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Basti News: शाखा डाक पाल को गबन के जुर्म में दो साल की सजा
Fri, 09 Feb 2024 01:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 09 Feb 2024 01:42 AM IST
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बस्ती। न्यायालय एसीजेएम प्रथम उमेश यादव की अदालत ने डाक कर्मचारी को तीन हजार रुपये की बीमा गबन के मामले में दो वर्ष की सजा वा दो हजार रुपये अर्थ दंड से दंडित करने का आदेश दिया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में 15 दिवस का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन अधिकारी पंकज गौतम ने अदालत को बताया कि मुंडेरवा थाना क्षेत्र के अमरडोभा निवासी द्वारिका प्रसाद ने तीन हजार रुपये का बीमा कराया था, लेकिन उन्हें बीमा पत्र नहीं मिला था। इसमें राजेंद्र यादव ने भी गवाही करने से मना किया है।
तहरीर में कहा कि शाखा डाकघर कुरियार में 21 मार्च 1985 को टैंक रोड डाकघर बंबई से बीमा पत्र 18 मार्च 1985 को आया था। शाखा डाकपाल कुरियार दयानंद ने इस बीमा पत्र का वितरण उसी दिन राजेंद्र यादव निवासी बघाडी की गवाही पर दिखाया था। जांच में इस बीमा पत्र के पाने वाले द्वारिका प्रसाद ने बीमा पत्र पाने से इन्कार किया। गवाह राजेंद्र यादव ने भी गवाही से इन्कार किया है।
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इस प्रकार शाखा डाक पाल कुरियार ने इस बीमा पत्र के धन का गबन किया है। पुलिस ने केस दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें पांच गवाहों ने गवाही दी। न्यायाधीश ने साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर 39 साल बाद दोष सिद्ध पाया और सजा मुकर्रर कर दी। आदेश में कहा गया है कि पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित की जाएगी।
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अभियोजन अधिकारी पंकज गौतम ने अदालत को बताया कि मुंडेरवा थाना क्षेत्र के अमरडोभा निवासी द्वारिका प्रसाद ने तीन हजार रुपये का बीमा कराया था, लेकिन उन्हें बीमा पत्र नहीं मिला था। इसमें राजेंद्र यादव ने भी गवाही करने से मना किया है।
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तहरीर में कहा कि शाखा डाकघर कुरियार में 21 मार्च 1985 को टैंक रोड डाकघर बंबई से बीमा पत्र 18 मार्च 1985 को आया था। शाखा डाकपाल कुरियार दयानंद ने इस बीमा पत्र का वितरण उसी दिन राजेंद्र यादव निवासी बघाडी की गवाही पर दिखाया था। जांच में इस बीमा पत्र के पाने वाले द्वारिका प्रसाद ने बीमा पत्र पाने से इन्कार किया। गवाह राजेंद्र यादव ने भी गवाही से इन्कार किया है।
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इस प्रकार शाखा डाक पाल कुरियार ने इस बीमा पत्र के धन का गबन किया है। पुलिस ने केस दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें पांच गवाहों ने गवाही दी। न्यायाधीश ने साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर 39 साल बाद दोष सिद्ध पाया और सजा मुकर्रर कर दी। आदेश में कहा गया है कि पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित की जाएगी।