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इंसेफेलाइटिस प्रभावित गांव पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
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ग्रामीणों को एई-जेईएस से बचाव के बारे में जानकारी देती स्वास्थ्य विभाग की टीम।
- फोटो : BASTI
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इंसेफेलाइटिस प्रभावित गांव पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
जेई-एईएस से बचाव की जानकारी दी
अमर उजाला ब्यूरो
गौर। संचारी रोगों पर नियंत्रण व जेई-एईएस से बचाव की लोगों को जानकारी देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सक्रियता बढ़ा दी है। रविवार को विभाग की टीम रविवार को विभाग की टीम इंसेफेलाइटिस से प्रभावित गांव बभनगांवा कला के प्राथमिक विद्यालय पहुंची। यहां टीम ने लोगों को संचारी रोगों के प्रति जागरूक किया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर के प्रभारी अधीक्षक डॉ. रजनीश श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम जापानी गांव बभनगांवा कला के प्राथमिक विद्यालय पहुंची। यहां ग्रामीणों को संक्रामक बीमारियों से बचने के उपाय बताए गए। प्रभारी अधीक्षक ने लोगों को बताया कि बरसात के मौसम में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इससे बचाव ही कारगर उपाय हैं। उन्होंने ग्रामीणों को दूषित जल का सेवन न करने, छोटे हैंडपंपों का पानी न पीने का सुझाव दिया। कहा कि मजबूरी हो तो छोटे हैंडंपप का पानी उबाल कर पिएं। छात्र-छात्राओं को साबुन से हाथ धुलने व स्वच्छ जल के सेवन के लिए जागरूक किया। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी राम आसरे सरोज ने बताया कि इस समय संचारी रोग पखवाड़ा चल रहा है। इस मौसम में सबसे ज्यादा मच्छरों के प्रकोप से डेंगू व मलेरिया जैसी बीमारी होती है। एक से 15 वर्ष तक के बच्चों पर इसका असर ज्यादा पड़ता है। बच्चों के बीमार होने पर फौरन नजदीक के अस्पताल पर पहुंचाएं। ताकि समय रहते उपचार किया जा सके। इस दौरान यूनिसेफ के गुलजार त्यागी, सरोजनी, मालती, रमेश, दीनानाथ आदि मौजूद रहे।
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जेई-एईएस से बचाव की जानकारी दी
अमर उजाला ब्यूरो
गौर। संचारी रोगों पर नियंत्रण व जेई-एईएस से बचाव की लोगों को जानकारी देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सक्रियता बढ़ा दी है। रविवार को विभाग की टीम रविवार को विभाग की टीम इंसेफेलाइटिस से प्रभावित गांव बभनगांवा कला के प्राथमिक विद्यालय पहुंची। यहां टीम ने लोगों को संचारी रोगों के प्रति जागरूक किया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर के प्रभारी अधीक्षक डॉ. रजनीश श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम जापानी गांव बभनगांवा कला के प्राथमिक विद्यालय पहुंची। यहां ग्रामीणों को संक्रामक बीमारियों से बचने के उपाय बताए गए। प्रभारी अधीक्षक ने लोगों को बताया कि बरसात के मौसम में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इससे बचाव ही कारगर उपाय हैं। उन्होंने ग्रामीणों को दूषित जल का सेवन न करने, छोटे हैंडपंपों का पानी न पीने का सुझाव दिया। कहा कि मजबूरी हो तो छोटे हैंडंपप का पानी उबाल कर पिएं। छात्र-छात्राओं को साबुन से हाथ धुलने व स्वच्छ जल के सेवन के लिए जागरूक किया। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी राम आसरे सरोज ने बताया कि इस समय संचारी रोग पखवाड़ा चल रहा है। इस मौसम में सबसे ज्यादा मच्छरों के प्रकोप से डेंगू व मलेरिया जैसी बीमारी होती है। एक से 15 वर्ष तक के बच्चों पर इसका असर ज्यादा पड़ता है। बच्चों के बीमार होने पर फौरन नजदीक के अस्पताल पर पहुंचाएं। ताकि समय रहते उपचार किया जा सके। इस दौरान यूनिसेफ के गुलजार त्यागी, सरोजनी, मालती, रमेश, दीनानाथ आदि मौजूद रहे।
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