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Basti News: तीन साल से खाली हैं आयुष दवाओं के भंडार
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एक साल पहले आधा कर दिया है दवाओं का बजट
स्टोर के अधिकारी नहीं लेते दवा मंगाने में रुचि
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। तीन साल से आयुष चिकित्सा के दवाओं का भंडार खाली है। यह अलग बात है कि सरकार हर साल करोड़ों रुपये आयुष पर खर्च कर रही है। मगर, दवाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारी रुचि नहीं ले रहे हैं। नतीजतन आयुष चिकित्सक मरीजों को एलोपैथ दवाएं लिखते हैं।
एक तरफ सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करते हुए आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही हैं। वहीं, सरकारी अस्पतालों में आयुष से संबंधित आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी आदि दवाओं से अस्पताल के भंडार खाली हैं। आयुष को बढ़ावा देने के लिए जनपद में एलोपैथ के साथ आयुष विग भी स्थापित है। इसके तहत आयुष के महिला-पुरुष मिलाकर कुल 22 चिकित्सक नियुक्त हैं। इसमें तीन जिला अस्पताल में, जबकि 19 जनपद के अन्य प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नियुक्त हैं।
जिला अस्पताल में आयुष विभाग में रोज 250 से 300, जबकि जिले में प्रतिदिन आयुष विभाग में 800 की ओपीडी होती है। इसमें विभाग के चिकित्सक मरीजों को आयुष के बजाय एलोपैथ की दवा का सुझाव देने को मजबूर हैं।
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आयुष विंग के जिला नोडल अधिकारी डॉ. वीके वर्मा ने बताया कि जनपद में तीन साल से आयुष दवा नहीं है। इसके लिए कई बार सीएमओ को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है, मगर कोई लाभ नहीं हुआ।
...
पहले जिले को मिलता था 22 लाख रुपये का बजट
आयुष को बढ़ावा देने के लिए शासन की ओर से 22 लाख रुपये बजट के रूप में जिले को मिलता था। मगर, पिछले वर्ष से यह बजट आधा यानी 11 लाख रुपये कर दिया गया। यह धन भी उपयोग नहीं हो पाता, जिससे बजट लौट जाता है।
...
कोट
बजट न होने के कारण आयुष की दवा की खरीदारी नहीं की गई। हर साल पत्र लिखा जाता है। मगर, दवा या अलग से कोई बजट नहीं मिलता है। जल्द ही आयुष विभाग में आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी आदि की दवा उपलब्ध हो जाएगी।
-रमाशंकर दुबे, सीएमओ
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स्टोर के अधिकारी नहीं लेते दवा मंगाने में रुचि
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। तीन साल से आयुष चिकित्सा के दवाओं का भंडार खाली है। यह अलग बात है कि सरकार हर साल करोड़ों रुपये आयुष पर खर्च कर रही है। मगर, दवाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारी रुचि नहीं ले रहे हैं। नतीजतन आयुष चिकित्सक मरीजों को एलोपैथ दवाएं लिखते हैं।
एक तरफ सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करते हुए आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही हैं। वहीं, सरकारी अस्पतालों में आयुष से संबंधित आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी आदि दवाओं से अस्पताल के भंडार खाली हैं। आयुष को बढ़ावा देने के लिए जनपद में एलोपैथ के साथ आयुष विग भी स्थापित है। इसके तहत आयुष के महिला-पुरुष मिलाकर कुल 22 चिकित्सक नियुक्त हैं। इसमें तीन जिला अस्पताल में, जबकि 19 जनपद के अन्य प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नियुक्त हैं।
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जिला अस्पताल में आयुष विभाग में रोज 250 से 300, जबकि जिले में प्रतिदिन आयुष विभाग में 800 की ओपीडी होती है। इसमें विभाग के चिकित्सक मरीजों को आयुष के बजाय एलोपैथ की दवा का सुझाव देने को मजबूर हैं।
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आयुष विंग के जिला नोडल अधिकारी डॉ. वीके वर्मा ने बताया कि जनपद में तीन साल से आयुष दवा नहीं है। इसके लिए कई बार सीएमओ को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है, मगर कोई लाभ नहीं हुआ।
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पहले जिले को मिलता था 22 लाख रुपये का बजट
आयुष को बढ़ावा देने के लिए शासन की ओर से 22 लाख रुपये बजट के रूप में जिले को मिलता था। मगर, पिछले वर्ष से यह बजट आधा यानी 11 लाख रुपये कर दिया गया। यह धन भी उपयोग नहीं हो पाता, जिससे बजट लौट जाता है।
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कोट
बजट न होने के कारण आयुष की दवा की खरीदारी नहीं की गई। हर साल पत्र लिखा जाता है। मगर, दवा या अलग से कोई बजट नहीं मिलता है। जल्द ही आयुष विभाग में आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी आदि की दवा उपलब्ध हो जाएगी।
-रमाशंकर दुबे, सीएमओ