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बंदियों को मिले पौने पांच लाख पारिश्रमिक
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बंदियों को मिले पौने पांच लाख पारिश्रमिक
बस्ती। जनपद कारागार में बंदियों को काम के बदले पौने पांच लाख रुपये पारिश्रमिक का भुगतान किया गया। जुलाई से 19 अगस्त तक कुल 150 बंदियों को चार लाख 77 हजार 232 रुपये का पारिश्रमिक बना था।
जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पाण्डेय ने बताया कि बंदियों के पारिश्रमिक का भुगतान उनके परिवार के मिलने वाले सदस्य या क़ैदी की रिहाई के समय एकाउंट्सपेयी चेक से किया गया है। बंदियों के परिजन मिलाई के लिए समय समय पर आते रहते हैं। उस समय बंदी अपने परिजनों को अपने पारिश्रमिक का चेक उपलब्ध कराते हैं। अधीक्षक ने बताया कि बंदियों के पारिश्रमिक भी अलग-अलग हैं। जो बंदी किसी काम में दक्ष होते हैं, उन्हें कुशल श्रमिक के रूप में 40 रुपये प्रतिदिन, अर्धकुशल बंदियों को 30 रुपये तथा साफ सफाई एवं बागवानी का काम करने वाले अकुशल श्रेणी वाले को 25 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पारिश्रमिक दिया जाता है। उसको मिलने वाले पारिश्रमिक से वे अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। जेल अधीक्षक श्री पाण्डेय ने बताया कि इस पारिश्रमिक से बंदियो के परिवारों का गुजारा चल रहा है। जेल में इस समय 1377 बंदी है। 150 से अधिक बंदी जेल में ऐसे हैं जो काम करके पैसे जमा कर रहे हैं। जेल प्रशासन के पास वह अपनी मेहनत की रकम को एकत्रित करवाते हैं। बाद में परिजनों को सौंप देते हैं।
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बस्ती। जनपद कारागार में बंदियों को काम के बदले पौने पांच लाख रुपये पारिश्रमिक का भुगतान किया गया। जुलाई से 19 अगस्त तक कुल 150 बंदियों को चार लाख 77 हजार 232 रुपये का पारिश्रमिक बना था।
जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पाण्डेय ने बताया कि बंदियों के पारिश्रमिक का भुगतान उनके परिवार के मिलने वाले सदस्य या क़ैदी की रिहाई के समय एकाउंट्सपेयी चेक से किया गया है। बंदियों के परिजन मिलाई के लिए समय समय पर आते रहते हैं। उस समय बंदी अपने परिजनों को अपने पारिश्रमिक का चेक उपलब्ध कराते हैं। अधीक्षक ने बताया कि बंदियों के पारिश्रमिक भी अलग-अलग हैं। जो बंदी किसी काम में दक्ष होते हैं, उन्हें कुशल श्रमिक के रूप में 40 रुपये प्रतिदिन, अर्धकुशल बंदियों को 30 रुपये तथा साफ सफाई एवं बागवानी का काम करने वाले अकुशल श्रेणी वाले को 25 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पारिश्रमिक दिया जाता है। उसको मिलने वाले पारिश्रमिक से वे अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। जेल अधीक्षक श्री पाण्डेय ने बताया कि इस पारिश्रमिक से बंदियो के परिवारों का गुजारा चल रहा है। जेल में इस समय 1377 बंदी है। 150 से अधिक बंदी जेल में ऐसे हैं जो काम करके पैसे जमा कर रहे हैं। जेल प्रशासन के पास वह अपनी मेहनत की रकम को एकत्रित करवाते हैं। बाद में परिजनों को सौंप देते हैं।
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