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Basti News: रामायण सिटी को झटका... बीडीए को नहीं मिल पा रही 25 एकड़ जमीन
Thu, 17 Aug 2023 11:39 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 17 Aug 2023 11:39 PM IST
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- जमीन तलाशने की साल भर से चल रही कवायद बेनतीजा, सरकारी भूमि देने से राजस्व विभाग ने भी खड़े कर लिए हाथ
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) क्षेत्र में प्रस्तावित रामायण सिटी को तगड़ा झटका लगा है। इसके लिए जरूरी 25 एकड़ जमीन प्राधिकरण क्षेत्र में उपलब्ध नहीं हो पा रही है। साल भर से जमीन तलाशने की कवायद चल रही है, लेकिन सफलता हाथ नहीं लग पा रही है। एक स्थान पर जमीन उपलब्ध कराने से प्रशासन ने भी हाथ खड़े कर लिए हैं। प्राधिकरण के दायरे में इतने क्षेत्रफल की सरकारी जमीन राजस्व अभिलेखों में दर्ज भी नहीं है। प्राधिकरण जमीन खरीदने के लिए भी तैयार है, लेकिन इतने बड़े रकबे के काश्तकार नहीं मिल रहे हैं।
शासन की प्रदेश के सभी प्राधिकरण क्षेत्र में रामायण सिटी बसाने की योजना है। इसके लिए कम से कम 25 एकड़ भूमि अनिवार्य की गई है। बस्ती में प्राधिकरण के 151 वर्ग किलोमीटर के दायरे में रामायण सिटी के नाम से हाईटेक शहरी संरचना तैयार होनी है। मगर पहले पायदान पर ही यह लटक गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि ही उपलब्ध नहीं हो पा रही है। बीडीए की परिधि में आने वाले नगर पालिका समेत 217 गांवों में इतने रकबे की खाली जमीन नहीं है। कुछ किसानों से जमीन खरीदने की पहल हुई तो जरूरत के मुताबिक क्षेत्रफल पूरा नहीं हो सका। समूह में काश्तकार तैयार नहीं हो पा रहे हैं। रामायण सिटी बसाने के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रावधान नहीं है। बीडीए को खुद जमीन का इंतजाम कर योजना को क्रियान्वित करना है।
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विकास की नई उड़ान नहीं भर पा रहा बीडीए
पांच साल की उम्र गुजार चुका बीडीए विकास की नई उड़ान नहीं भर पा रहा है। शासन की पहल पर रामायण सिटी बसाने की योजना के जरिए उम्मीद थी कि बीडीए को नई पहचान मिलेगी। महानगरों की भांति यहां भी प्राधिकरण के खाते में एक सुंदर संयोजित खुद का शहर होगा। लेकिन, जमीन न मिलने के कारण बीडीए बैकफुट पर आ गया है। यह महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटक गई है।
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ऐसी होती रामायण सिटी
रामायण सिटी बिल्कुल नए पैटर्न पर तैयार की जानी है। आधुनिक डिजाइन की बहुमंजिली इमारतों के साथ इसका लंबा-चौड़ा परिसर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होता। इसमें बाजार, आवासीय सुविधा के साथ प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र का पूरा दर्शन मिलता। रामायण सिटी में प्रभु राम, माता सीता और उनके भाई भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न, माता कौशल्या, पिता चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ, श्रीहनुमान जी एवं रामकथा के अन्य पात्रों की स्मृतियों को संजोते हुए काॅलोनियां, शापिंग माल, सड़कें, पार्क, नौका बिहार, झूला, मल्टी कांप्लेक्स, पेट्रोल पंप आदि विकसित किए जाने हैं। जिस क्षेत्र में यह सिटी विकसित होगी, वह विकास की दृष्टि से काफी आगे होता। आसपास के क्षेत्रों के लिए भी विकास और रोजगार के नए द्वार खुल जाते। मगर, बस्ती में शासन की यह मंशा साकार होती नजर नहीं आ रही है।
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इन जगहों पर हुई जमीन की तलाश
शहर से लगभग आठ किलोमीटर दूर रामपुर में बने महर्षि वशिष्ठ मेडिकल काॅलेज के इर्द-गिर्द बीडीए की ओर से जमीन की तलाश की जा रही थी। एक काश्तकार से बातचीत भी हुई, लेकिन संबंधित के पास केवल दस एकड़ भूमि ही उपलब्ध है। अगल-बगल के काश्तकारों ने भूमि देने से मना कर दिया। इसके अलावा टीबी अस्पताल से दो किलोमीटर दूर सोनबरसा गांव में भी रामायण सिटी के लिए जमीन खोजी गई। यहां बीडीए ने किसानों को साझेदार बनाने का भी प्रलोभन दिया। बावजूद इसके, बात नहीं बन पाई। फुटहिया के पास कुछ काश्तकार जमीन देने के लिए राजी हुए तो वह मानक के विपरीत निकली। कुआनो का दियारा होने के नाते यहां जमीन की सतह काफी नीचे है।
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समतल भूभाग पर निर्मित होगी रामायण सिटी
शासन से तय मानक के अनुसार, समतल भूभाग पर रामायण सिटी बसाए जाने की योजना है, जहां आवागमन की अच्छी सुविधा मिल सके। मुख्य मार्ग से रामायण सिटी को जोड़ा जा सके, ताकि दूर से ही नए पैटर्न की यह सिटी लोगों की नजर में आ जाए। इसीलिए निचली सतह वाली जमीनों को अस्वीकार कर दिया जा रहा है।
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अब तक नहीं हुए सामूहिक प्रयास
जानकारों का कहना है कि बीडीए की तरफ से जमीन तलाशने के लिए फिलहाल कोई सामूहिक प्रयास नहीं हुए हैं। जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि, किसान एवं प्रबुद्धजनों का भी योगदान सुनिश्चित नहीं किया गया है। इस बड़ी परियोजना के लिए किसी समिति आदि का गठन भी नहीं किया गया है, जिससे सामूहिक प्रयास से जमीन की तलाश की जा सके। बीडीए अकेले अपने दम पर जमीन की खोज में जुटा हुआ है।
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बीडीए से सीधे संपर्क कर सकते हैं काश्तकार
रामायण सिटी के लिए जमीन मुहैया कराने के इच्छुक किसान सीधे बीडीए से संपर्क कर सकते हैं। बीडीए उनकी जमीन की अच्छी कीमत देने को तैयार है। शर्त है कि जमीन 25 एकड़ के आसपास होनी चाहिए और समतल भूभाग हो। यदि कई किसान मिलकर जमीन का प्रबंधन कर रहे हैं तब भी बीडीए को कोई एतराज नहीं है। -संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) क्षेत्र में प्रस्तावित रामायण सिटी को तगड़ा झटका लगा है। इसके लिए जरूरी 25 एकड़ जमीन प्राधिकरण क्षेत्र में उपलब्ध नहीं हो पा रही है। साल भर से जमीन तलाशने की कवायद चल रही है, लेकिन सफलता हाथ नहीं लग पा रही है। एक स्थान पर जमीन उपलब्ध कराने से प्रशासन ने भी हाथ खड़े कर लिए हैं। प्राधिकरण के दायरे में इतने क्षेत्रफल की सरकारी जमीन राजस्व अभिलेखों में दर्ज भी नहीं है। प्राधिकरण जमीन खरीदने के लिए भी तैयार है, लेकिन इतने बड़े रकबे के काश्तकार नहीं मिल रहे हैं।
शासन की प्रदेश के सभी प्राधिकरण क्षेत्र में रामायण सिटी बसाने की योजना है। इसके लिए कम से कम 25 एकड़ भूमि अनिवार्य की गई है। बस्ती में प्राधिकरण के 151 वर्ग किलोमीटर के दायरे में रामायण सिटी के नाम से हाईटेक शहरी संरचना तैयार होनी है। मगर पहले पायदान पर ही यह लटक गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि ही उपलब्ध नहीं हो पा रही है। बीडीए की परिधि में आने वाले नगर पालिका समेत 217 गांवों में इतने रकबे की खाली जमीन नहीं है। कुछ किसानों से जमीन खरीदने की पहल हुई तो जरूरत के मुताबिक क्षेत्रफल पूरा नहीं हो सका। समूह में काश्तकार तैयार नहीं हो पा रहे हैं। रामायण सिटी बसाने के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रावधान नहीं है। बीडीए को खुद जमीन का इंतजाम कर योजना को क्रियान्वित करना है।
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विकास की नई उड़ान नहीं भर पा रहा बीडीए
पांच साल की उम्र गुजार चुका बीडीए विकास की नई उड़ान नहीं भर पा रहा है। शासन की पहल पर रामायण सिटी बसाने की योजना के जरिए उम्मीद थी कि बीडीए को नई पहचान मिलेगी। महानगरों की भांति यहां भी प्राधिकरण के खाते में एक सुंदर संयोजित खुद का शहर होगा। लेकिन, जमीन न मिलने के कारण बीडीए बैकफुट पर आ गया है। यह महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटक गई है।
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ऐसी होती रामायण सिटी
रामायण सिटी बिल्कुल नए पैटर्न पर तैयार की जानी है। आधुनिक डिजाइन की बहुमंजिली इमारतों के साथ इसका लंबा-चौड़ा परिसर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होता। इसमें बाजार, आवासीय सुविधा के साथ प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र का पूरा दर्शन मिलता। रामायण सिटी में प्रभु राम, माता सीता और उनके भाई भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न, माता कौशल्या, पिता चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ, श्रीहनुमान जी एवं रामकथा के अन्य पात्रों की स्मृतियों को संजोते हुए काॅलोनियां, शापिंग माल, सड़कें, पार्क, नौका बिहार, झूला, मल्टी कांप्लेक्स, पेट्रोल पंप आदि विकसित किए जाने हैं। जिस क्षेत्र में यह सिटी विकसित होगी, वह विकास की दृष्टि से काफी आगे होता। आसपास के क्षेत्रों के लिए भी विकास और रोजगार के नए द्वार खुल जाते। मगर, बस्ती में शासन की यह मंशा साकार होती नजर नहीं आ रही है।
इन जगहों पर हुई जमीन की तलाश
शहर से लगभग आठ किलोमीटर दूर रामपुर में बने महर्षि वशिष्ठ मेडिकल काॅलेज के इर्द-गिर्द बीडीए की ओर से जमीन की तलाश की जा रही थी। एक काश्तकार से बातचीत भी हुई, लेकिन संबंधित के पास केवल दस एकड़ भूमि ही उपलब्ध है। अगल-बगल के काश्तकारों ने भूमि देने से मना कर दिया। इसके अलावा टीबी अस्पताल से दो किलोमीटर दूर सोनबरसा गांव में भी रामायण सिटी के लिए जमीन खोजी गई। यहां बीडीए ने किसानों को साझेदार बनाने का भी प्रलोभन दिया। बावजूद इसके, बात नहीं बन पाई। फुटहिया के पास कुछ काश्तकार जमीन देने के लिए राजी हुए तो वह मानक के विपरीत निकली। कुआनो का दियारा होने के नाते यहां जमीन की सतह काफी नीचे है।
समतल भूभाग पर निर्मित होगी रामायण सिटी
शासन से तय मानक के अनुसार, समतल भूभाग पर रामायण सिटी बसाए जाने की योजना है, जहां आवागमन की अच्छी सुविधा मिल सके। मुख्य मार्ग से रामायण सिटी को जोड़ा जा सके, ताकि दूर से ही नए पैटर्न की यह सिटी लोगों की नजर में आ जाए। इसीलिए निचली सतह वाली जमीनों को अस्वीकार कर दिया जा रहा है।
अब तक नहीं हुए सामूहिक प्रयास
जानकारों का कहना है कि बीडीए की तरफ से जमीन तलाशने के लिए फिलहाल कोई सामूहिक प्रयास नहीं हुए हैं। जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि, किसान एवं प्रबुद्धजनों का भी योगदान सुनिश्चित नहीं किया गया है। इस बड़ी परियोजना के लिए किसी समिति आदि का गठन भी नहीं किया गया है, जिससे सामूहिक प्रयास से जमीन की तलाश की जा सके। बीडीए अकेले अपने दम पर जमीन की खोज में जुटा हुआ है।
बीडीए से सीधे संपर्क कर सकते हैं काश्तकार
रामायण सिटी के लिए जमीन मुहैया कराने के इच्छुक किसान सीधे बीडीए से संपर्क कर सकते हैं। बीडीए उनकी जमीन की अच्छी कीमत देने को तैयार है। शर्त है कि जमीन 25 एकड़ के आसपास होनी चाहिए और समतल भूभाग हो। यदि कई किसान मिलकर जमीन का प्रबंधन कर रहे हैं तब भी बीडीए को कोई एतराज नहीं है। -संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए।