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Basti News: गबन के मामले में इलाहाबाद बैंक के कैशियर को 25 साल बाद सजा, कोर्ट ने दिया आदेश
Wed, 07 Dec 2022 02:04 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती।
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 07 Dec 2022 02:04 PM IST
सार
बस्ती पुलिस को मार्च 1997 में तहरीर देकर बताया कि उनके द्वारा इलाहाबाद बैैंक में अकाउंट पेयी चेक दिया गया था। नियमानुसार इसका भुगतान संबंधित खातेदार के बैंक खाते में कर दिया गया। चेक की लिखापढ़ी का काम शाखा में कार्यरत लिपिक मो. सगीर अयूब के जिम्मे था।
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(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम अमित मिश्रा की अदालत ने हेराफेरी व गबन के 25 साल पुराने मामले में दोषी इलाबाबाद बैंक के कैशियर को तीन साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 9500 रुपये अर्थदंड लगाते हुए कहा कि इसे न अदा करने पर नौ माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
अभियोजन अधिकारी संजय शुक्ला के निर्देशन में अभियोजन अधिकारी संजीव कुमार गुप्ता ने अदालत को अवगत कराया कि मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के इलाहाबाद बैंक शाखा का है। वादी तेज प्रताप राय ने पुरानी बस्ती पुलिस को मार्च 1997 में तहरीर देकर बताया कि उनके द्वारा इलाहाबाद बैैंक में अकाउंट पेयी चेक दिया गया था। नियमानुसार इसका भुगतान संबंधित खातेदार के बैंक खाते में कर दिया गया। चेक की लिखापढ़ी का काम शाखा में कार्यरत लिपिक मो. सगीर अयूब के जिम्मे था।
उन्होंने बेईमानी की मंशा से सभी चेकों को चुरा लिया और इन्हीं चेकों को बैंक में दूसरे व्यक्ति से प्रस्तुत कराकर 1,47,252 रुपये का भुगतान ले लिया। मामले में पुलिस ने 19 अप्रैल 1997 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। आठ गवाहों के बयान और साक्ष्य के आधार पर न्यायाधीश ने फैसला सुनाया।
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अभियोजन अधिकारी संजय शुक्ला के निर्देशन में अभियोजन अधिकारी संजीव कुमार गुप्ता ने अदालत को अवगत कराया कि मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के इलाहाबाद बैंक शाखा का है। वादी तेज प्रताप राय ने पुरानी बस्ती पुलिस को मार्च 1997 में तहरीर देकर बताया कि उनके द्वारा इलाहाबाद बैैंक में अकाउंट पेयी चेक दिया गया था। नियमानुसार इसका भुगतान संबंधित खातेदार के बैंक खाते में कर दिया गया। चेक की लिखापढ़ी का काम शाखा में कार्यरत लिपिक मो. सगीर अयूब के जिम्मे था।
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उन्होंने बेईमानी की मंशा से सभी चेकों को चुरा लिया और इन्हीं चेकों को बैंक में दूसरे व्यक्ति से प्रस्तुत कराकर 1,47,252 रुपये का भुगतान ले लिया। मामले में पुलिस ने 19 अप्रैल 1997 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। आठ गवाहों के बयान और साक्ष्य के आधार पर न्यायाधीश ने फैसला सुनाया।
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