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तबाही मचाने के मुहाने पर घाघरा
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Sun, 31 Jul 2016 11:30 PM IST
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विक्रमजोत क्षेत्र के लोनपुर बंधे के सुरक्षा मे लगे मजदूर।
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घाघरा का जलस्तर रविवार को एक बार फिर बढ़ने लगा। नदी खतरे के निशान 92.730 मीटर से 30 सेमी ऊपर 93.00 मीटर के स्तर पर बह रही है। अब बाढ़ का पानी बंधा विहीन गांवों की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि नदी 1971-72 के तबाही के मंजर को फिर दोहरा सकती है।
शनिवार तक स्थिर घाघरा का जलस्तर रविवार को फिर बढ़कर खतरे के निशान से 30 सेमी ऊपर पहुंच गया है। शनिवार के जलस्तर 92.80 मीटर से बढकर रविवार को 93:00 मीटर हो गया। गौरियानैन पर सीधे टकराने वाली मुख्य धारा थोड़ी दूर हटकर अब बंधे के दोनों किनारों जहां बांध नहीं बन सका है वहां के आबादी क्षेत्र पर दबाव बना रही है। ऐसे में तटीय गांवों भदोई, रानीपुर, कठवनिया, केशवपुर, रामनगर, लोलपुर, लम्ती, मुण्डेरीपुर सहित कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरा पाठक में कटान का डरावना इतिहास जिंदा हो उठा है। वहीं बचाव और राहत कार्य की प्रगति धीमी है।
1971-72 में घाघरा की बाढ़ ने दर्जनों गांवों का अस्तित्व मिटा डाला था। उस समय के जल प्रलय की निशानी कल्याणपुर और भरथापुर में आज भी देखने को मिलते हैं। यहां पर मौजूद पुराने ठोकरों को ग्रामीणों की सलाह पर डीएम ने पुनर्जीवित करने का निर्देश दिया है। बाढ़ कार्य खंड ने ईंटे भरी बोरी से ऊंचा करने का काम शुरू कर दिया है। शनिवार रात अचानक बढ़ी नदी से लोलपुर-विक्रमजोत बांध के ठोकर नंबर एक पर कटान शुरू हुई और देखते देखते एक हिस्सा कट गया। मौके पर मौजूद अवर अभियंता शिवशंकर सिंह ने यहां बोल्डर, ईंट, झावा डालने का काम तेज कराया मगर कटान का पाट लंबा होने से बेअसर रहा। दूर दूर तक सैकड़ों एकड़ खेत डूब गए हैं।
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केशवपुर, भदोई व रानीपुर कठवनिया के कई बगीचे व खेतों में रातों रात कटान तेज हो गई है। बांस के पेटीनुमा झावे में ईट भर भरकर मोटे रस्सी से बांध कर तटबंधों से नदी में लटकाया गया है। यह वही किनारा है जहां बालू खनन माफिया सबसे ज्यादा खनन करते हैं। बांध से सटे अभी भी हजारों ट्रक बालू डंप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी का जिले में यह खतरनाक रूप देने में इन्हीं की भूमिका है मगर प्रशासन की शह पर इनका कुछ नही हुआ और सैकड़ों घर उजड़ गए। कई बेघर होने की कगार पर हैं।
दुबौलिया और कुदरहा प्रतिनिधि के मुताबिक बाढ़ नियंत्रण के लिए दोनों समितियां विस्थापन की स्थित पर व्यवस्था बना रही हैं। चांदपुर, पारा के ठोकरों की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जा रही है। विशुदासपुर व खजानचीपुरवा के पास हुई कटान तेज होने से लोगों मे दहशत है। कलवारी थाना क्षेत्र के वीडी बांध से बैड़ारी एहतमाली जाने वाले मार्ग पर पानी भरा है।
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शनिवार तक स्थिर घाघरा का जलस्तर रविवार को फिर बढ़कर खतरे के निशान से 30 सेमी ऊपर पहुंच गया है। शनिवार के जलस्तर 92.80 मीटर से बढकर रविवार को 93:00 मीटर हो गया। गौरियानैन पर सीधे टकराने वाली मुख्य धारा थोड़ी दूर हटकर अब बंधे के दोनों किनारों जहां बांध नहीं बन सका है वहां के आबादी क्षेत्र पर दबाव बना रही है। ऐसे में तटीय गांवों भदोई, रानीपुर, कठवनिया, केशवपुर, रामनगर, लोलपुर, लम्ती, मुण्डेरीपुर सहित कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरा पाठक में कटान का डरावना इतिहास जिंदा हो उठा है। वहीं बचाव और राहत कार्य की प्रगति धीमी है।
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1971-72 में घाघरा की बाढ़ ने दर्जनों गांवों का अस्तित्व मिटा डाला था। उस समय के जल प्रलय की निशानी कल्याणपुर और भरथापुर में आज भी देखने को मिलते हैं। यहां पर मौजूद पुराने ठोकरों को ग्रामीणों की सलाह पर डीएम ने पुनर्जीवित करने का निर्देश दिया है। बाढ़ कार्य खंड ने ईंटे भरी बोरी से ऊंचा करने का काम शुरू कर दिया है। शनिवार रात अचानक बढ़ी नदी से लोलपुर-विक्रमजोत बांध के ठोकर नंबर एक पर कटान शुरू हुई और देखते देखते एक हिस्सा कट गया। मौके पर मौजूद अवर अभियंता शिवशंकर सिंह ने यहां बोल्डर, ईंट, झावा डालने का काम तेज कराया मगर कटान का पाट लंबा होने से बेअसर रहा। दूर दूर तक सैकड़ों एकड़ खेत डूब गए हैं।
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केशवपुर, भदोई व रानीपुर कठवनिया के कई बगीचे व खेतों में रातों रात कटान तेज हो गई है। बांस के पेटीनुमा झावे में ईट भर भरकर मोटे रस्सी से बांध कर तटबंधों से नदी में लटकाया गया है। यह वही किनारा है जहां बालू खनन माफिया सबसे ज्यादा खनन करते हैं। बांध से सटे अभी भी हजारों ट्रक बालू डंप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी का जिले में यह खतरनाक रूप देने में इन्हीं की भूमिका है मगर प्रशासन की शह पर इनका कुछ नही हुआ और सैकड़ों घर उजड़ गए। कई बेघर होने की कगार पर हैं।
दुबौलिया और कुदरहा प्रतिनिधि के मुताबिक बाढ़ नियंत्रण के लिए दोनों समितियां विस्थापन की स्थित पर व्यवस्था बना रही हैं। चांदपुर, पारा के ठोकरों की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जा रही है। विशुदासपुर व खजानचीपुरवा के पास हुई कटान तेज होने से लोगों मे दहशत है। कलवारी थाना क्षेत्र के वीडी बांध से बैड़ारी एहतमाली जाने वाले मार्ग पर पानी भरा है।