सांऊघाट ब्लाॅक में 24, दुबौलिया में दो, कुदरहा में छह और परशुरामपुर में दो विद्यालय भवन का निर्माण 60 प्रतिशत पूरा हो चुका है।
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केस- एक
जमींदोज हो गया विद्यालय, अब दूसरे स्कूल में पढ़ रहे बच्चे
नगर पालिका क्षेत्र के पिकौरा बख्श प्राथमिक स्कूल के निष्प्रयोज्य भवन को एक साल पहले ध्वस्त कर दिया गया। धरातल पर इस विद्यालय का नामोनिशान नहीं है, मगर विभागीय अभिलेख में यह स्कूल संचालित है। यहां के बच्चे दूसरे मुहल्ले के गांधीनगर परिषदीय विद्यालय में मर्ज कर दिए गए हैं। इससे संबंधित विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़कर 256 हो गई है। इस लिहाज से यह विद्यालय भवन भी छोटा पड़ गया। बच्चे टीन शेड में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। यहां भवन के मानक का कोई ध्यान नहीं है।
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केस- दो
एक कमरे में पढ़ाई कर रहे कक्षा एक से आठ तक के बच्चे
बीएसए कार्यालय परिसर में चल रहा आदर्श प्राथमिक विद्यालय भवन भी निष्प्रयोज्य घोषित हो चुका है। नीलामी के बाद भवन ध्वस्त करा दिया गया है। दो साल बीत गए, लेकिन नवीन भवन का निर्माण नहीं हुआ। यहां अध्यनरत कक्षा एक से आठ तक के 200 बच्चों की पढ़ाई के लिए सिर्फ एक कमरे की व्यवस्था है। एक साथ बच्चों का यहां बैठकर पढ़ना संभव नहीं है। प्रति कक्षा का मानक भी पूरा नहीं है।
...
केस- तीन
मीतनपुर में एक कमरे में हो रही पढ़ाई
बहादुरपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत मीतनपुर का प्राथमिक विद्यालय भवन जर्जर होने के कारण ध्वस्त किया जा चुका है। यहां केवल एक कमरा बचा है। कुल 90 बच्चे इस विद्यालय में पंजीकृत हैं। एक ही कमरे में सभी कक्षा के बच्चों को पढ़ाई कराई जा रही है। अब सोचिए, विद्यालय होने का कौन सा मानक यहां पूरा हो रहा है।
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केस- चार
प्राथमिक स्कूल खैराटी के पास सिर्फ एक कमरा
बनकटी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय खैराटी के जर्जर भवन को ध्वस्त कराने के बाद सिर्फ एक कमरा शेष बचा है। यहां नवीन भवन अब तक नहीं बना है। नतीजा एक ही कमरे में शिक्षक और स्टॉफ बैठे या बच्चे पढ़ाई करें यह तय नहीं हो पा रहा है। इस विद्यालय मेंं कक्षा एक से पांच तक नामांकित 67 बच्चे एक ही कमरे में बैठकर पढ़ाई कैसे करें इस यक्ष प्रश्न पर विभाग निरुत्तर है।
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कोट
34 विद्यालय भवनों के निर्माण के लिए शासन से धन आवंटित हुआ है। शेष भवनों के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
अनूप कुमार, बीएसए
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बेसिक शिक्षा परिषद के एक-दो नहीं, बल्कि 476 प्राथमिक और जूनियर विद्यालय मानक विहीन हैं। विभाग ने इन्हें खुद सूचीबद्ध किया है। तीन साल पहले इन स्कूल भवनों की जीर्णशीर्ण अवस्था को देखकर निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया गया था। इनमें से 298 स्कूल भवन ढहा भी दिए गए, लेकिन नए भवन नहीं बनाए गए। ढहाए गए स्कूल के बच्चे या तो एक कमरे में शिफ्ट कर दिए गए हैं या फिर दूसरे स्कूलों में मर्ज। विभाग अपने विद्यालयों की इस अव्यवस्था पर ध्यान नहीं दे रहा है। जबकि 2071 परिषदीय स्कूलों में से एक चौथाई स्कूल बिना भवन के संचालित हो रहे हैं।
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले 20 हजार से अधिक बच्चों के लिए भवन उपलब्ध नहीं है। इनकी पढ़ाई या तो खुले आसमान के नीचे हो रही है या टीन शेड के नीचे बैठना पड़ रहा है। कहीं-कहीं बैठने की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इससे बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। विभाग की ओर से ढहाए गए 298 स्कूल भवनों में से सिर्फ 34 स्कूल भवनों का ही निर्माण कराया जा रहा है। इसमें प्राथमिक विद्यालय पर 15.14 लाख और जूनियर विद्यालय के निर्माण पर 28 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सांऊघाट ब्लाॅक में 24, दुबौलिया में दो, कुदरहा में छह और परशुरामपुर में दो विद्यालय भवन का निर्माण 60 प्रतिशत पूरा हो चुका है।
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केस- एक
जमींदोज हो गया विद्यालय, अब दूसरे स्कूल में पढ़ रहे बच्चे
नगर पालिका क्षेत्र के पिकौरा बख्श प्राथमिक स्कूल के निष्प्रयोज्य भवन को एक साल पहले ध्वस्त कर दिया गया। धरातल पर इस विद्यालय का नामोनिशान नहीं है, मगर विभागीय अभिलेख में यह स्कूल संचालित है। यहां के बच्चे दूसरे मुहल्ले के गांधीनगर परिषदीय विद्यालय में मर्ज कर दिए गए हैं। इससे संबंधित विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़कर 256 हो गई है। इस लिहाज से यह विद्यालय भवन भी छोटा पड़ गया। बच्चे टीन शेड में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। यहां भवन के मानक का कोई ध्यान नहीं है।
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केस- दो
एक कमरे में पढ़ाई कर रहे कक्षा एक से आठ तक के बच्चे
बीएसए कार्यालय परिसर में चल रहा आदर्श प्राथमिक विद्यालय भवन भी निष्प्रयोज्य घोषित हो चुका है। नीलामी के बाद भवन ध्वस्त करा दिया गया है। दो साल बीत गए, लेकिन नवीन भवन का निर्माण नहीं हुआ। यहां अध्यनरत कक्षा एक से आठ तक के 200 बच्चों की पढ़ाई के लिए सिर्फ एक कमरे की व्यवस्था है। एक साथ बच्चों का यहां बैठकर पढ़ना संभव नहीं है। प्रति कक्षा का मानक भी पूरा नहीं है।
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केस- तीन
मीतनपुर में एक कमरे में हो रही पढ़ाई
बहादुरपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत मीतनपुर का प्राथमिक विद्यालय भवन जर्जर होने के कारण ध्वस्त किया जा चुका है। यहां केवल एक कमरा बचा है। कुल 90 बच्चे इस विद्यालय में पंजीकृत हैं। एक ही कमरे में सभी कक्षा के बच्चों को पढ़ाई कराई जा रही है। अब सोचिए, विद्यालय होने का कौन सा मानक यहां पूरा हो रहा है।
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केस- चार
प्राथमिक स्कूल खैराटी के पास सिर्फ एक कमरा
बनकटी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय खैराटी के जर्जर भवन को ध्वस्त कराने के बाद सिर्फ एक कमरा शेष बचा है। यहां नवीन भवन अब तक नहीं बना है। नतीजा एक ही कमरे में शिक्षक और स्टॉफ बैठे या बच्चे पढ़ाई करें यह तय नहीं हो पा रहा है। इस विद्यालय मेंं कक्षा एक से पांच तक नामांकित 67 बच्चे एक ही कमरे में बैठकर पढ़ाई कैसे करें इस यक्ष प्रश्न पर विभाग निरुत्तर है।
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कोट
34 विद्यालय भवनों के निर्माण के लिए शासन से धन आवंटित हुआ है। शेष भवनों के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
अनूप कुमार, बीएसए